श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-04 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय गायत्री-हृदय तथा उसका अंगन्यास गायत्रीहृदयम् नारदजी बोले — हे भगवन्! हे देवदेवेश ! हे भूतभव्यजगत्प्रभो ! मैंने गायत्रीमन्त्रविग्रह तथा दिव्य गायत्रीकवच के विषय में सुन लिया। अब मैं श्रेष्ठ ‘गायत्रीहृदय’ सुनना चाहता हूँ, जिसके धारण करने से… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-03 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय श्रीगायत्री का ध्यान और गायत्री कवच का वर्णन गायत्रीमन्त्रकवचवर्णनम् नारदजी बोले — हे स्वामिन्! हे सम्पूर्ण जगत् के नाथ! हे प्रभो ! हे चौंसठ कलाओं के ज्ञाता! हे योगवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! मनुष्य किस पुण्यकर्म से पापमुक्त… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-02 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय गायत्री के चौबीस वर्णों की शक्तियों, रंगों एवं मुद्राओं का वर्णन गायत्रिशक्त्यादिप्रतिपादनम् श्रीनारायण बोले — हे महामुने ! उन वर्णों की कौन-कौन-सी शक्तियाँ हैं, अब आप उन्हें सुनिये। वामदेवी, प्रिया, सत्या, विश्वा, भद्रविलासिनी, प्रभावती, जया, शान्ता, कान्ता,… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-01 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय गायत्री जप का माहात्म्य तथा गायत्री के चौबीस वर्णों के ऋषि, छन्द आदि का वर्णन गायत्रीविचारः नारदजी बोले — हे देव ! हे प्रभो ! आपने सदाचार- विधि का वर्णन कर दिया; उस विधि का माहात्म्य अत्यन्त… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-24 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय कामना-सिद्धि और उपद्रव-शान्ति के लिये गायत्री के विविध प्रयोग प्रातश्चिन्तनम् नारदजी बोले — हे महाभाग ! हे नारायण ! हे करुणा-निधान ! अब आप गायत्री के शान्ति आदि से सम्बद्ध प्रयोगों का संक्षेप में वर्णन कीजिये ॥… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-23 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय कृच्छ्रचान्द्रायण, प्राजापत्य आदि व्रतोंका वर्णन तप्तकृच्छ्रादिलक्षणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] साधकों में उत्तम विद्वान् पुरुष को भोजन के पश्चात् ‘ॐ अमृतापिधानमसि’ – इस मन्त्र का उच्चारण करके आचमन करना चाहिये और पात्र में अवशिष्ट अन्न… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-22 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय बलिवैश्वदेव और प्राणाग्निहोत्र की विधि वैश्वदेवादिविधिनिरूपणम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन्! अब वैश्वदेव की विधि सुनिये। पुरश्चरण के प्रसंग में यह भी मेरी स्मृति में आ गया है ॥ १ ॥ देवयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, भूतयज्ञ, पितृयज्ञ और पाँचवाँ… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-21 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय गायत्री पुरश्चरण और उसका फल गायत्रीपुरश्चरणविधिकथनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! इसके बाद अब आप देवी के पापनाशक, पुण्यप्रद और यथेष्ट फल देने वाले पुरश्चरण के विषय में सुनिये ॥ १ ॥ पर्वत के शिखर पर,… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-20 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय तर्पण तथा सायंसन्ध्या का वर्णन ब्रह्मयज्ञादिकीर्तनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! द्विज को चाहिये कि पहले तीन बार आचमन करके दो बार मार्जन करे। इसके बाद पहले अपने दाहिने हाथ का तदनन्तर पैरों का प्रोक्षण करे। इसी… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-19 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-19 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-एकोनविंशोऽध्यायः उन्नीसवाँ अध्याय मध्याह्न-सन्ध्या तथा गायत्री-जप का फल मध्याह्नसंध्यावर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! अब आप मध्याह्न- कालीन पुण्यदायिनी सन्ध्या के विषय में सुनिये, जिसका अनुष्ठान करने से अद्भुत तथा अतिश्रेष्ठ फल प्राप्त होता है ॥ १ ॥ युवावस्था… Read More