श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-18 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-अष्टादशोऽध्यायः अठारहवाँ अध्याय भगवती की पूजा-विधि का वर्णन, अन्नपूर्णादेवी के माहात्म्य में राजा बृहद्रथ का आख्यान बृहद्रथकथानकम् नारदजी बोले — हे मानद ! अब मैं श्रीदेवी की विशेष पूजा का विधान सुनना चाहता हूँ, जिसके करने से मनुष्य कृतकृत्य हो… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-17 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-सप्तदशोऽध्यायः सत्रहवाँ अध्याय गायत्री-महिमा सन्ध्यादिकृत्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! भिन्न पादवाली गायत्री ब्रह्महत्या का शमन करने वाली है तथा अभिन्न पादवाली गायत्री के जप से ब्रह्महत्या का पाप लगता है । जो द्विज अभिन्न पादवाली गायत्री का जप करते… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-16 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-षोडशोऽध्यायः सोलहवाँ अध्याय सन्ध्योपासना तथा उसका माहात्म्य सन्ध्योपासननिरूपणम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] मैंने आपसे भस्म धारण करने के माहात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन कर दिया; अब आप पुण्यदायक तथा उत्तम सन्ध्योपासन के विषय में सुनिये ॥ १ ॥ हे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-15 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-पञ्चदशोऽध्यायः पन्द्रहवाँ अध्याय भस्म-माहात्म्य के सम्बन्ध में दुर्वासा मुनि और कुम्भीपाकस्थ जीवों का आख्यान, ऊर्ध्वपुण्ड्र का माहात्म्य त्रिपुण्ड्रोर्ध्वपुण्ड्रधारणविधिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — द्विजों को ‘अग्निरिति भस्म’ आदि मन्त्रों से भस्म को श्रद्धापूर्वक शुद्ध करके अपने ललाट आदि पर त्रिपुण्ड्ररूप में धारण… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय भस्म-स्नान का महत्त्व विभूतिधारणमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — जो मनुष्य शरीर में भस्म धारण करने वाले को प्रसन्नतापूर्वक धन देता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमें सन्देह नहीं है ॥ १ ॥ सभी श्रुतियाँ, स्मृतियाँ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय भस्म तथा त्रिपुण्ड्र-धारण का माहात्म्य त्रिपुण्ड‍धारणमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुनिश्रेष्ठ ! भस्म धारण करने से महापातकों के समूह तथा अन्य पातक भी नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सच-सच कह रहा हूँ; इसमें सन्देह नहीं है… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय भस्म न धारण करने पर दोष भस्मधारणमाहाम्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे देवर्षे ! अब रहस्य तथा विधान के साथ भस्म लगाने से प्राप्त होने वाले समस्त फल के विषय में सुनिये। यह भस्मोद्धूलन सभी कामनाओं को सफल… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय भस्म के प्रकार त्रिविधभस्ममाहात्म्यवर्णनम् नारदजी बोले — हे देव ! यह भस्म तीन प्रकार का कैसे कहा गया है ? यह मुझे आप बताइये, क्योंकि इस विषय में मुझे बहुत कौतूहल हो रहा है ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय भस्म-धारण की विधि भस्ममाहात्म्ये पाशुपतव्रतवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! अग्नि से तैयार किया गया ‘गौण’ भस्म भी अज्ञान का नाश करने वाला तथा ज्ञान का साधन है । इस गौण… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय भस्म-धारण ( शिरोव्रत ) सशिरोव्रतं त्रिपुण्डधारणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — जो द्विजातिगण शिरोव्रत (मस्तक पर भस्म धारण करने के नियम ) — का पालन करते हैं, उन्हीं को अज्ञान को नष्ट करने वाली पराविद्या के विषय में बताना… Read More