श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय सावर्णि मनु के पूर्वजन्म की कथा के प्रसंग में मधु-कैटभ की उत्पत्ति और भगवान् विष्णु द्वारा उनके वध का वर्णन देवीमाहात्म्ये मधुकैटभवधवर्णनम् राजा बोले — कालज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ ! आपने जिन देवी का वर्णन किया… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय वैवस्वत मनु का भगवती की कृपा से मन्वन्तराधिप होना, सावर्णि मनु के पूर्वजन्म की कथा सुरथनृपतिवृमत्तवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] राजा वैवस्वत सातवें मनु कहे गये हैं । समस्त राजाओं में मान्य तथा दिव्य आनन्द… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय चाक्षुष मनु की कथा, उनके द्वारा देवी की आराधना का वर्णन चाक्षुषमनुवृत्तवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] अब आप जगदम्बा का अद्भुत तथा उत्तम माहात्म्य और अंग के पुत्र मनु ने जिस तरह से श्रेष्ठ राज्य… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय स्वारोचिष, उत्तम, तामस और रैवत नामक मनुओं का वर्णन मनूत्पत्तिवर्णनम् शौनकजी बोले — [ हे सूतजी ! ] यह तो आपने आदिमन्वन्तर का उत्तम उपाख्यान कहा, अब दिव्य तेज वाले अन्य मनुओं की उत्पत्ति का वर्णन कीजिये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय अगस्त्यजी की कृपा से सूर्य का मार्ग खुलना विन्ध्यवृद्ध्यवरोधवर्णनम् सूतजी बोले — [ हे मुनियो !] देवताओं का यह वचन सुनकर द्विजश्रेष्ठ अगस्त्यमुनि ने उनसे कहा — मैं आप लोगों का यह कार्य करूँगा ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय भगवान् विष्णु का देवताओं को काशी में अगस्त्यजी के पास भेजना, देवताओं की अगस्त्यजी से प्रार्थना श्रीविष्णुना देवेभ्यो वरप्रदानम् सूतजी बोले — [ हे ऋषियो !] लक्ष्मीकान्त श्रीविष्णु के वचन से सभी देवता सन्तुष्ट हो गये ।… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय देवताओं का वैकुण्ठलोक में जाकर भगवान् विष्णु की स्तुति करना श्रीविष्णुना देवेभ्यो वरप्रदानम् सूतजी बोले — वैकुण्ठ में जाकर उन देवताओं ने कमलपत्र के समान नेत्रों वाले, देवदेवेश्वर, रमाकान्त, जगद्गुरु भगवान् विष्णु को लक्ष्मीजी के साथ विराजमान… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथ अध्याय देवताओं का भगवान् शंकर से विन्ध्यपर्वत की वृद्धि रोकने की प्रार्थना करना और शिवजी का उन्हें भगवान् विष्णु के पास भेजना रुद्रप्रार्थनम् सूतजी बोले — [ हे मुनियो!] तत्पश्चात् इन्द्र आदि सभी प्रधान देवगण ब्रह्माजी को आगे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय विन्ध्यपर्वत का आकाश तक बढ़कर सूर्य के मार्ग को अवरुद्ध कर लेना देवीमाहात्म्ये विन्ध्योपाख्यानवर्णनम् सूतजी बोले — हे ऋषियो ! इस प्रकार विन्ध्यगिरि से वार्तालाप करके परम स्वतन्त्र तथा स्वेच्छापूर्वक विचरण करने वाले महामुनि देवर्षि नारद ब्रह्मलोक… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय देवी द्वारा मनु को वरदान, नारदजी का विन्ध्यपर्वत से सुमेरुपर्वत की श्रेष्ठता कहना विन्ध्योपाख्यानवर्णनम् श्रीदेवी बोलीं —  हे भूमिपाल ! हे महाबाहो ! हे मनुजाधिप ! यह सब पूर्ण होगा। तुमने जो-जो माँगा है, वह मैं तुम्हें… Read More