श्रीललिता-महा-लक्ष्म्याः स्तोत्रम् वैष्णव-सम्प्रदाय के प्रसिद्ध ग्रन्थ “लक्ष्मी-नारायण-संहिता” से उद्धृत निम्न स्तोत्र शक्ति-साधना से सम्बन्धित है । वैष्णव ग्रन्थ होने के कारण इनकी साधना-प्रणाली ‘वैष्णवाचार’-परक है ।… Read More


माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र १॰ यह साधना अर्द्ध-रात्रि में, पश्चिम-दिशा की ओर मुख कर, कुशासन के ऊपर रक्त-कम्बल तथा उसके ऊपर पीत रेशमी वस्त्र बिछाकर, उस पर बैठकर करनी चाहिए । पहले आचमन-पूर्वक आसन-शुद्धि-मन्त्र द्वारा आसन शुद्ध करे ।… Read More


श्रीलक्ष्मी-नारायण-वज्र-पञ्जर-कवच ।।पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच।। अधुना देवि ! वक्ष्यामि, लक्ष्मी-नारायणस्य ते । कवचं मन्त्र-गर्भं च, वज्र-पञ्जरकाख्यया ।।१ श्रीवज्र-पञ्जरं नाम, कवचं परमाद्भुतम । रहस्यं सर्व-देवानां, साधकानां विशेषतः ।।२ यं धृत्वा भगवान् देवः, प्रसीदति परः पुमान् । यस्य धारण-मात्रेण, ब्रह्मा लोक-पितामहः ।।३ ईश्वरोऽहं शिवो भीमो, वासवोऽपि दिवस्पतिः । सूर्यस्तेजो-निधिर्देवि ! चन्द्रमास्तारकेश्वरः ।।४ वायुश्च बलवांल्लोके, वरुणो यादसांपतिः । कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो,… Read More


॥ श्रीलक्ष्मीस्तव ॥ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ १॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ २॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ३॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ४॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि । योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ५॥ स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे… Read More


सिद्ध-लक्ष्मी-स्तोत्र विनियोग- ॐ अस्य श्रीसिद्ध-लक्ष्मी-स्तोत्र-मन्त्रस्य हिरण्य-गर्भः ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहा-काली-महा-लक्ष्मी-महा-सरस्वती देवताः, श्रीं बीजं, ह्रीं शक्तीः, क्लीं कीलकं, मम सर्व-क्लेश-पीडा-परिहार्थं सर्व-दुःख-दारिद्रय-नाशनार्थं सर्व-कार्य-सिद्धयर्थं च श्रीसिद्ध-लक्ष्मी-स्तोत्र-पाठे विनियोगः।… Read More


आशु-फल-प्रद सिद्ध शाबर महा-लक्ष्मी मन्त्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीधन-प्रद-महा-लक्ष्मी-सिद्ध-शाबर-मन्त्रस्य श्रीविष्णु ऋषिः। अनुष्टुप छन्दः। श्रीमहा-लक्ष्मी देवता। श्रीं बीजं। ह्रीं शक्तिः। क्लीं कीलकं। मम सकल-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।… Read More


।। अथ घण्टाकर्ण कल्प ।। प्रस्तुत प्रयोग जैन साधक की संवत १६६१ की पाण्डुलिपि में से उद्धृत् है । प्रयोग शुभ मास, शुक्ल पक्ष तथा ५-१०-१५ तिथि सोम, बुध व गुरुवार में करें । रवि-पुष्य, हस्त व मूल नक्षत्र में हो या अन्य कोई “अमृत-सिद्धि-योग” बने तब प्रयोग करें । प्रयोग देवस्थान, नदी, तालाब के… Read More


महालक्ष्मी के सिद्ध मंत्र हमने यहां भगवती लक्ष्मी की उपासना के लिए विभिन्न सिद्ध मंत्र दिए हैं। इनमें से आपको जो भी उचित लगें उसका पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और आस्था के साथ नियमित जाप करें। इससे महालक्ष्मी निश्चित ही आप पर प्रसन्न होकर इच्छित फल प्रदान करेंगी।… Read More


सर्व-कामना-सिद्धि स्तोत्र श्री हिरण्य-मयी हस्ति-वाहिनी, सम्पत्ति-शक्ति-दायिनी। मोक्ष-मुक्ति-प्रदायिनी, सद्-बुद्धि-शक्ति-दात्रिणी।।१ सन्तति-सम्वृद्धि-दायिनी, शुभ-शिष्य-वृन्द-प्रदायिनी। नव-रत्ना नारायणी, भगवती भद्र-कारिणी।।२ धर्म-न्याय-नीतिदा, विद्या-कला-कौशल्यदा। प्रेम-भक्ति-वर-सेवा-प्रदा, राज-द्वार-यश-विजयदा।।३ धन-द्रव्य-अन्न-वस्त्रदा, प्रकृति पद्मा कीर्तिदा।… Read More


सर्वैश्वर्यप्रद लक्ष्मी कवच श्रीमधुसूदन उवाच गृहाण कवचं शक्र सर्वदुःखविनाशनम्। परमैश्वर्यजनकं सर्वशत्रुविमर्दनम्।। ब्रह्मणे च पुरा दत्तं संसारे च जलप्लुते। यद् धृत्वा जगतां श्रेष्ठः सर्वैश्वर्ययुतो विधिः।। बभूवुर्मनवः सर्वे सर्वैश्वर्ययुतो यतः। सर्वैश्वर्यप्रदस्यास्य कवचस्य ऋषिर्विधि।। पङ्क्तिश्छन्दश्च सा देवी स्वयं पद्मालया सुर। सिद्धैश्वर्यजपेष्वेव विनियोगः प्रकीर्तित।। यद् धृत्वा कवचं लोकः सर्वत्र विजयी भवेत्।। ।।मूल कवच पाठ।।… Read More