श्री कामाख्या-मन्त्र-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीकामाख्या-मन्त्रस्य वह्निक ऋषिः, जगती छन्दः, कामाख्या देवता, प्रणवः शक्तिः अव्यक्तं कीलकं, अमुक-कर्मणि जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- वह्नि-ऋषये नमः शिरसि, जगती-छन्दसे नमः मुखे, कामाख्या-देवतायै नमः हृदये, प्रणव (ॐ) शक्तये नमः पादयोः, अव्यक्तं कीलकाय नमः नाभौ, अमुक-कर्मणि जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।… Read More


श्री कार्तवीर्यार्जुन दर्पण-प्रयोग घर से भागे हुए व्यक्ति के बारे में यदि पता न चल रहा हो, तब उसकी स्थिति व परिस्थिति जानने के लिए यह प्रयोग किया जा सकता है । वैसे तो इस प्रयोग के द्वारा चोरी गई वस्तुओं तथा उनके चोरों का भी ज्ञान पाया जा सकता है, परन्तु क्योंकि प्रयोग मँहगा… Read More


श्री कार्तवीर्यार्जुन मन्त्र-प्रयोग आज के धन-प्रधान युग में यदि किसी का परिश्रम से कमाया हुआ धन किसी जगह फँस जाए तथा उसकी पुनः प्राप्ति की सम्भावना भी दिखाई न पड़े, तो श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग अचूक तथा सद्यः फल-दायी होता है । श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग ‘तन्त्र’-शास्त्र की दृष्टि से बड़े गुप्त बताए जाते हैं । इस… Read More


क्लीं-बीज का अनुभूत प्रयोग एक फुट व्यास के गोल सफेद कागज पर पेंसिल से कागज के मध्य में लगभग चार अंगुल ऊँचा “क्लीं” बीजाक्षर लिखें । कागज के खाली भाग में कामनानुसार रङ्ग भरें । जैसे ‘लक्ष्मी-प्राप्ति’ के लिए पीला, ‘आकर्षण’ के लिए लाल, सभी तरह की ‘बीमारी’ के लिए ‘हरा रङ्ग’ । प्रातः-काल, प्रतिदिन,… Read More


सौभाग्य-प्राप्ति, वर-वधू-प्राप्ति प्रयोग १॰ प्रातः-काल चम्पा के फूलों से हवन करने से वेश्याओं का वशीकरण होता है । २॰ सायं-काल जल के साथ घिसे हुए चन्दन के साथ नव-मालिका (वासन्ती, नेवारी, सेउती या मोगरा) के फूलों का अथवा पलाश (ढाक, छेवला) के फूलों का त्रि-मधु के साथ हवन करने से, कन्या को उत्तम वर तथा… Read More


सर्व-संकट-हारी-प्रयोग “सर्वा बाधासु घोरासु, घोरासु, वेदनाभ्यर्दितोऽपि। स्मरन् ममैच्चरितं, नरो मुच्यते संकटात्।। ॐ नमः शिवाय।” उपर्युक्त मन्त्र से ‘सप्त-श्लोकी दुर्गा’ का एकादश (११) ‘सम्पुट-पाठ’ करने से सब प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है।… Read More


निरोग-कारी आदित्य-हृदय ‘आदित्य-हृदय’ का प्रयोग करने की विधि यह है की प्रातः-काल नींद खुलते ही शैय्या पर बैठे-बैठे ही भगवान् सूर्य के बारह नामों का पाठ करे। यथा- आदित्यः प्रथमं नाम, द्वितीयं तु दिवाकरः। तृतीयं भास्करः प्रोक्तं, चतुर्थं च प्रभा-करः।। पञ्चममं च सहस्रांशुः, षष्ठं चैव त्रि-लोचनः। सप्तमं हरिदश्वं च, अष्टमं तु अहर्पतिः।। नवमं दिन-करः प्रोक्तं… Read More


बंधी दूकान कैसे खोलें ? कभी-कभी देखने में आता है कि खूब चलती हुई दूकान भी एकदम से ठप्प हो जाती है । जहाँ पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, वहाँ सन्नाटा पसरने लगता है । यदि किसी चलती हुई दुकान को कोई तांत्रिक बाँध दे, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, अतः इससे बचने… Read More


मातृका न्यास इस न्यास के नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें मातृकाओं अर्थात् वर्णों (अक्षरों) की स्थापना शरीर के अंगों में विधि-पूर्वक की जाती है । ‘अ’ से लेकर ‘क्ष’ तक की वर्ण-माला का ही सांकेतिक नाम ‘मातृका’ है । वर्ण या अक्षर ‘शब्द-ब्रह्म’ या ‘वाग्-शक्ति’ के स्वरुप हैं । इनका सूक्ष्म रुप ‘विमर्श-शक्ति’… Read More


सर्वाभीष्टप्रद-प्रयोग ‘कुमारी-पूजन’ का प्रस्तुत प्रयोग अनुभूत सिद्ध प्रयोग है। सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्णता इस ‘प्रयोग’ द्वारा सम्भव है। १॰ पहले संकल्प करे। यथा- ॐ तत् सत्। अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय प्रहरार्धे, श्री श्वेत-वाराह-कल्पे, जम्बु-द्वीपे, भरत-खण्डे, अमुक-प्रदेशान्तर्गते, अमुक पुण्य-क्षेत्रे, कलियुगे, कलि-प्रथम-चरणे, अमुक-नाम-सम्वत्सरे, अमुक-मासे, अमुक-पक्षे, अमुक-तिथौ, अमुक-वासरे, अमुक-गोत्रोत्पन्नो, अमुक-नाम-शर्माऽहं (वर्माऽहं, दासोऽहं वा), सर्वापत् शान्ति-पूर्वक ममाभीष्ट-सिद्धये, गणेश-वटुकादि-सहितां… Read More