श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -108 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -108 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ आठवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण का गुरु उपमन्यु के आश्रम में जाना और उनसे पाशुपतज्ञान प्राप्त करना तथा पाशुपतव्रत का माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टोत्तरशततमोऽध्यायः पाशुपातव्रत माहात्म्य वर्णनं ऋषिगण बोले —अक्लिष्ट कर्म वाले वासुदेव श्रीकृष्ण ने धौम्य के ज्येष्ठ भ्राता [ उपमन्यु ] -का दर्शन किया था और… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -107 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -107 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ सातवाँ अध्याय शिवभक्त उपमन्यु की कथा तथा उमामहेश्वर द्वारा उस पर अनुग्रह करना श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्ताधिकशततमोऽध्याय उपमन्युचरितं ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! पूर्वकाल में उपमन्यु ने महेश्वर से गणाधिप पद प्राप्त करके पुनः क्षीरसागर को कैसे प्राप्त किया; आप इस समय बताने की कृपा कीजिये… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -106 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -106 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ छठा अध्याय दारुकासुर के विनाश के लिये भगवान् शिव द्वारा अपने शरीर से काली तथा अष्टभैरवों को प्रकट करना एवं शिवताण्डव नृत्य की कथा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षडधिकशततमोऽध्यायः शिवताण्डवकथनं ऋषिगण बोले — [ हे सूतजी!] हम लोगों ने स्कन्द के अग्रज का प्रादुर्भाव तो सुन लिया; अब… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -105 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -105 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ पाँचवाँ अध्याय विघ्ननाशक श्रीगणेशजी के प्राकट्य की कथा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चाधिकशततमोऽध्यायः विनायकोत्पत्ति सूतजी बोले — [ हे ऋषियो ! ] शिवजी को प्रणाम करके जब सुरेश्वर लोग [ यथास्थान] स्थित हो गये, तब अम्बिकापति, पिनाकधारी, भव महेश्वर ने उन श्रेष्ठ देवताओं को क्षणभर में दिव्य दृष्टि… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -104 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -104 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ चारवाँ अध्याय गजानन का प्राकट्य कराने के लिये देवताओं द्वारा भगवान् शिव की स्तुति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुरधिकशततमोऽध्यायः देवस्तुति ऋषिगण बोले — [ हे सूतजी !] गणों के स्वामी गजानन विनायक कैसे उत्पन्न हुए; उनका प्रभाव कैसा है ? इसे आप बताने की कृपा कीजिये ॥ १… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -103 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -103 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ तीनवाँ अध्याय भगवान् शिव एवं पार्वती के विवाह की मांगलिक कथा तथा विवाह के अनन्तर भगवान् शिव का काशी- आगमन और पार्वती को मुक्तिक्षेत्र काशी की महिमा बताना श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्र्यधिकशततमोऽध्यायः पार्वतीविवाहवर्णनं सूतजी बोले — [ हे ऋषियो!] इसके बाद ब्रह्मा ने हाथ जोड़कर महादेव महेश्वर… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -102 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -102 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ दोवाँ अध्याय पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो भगवान् शिव का ब्राह्मणवेष में आकर उन्हें वरदान देना, हिमालय द्वारा पार्वती स्वयंवर की घोषणा, स्वयंवर में भगवान् शिव का बालरूप में उपस्थित होकर सभी को मोहित करना, पुनः ब्रह्मा की स्तुति से प्रसन्न हो महेश्वर का मनोहर… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -101 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -101 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ एक सौ एकवाँ अध्याय सती का हिमवान् की पुत्री पार्वती के रूप में प्राकट्य, शिव की प्राप्ति के लिये उनका कठोर तप, तारकासुर द्वारा देवताओं को पराजित करना, शिव द्वारा कामदेव का दहन तथा पुनः जीवित करना श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकाधिकशततमोऽध्यायः मदनदाह ऋषिगण बोले — कल्याणमयी अम्बा सती हिमवान्… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -100 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -100 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सौवाँ अध्याय वीरभद्र द्वारा दक्षयज्ञभंग तथा भगवान् महेश्वर का दक्ष प्रजापति पर अनुग्रह श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे शततमोऽध्यायः शिवकृद्दक्षयज्ञविध्वंसन ऋषिगण बोले — [ हे सूतजी !] परमेश्वर भगवान् महेश्वर ने दधीच के कहने से विष्णुसहित सबको जीतकर पुनः यज्ञ का सेवन कैसे किया ? ॥ १ ॥ सूतजी बोले —… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -099 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -099 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ निन्यानबेवाँ अध्याय भगवान् शिव के वामभाग से शिवा का प्रादुर्भाव तथा शिवा का दक्षपुत्री सती के रूप में पुनः मेना की कन्या पार्वती के रूप में प्राकट्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे नवनवतितमोऽध्यायः देवीसम्भव ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! हे महामते ! आपने देवी की उत्पत्ति के विषय में बताया;… Read More