July 13, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 277 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय तुर्वसु आदि राजाओं के वंश का तथा अङ्गवंश का वर्णन राजवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! तुर्वसु के पुत्र वर्ग और वर्ग के पुत्र गोभानु हुए। गोभानु से त्रैशानि, त्रैशानि से करंधम और करंधम से मरुत्त का जन्म हुआ। उनके पुत्र दुष्यन्त हुए। दुष्यन्त से वरूथ और वरूथ से गाण्डीर की उत्पत्ति हुई। गाण्डीर से गान्धार हुए। गान्धार के पाँच पुत्र हुए, जिनके नाम पर गन्धार, केरल, चोल, पाण्ड्य और कोल — इन पाँच देशों की प्रसिद्धि हुई। ये सभी महान् बलवान् थे। दुह्यु से बभ्रुसेतु और बभ्रुसेतु से पुरोवसु का जन्म हुआ। उनसे गान्धार नामक पुत्रों की उत्पत्ति हुई। गान्धारों ने धर्म को जन्म दिया और धर्म से घृत उत्पन्न हुए। घृत से विदुष और विदुष से प्रचेता हुए। प्रचेता के सौ पुत्र हुए, जिनमें अनडु, सुभानु, चाक्षुष और परमेषु — ये प्रधान थे। सुभानु से कालानल और कालानल से सृञ्जय उत्पन्न हुए। सृञ्जय के पुरञ्जय और पुरञ्जय के पुत्र जनमेजय थे। जनमेजय के पुत्र महाशाल और उनके पुत्र महामना हुए। ब्रह्मन् । महामना से उशीनर का जन्म हुआ और महामना की ‘नृगा’ नाम वाली पत्नी के गर्भ से राजा नृग का जन्म हुआ। नृग की ‘नरा’ नामक पत्नी से नर की उत्पत्ति हुई और कृमि नाम वाली स्त्री के गर्भ से कृमि का जन्म हुआ। इसी प्रकार नृग के दशा नाम की पत्नी से सुव्रत और दृषद्वती से शिवि उत्पन्न हुए।’ शिवि के चार पुत्र हुए — पृथुदर्भ, वीरक, कैकेय और भद्रक — इन चारों के नाम से श्रेष्ठ जनपदों की प्रसिद्धि हुई। उशीनर के पुत्र तितिक्षु हुए, तितिक्षु से रुषद्रथ, रुषद्रथ से पैल और पैल से सुतपा नामक पुत्रों की उत्पत्ति हुई। सुतपा से महायोगी बलि का जन्म हुआ। बलि से अङ्ग, बङ्ग, मुख्यक, पुण्ड्र और कलिङ्ग नामक पुत्र उत्पन्न हुए। ये सभी ‘बालेय’ कहलाये। बलि योगी और बलवान् थे। अङ्ग से दधिवाहन, दधिवाहन से राजा दिविरथ और दिविरथ से धर्मरथ उत्पन्न हुए। धर्मरथ के पुत्र का नाम चित्ररथ हुआ। चित्ररथ के सत्यरथ और उनके पुत्र लोमपाद हुए। लोमपाद का पुत्र चतुरङ्ग और चतुरङ्ग का पुत्र पृथुलाक्ष हुआ। पृथुलाक्ष से चम्प, चम्प से हर्यङ्ग और हर्यङ्ग से भद्ररथ हुआ। भद्ररथ के पुत्र का नाम बृहत्कर्मा था। बृहत्कर्मा से बृहद्भानु, बृहद्भानु से बृहात्यवान्, उनसे जयद्रथ और जयद्रथ से बृहद्रथ की उत्पत्ति हुई। बृहद्रथ से विश्वजित् और विश्वजित् का पुत्र कर्ण हुआ। कर्ण का वृषसेन और वृषसेन का पुत्र पृथुसेन था। ये अङ्गवंश में उत्पन्न राजा बतलाये गये। अब मुझसे पूरुवंश का वर्णन सुनो ॥ १-१७ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘राजवंश का वर्णन’ नामक दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २७७ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe