शत्रु-संहारक शाबर मन्त्र 02
मन्त्रः-
“तुमसे अरज करूँ, ऐ हो मात कालिका !
मोहि जो सतावे, सुख पावे न आठों याम ।
वाको तुम भक्ष लेओ, मेरी मात कालिका ! तुमसे अरज करूँ … ।।
हाड़ तो हविष लेओ, खाल को खविष लेओ,
गले पहिनो मात, आँतन की जालिका । तुमसे अरज करूँ … ।।
क्रोध करी धाओ, शीघ्र धाओ मात ।
मेरे शत्रु ……… (अमुक) को गिराओ मात !
वाके रुधिर से नहाओ, टीका लगाओ रक्त-लाली का । तुमसे अरज करूँ … ।।
देख के स्वरूप तेरा, योगिनी प्रसन्न होय ।
लागे वांके घाव, पाके वाँके पाँव ।
वाको अङ्गहू पिराय, वाको बालक मर जाय ।
मेरा दुःख न सहो अब मात कालिका ! तुमसे अरज करूँ … ।।

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विधि – रात्रि को दीपक जलाकर कम-से-कम १०८ पाठ नित्य करे । अथवा कालिका – मन्दिर में २१ दिनो तक ११ माला प्रतिदिन जपें ।

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