December 14, 2025 | aspundir | Leave a comment ॥ संतानगणपतिस्तोत्रम् ॥ पुत्र की प्राप्ति के लिये नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च । सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च ॥ गुरूदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते । गोप्याय गोपिताशेषभुवनाय चिदात्मने ॥ विश्वमूलाय भव्याय विश्वसृष्टिकराय ते । नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुण्डिने ॥ एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः । प्रपन्नजनपालाय प्रणतार्तिविनाशिने ॥ शरणं भव देवेश संततिं सुदृढां कुरु । भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ॥ ते सर्वे तव पूजार्थे निरताः स्युर्वरो मतः । पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम् ॥ ॥ इति संतानगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ सिद्धि-बुद्धि सहित उन गणनाथ को नमस्कार है, जो पुत्रवृद्धि प्रदान करने वाले तथा सब कुछ देने वाले देवता हैं। जो भारी पेटवाले (लम्बोदर), गुरु (ज्ञानदाता), गोप्ता (रक्षक), गुह्य (गूढ़स्वरूप) तथा सब ओर से गौर हैं; जिनका स्वरूप और तत्त्व गोपनीय है तथा जो समस्त भुवनों के रक्षक हैं, उन चिदात्मा आप गणपति को नमस्कार है। जो विश्व के मूल कारण, कल्याणस्वरूप, संसार की सृष्टि करने वाले, सत्यरूप, सत्यपूर्ण तथा शुण्डधारी हैं, उन आप गणेश्वर को बारम्बार नमस्कार है। जिनके एक दाँत और सुन्दर मुख है; जो शरणागत भक्तजनों के रक्षक तथा प्रणतजनों की पीड़ा का नाश करने वाले हैं, उन शुद्धस्वरूप आप गणपति को बारम्बार नमस्कार है। देवेश्वर! आप मेरे लिये शरणदाता हों। मेरी संतानपरम्परा को सुदृढ़ करें। गणनायक ! मेरे कुल में जो पुत्र हों, वे सब आपकी पूजा के लिये सदा तत्पर हों – यह वर प्राप्त करना मुझे इष्ट है। यह पुत्रप्रदायक स्तोत्र समस्त सिद्धियों को देने वाला है। ॥ इस प्रकार ‘संतानगणपतिस्तोत्र’ पूरा हुआ ॥ Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe