॥ ब्रह्माणं प्रति योगनिद्रयोपदिष्टं श्रीकृष्ण कवचम् ॥ हस्तं दत्त्वा शिशोर्गात्रे पपाठ कवचं द्विजः । वदामि तत्ते विप्रेन्द्र कवचं सर्वलक्षणम् ॥ यद्दत्तं मायया पूर्वं ब्रह्मणे नाभिपङ्कजे । निद्रिते जगतींनाथे जले च जलशायिनि । भीताय स्तुतिकर्त्रे च मधुकैटभयोर्भयात् ॥… Read More


॥ मालावती कृतं महापुरुष स्तोत्रम् ॥ ॥ मालावत्युवाच ॥ वन्दे तं परमात्मानं सर्वकारणकारणम् । विना येन शवाः सर्वे प्राणिनो जगतीतले ॥ निर्लिप्तं साक्षिरूपं च सर्वेषां सर्वकर्मसु । विद्यमानं न दृष्टं च सर्वैः सर्वत्र सर्वदा ॥… Read More


॥ गर्गसंहितान्तर्गतं श्रीकृष्णसहस्रनामम् ॥ ॥ गर्ग उवाच ॥ अथोग्रसेनो नृपतिः पुत्रस्याशां विसृज्य च । व्यासं पप्रच्छ सन्देहं ज्ञात्वा विश्वं मनोमयम् ॥ १॥ ॥ उग्रसेन उवाच ॥ ब्रह्मन् केन प्रकारेण हित्वा च जगतः सुखम् । भजेत् कृष्णं परंब्रह्म तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ॥ २॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 30 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसवाँ अध्याय दक्षयज्ञ में सती का योगाग्नि से अपने शरीर को भस्म कर देना, भृगु द्वारा यज्ञकुण्ड से ऋभुओं को प्रकट करना, ऋभुओं और शंकर के गणों का युद्ध, भयभीत गणों का पलायित होना नारदजी बोले — हे विधे ! जब… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 29 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनतीसवाँ अध्याय यज्ञशाला में शिव का भाग न देखकर तथा दक्ष द्वारा शिव-निन्दा सुनकर क्रुद्ध हो सती का दक्ष तथा देवताओं को फटकारना और प्राणत्याग का निश्चय ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] दक्षकन्या सती उस स्थान पर गयीं, जहाँ देवता, असुर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 28 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठाईसवाँ अध्याय दक्षयज्ञ का समाचार पाकर एवं शिव की आज्ञा प्राप्तकर देवी सती का शिवगणों के साथ पिता के यज्ञमण्डप के लिये प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! जब देवता तथा ऋषिगण बड़े उत्साह के साथ दक्ष के यज्ञ में… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय दक्षप्रजापति द्वारा महान् यज्ञ का प्रारम्भ, यज्ञ में दक्ष द्वारा शिव के न बुलाये जाने पर दधीचि द्वारा दक्ष की भर्त्सना करना, दक्ष के द्वारा शिव-निन्दा करने पर दधीचि का वहाँ से प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — हे मुने !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय सती के उपाख्यान में शिव के साथ दक्ष का विरोध वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! पूर्वकाल में प्रयाग में एकत्रित हुए समस्त मुनियों तथा महात्माओं का विधि-विधान से एक बहुत बड़ा यज्ञ हुआ ॥ १ ॥ उस… Read More


॥ अथर्ववेदीया श्रीकृष्णोपनिषत् ॥ श्रीकृष्ण परिकररूप में देवी देवताओं का अवतरण, श्रीकृष्ण से उनकी एकरूपता “हरिः ॐ श्रीमहाविष्णुं सच्चिदानन्दलक्षणं रामचन्द्रं दृष्ट्वा सर्वाङ्गसुन्दर मुनयो वनवासिनो विस्मिता बभूवः । तं होचुर्नोऽवद्यमवतारान्वै गण्यन्ते आलिङ्गामो भवन्तमिति । भवान्तरे कृष्णावतारे यूयं गोपिका भूत्वा मामालिङ्गथ अन्ये येऽवतारास्ते हि गोपा नः स्त्रीश्च नो करु । अन्योऽन्यविग्रहं धार्यं तवाङ्गस्पर्शनादिह । शश्वत्स्पर्शयितास्माकं गृह्णीमोऽवतारान्वयम् ॥… Read More