त्रैलोक्यविजयं श्रीकृष्ण कवचम् ॥ अथ त्रैलोक्यविजयं श्रीकृष्ण कवचम् ॥ ॥ नारद उवाच ॥ भगवञ्छ्रोतुमिच्छामि किं मन्त्रं भगवान्हरः । कृपया-ऽदात् परशुरामाय स्तोत्रं च वर्म च ॥ १॥ कोवाऽस्य मन्त्रस्याराध्यः किं फलं कवचस्य च । स्तवनस्य फलं किं वा तद्भवान्वक्तुमर्हसि ॥ २॥… Read More
कृष्णप्रेमामृतं स्तवं अथवा श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ कृष्णप्रेमामृतं स्तवं अथवा श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ ॥ शेष उवाच ॥ वसुन्धरै वरारोहे जनानामस्ति मुक्तिदम् ॥ १॥ सर्वमङ्गल मूर्द्धन्यमणिमाद्यष्टसिद्धिदम् । महापातककोटिघ्न सर्वतीर्थफलप्रदम् ॥ २॥ समस्त जप यज्ञानां फलदं पापनाशनम् । शृणु देवि प्रवक्ष्यामि नाम्नामष्टोतरं शतम् ॥ ३॥… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 25 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय श्रीशिव के द्वारा गोलोकधाम में श्रीविष्णु का गोपेश के पद पर अभिषेक, श्रीराम द्वारा सती के मन का सन्देह दूर करना, शिव द्वारा सती का मानसिक रूप से परित्याग राम बोले — देवि ! प्राचीन काल में एक समय… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 24 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय दण्डकारण्य में शिव को राम के प्रति मस्तक झुकाते देख सती का मोह तथा शिव की आज्ञा से उनके द्वारा राम की परीक्षा नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे प्रजानाथ ! हे महाप्राज्ञ ! हे… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 23 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय सती के पूछने पर शिव द्वारा भक्ति की महिमा तथा नवधा भक्ति का निरूपण ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! इस प्रकार शंकरजी के साथ विहार करके वे सती काम से सन्तुष्ट हो गयीं और उनके मन में वैराग्य… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 22 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय सती और शिव का विहार-वर्णन ब्रह्माजी बोले — किसी समय वर्षाऋतु में जब श्रीमहादेवजी कैलासपर्वत के शिखर पर विराजमान थे, उस समय सती शिवजी से कहने लगीं — ॥ १ ॥ सती बोलीं — हे देवदेव ! हे महादेव… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 21 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 21 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्कीसवाँ अध्याय कैलास पर्वत पर भगवान् शिव एवं सती की मधुर लीलाएँ नारदजी बोले — हे तात ! हे अनघ ! आप सर्वज्ञ की बात ठीक है । आपके द्वारा मैंने शिवा-शिव के अत्यन्त अद्भुत एवं कल्याणकारी चरित्र को सुना ॥… Read More
वर्णमातृका प्रश्न चक्र ॥ अथ वर्णमातृका प्रश्न ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसरस्वत्यै नमः॥ मंत्रः श्रीसर्वनामाय सत्यं वदाय स्वाहा ॥… Read More
पाशुपतास्त्र प्रयोगः ॥ पाशुपतास्त्र प्रयोगः ॥ भगवान शिव का पशुपति प्रयोग ग्रह बाधा, क्षुद्र रोग, पशुता (जड़ता) का नाश करने वाला प्रज्ञा एवं बुद्धि प्रदाता तथा पालनकर्ता एवं प्रबल संहारक मंत्र है । अति आवश्यकता में ही शत्रुसंहार हेतु प्रयोग किया जाता है । मन्त्रोद्धार – तारो (ॐ) वान्तो (श) धरा (ल) संस्थो, वामनेत्रन्दु भूषितः (ईकार विन्दु)… Read More
अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः ॥ अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः ॥ सामान्य क्रम में अश्वशान्ति, गजशांति, महामारी, राजकीय उपद्रव, प्रेत, शत्रुबाधा असामयिक गर्भपात शान्ति हेतु इस मन्त्र का प्रयोग किया जा सकता है । इसके साथ में शिवपूजा, ईशानदि देवों का पूजन करना चाहिये । शारदा तिलक व अग्निपुराण में इनका विधान है । ॥ अघोरास्त्र मंत्र ॥ “ह्रीं स्फुर स्फुर… Read More