शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव से विवाह के लिये प्रार्थना करना तथा उनकी इसके लिये स्वीकति ब्रह्माजी बोले — भगवान् विष्णु आदि देवताओं द्वारा की गयी स्तुति को सुनकर सबकी उत्पत्ति करनेवाले भगवान् शंकर बड़े प्रसन्न हुए और जोर… Read More


॥ वीरभद्र मंत्र प्रयोगः ॥ शत्रुनाश हेतु विशेष प्रयोग विधि भैरव प्रपंचसार तंत्र व आकाशभैरव कल्पादि तंत्रो में देखें। विनियोग:- अस्य श्री वीरभद्र मंत्रस्य ब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छंदः, वीरभद्रोदेवता सर्वशत्रुक्षयार्थे जपे विनियोगः । मंत्र: – (३२ अक्षरात्मक) “ॐ वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोपं सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा ।” षडङ्गन्यासः – ॐ वीरभद्राय हृदयाय नमः । अतिक्रूराय शिरसे… Read More


॥ श्रीसुब्रह्मण्य (कार्तिकेय)-साधना ॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीसुब्रह्मण्यमंत्रस्य श्रीअग्निः ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्रीसुब्रह्मण्य देवता, ॐ बीजं वं शक्तिः, श्रीसुब्रह्मण्यदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः – श्रीअग्निऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । श्रीसुब्रह्मण्यदेवतायै नमः हृदि । ॐ बीजाय नमःगुह्ये । वं शक्तये नमः नाभौ । श्रीसुब्रह्मण्यदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।… Read More


॥ श्रीमहाशास्त्रनुग्रहकवचम् स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ भगवन् देवदेवेश सर्वज्ञ त्रिपुरान्तक । प्राप्ते कलियुगे घोरे महाभूतैः समावृते ॥ १ ॥ महाव्याधिमहाव्याळघोरराजैः समावृते । दुःस्वर्प्नशोकसन्तापैः दुर्विनीतैः समावृते ॥ २ ॥ स्वधर्मविरते मार्गे प्रवृत्ते हृदि सर्वदा । तेषां सिद्धिञ्च मुक्तिञ्चत्वं मे ब्रूहिवृषद्वज ॥ ३ ॥… Read More


॥ महाशास्ता (हरिहरपुत्र) मंत्र प्रयोगः ॥ जिस तरह वास्तुपुरुष की उत्पति अंधकदैत्य व शिव के बीच युद्ध समय में दोनों के पसीने की बूंदे भूमि पर गिरी उससे हुई इसी तरह किसी अन्यप्रकरण में यह हरि एवं हर का मानस है पुत्र एवं इसकी गणना विशेष शिवगणों में की जाती है । अय्यप्पा स्वामी मोहिनी… Read More


॥ तुम्बुरू शिव ॥ (शारदा तिलक) एकाक्षर मंत्र: – ( मंत्रोद्धार) क्षकारोमाग्नि पवनवामकर्णार्द्ध चन्द्रवान । क्ष्+म्+र्+यूँ = क्ष्म्र्यूँ विनियोग – अस्य मंत्रस्य काश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः, तुम्बुरू शिव देवता, रं बीजं, ॐ शक्तिं सर्वसमृद्धि हेतुवे जपे विनियोगः । षड़ङ्गन्यासः – षड् दीर्धभाजा बीजेन षड़ङ्गानिप्रकल्पयेत् । अर्थात बीज मंत्र के षड् दीर्घो से न्यास करें यथा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय सती द्वारा नन्दा-व्रत का अनुष्ठान तथा देवताओं द्वारा शिवस्तुति ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! एक समय आपके साथ जाकर मैंने त्रिलोकी की सर्वस्वभूता उन सती को अपने पिताके पास बैठी हुई देखा ॥ १ ॥ पिता के द्वारा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय दक्ष की साठ कन्याओं का विवाह, दक्ष के यहाँ देवी शिवा (सती)-का प्राकट्य, सती की बाललीला का वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे देवमुने ! इसी समय मैं लोकपितामह ब्रह्मा भी इस चरित्र को जानकर प्रीतिपूर्वक शीघ्रता से वहाँ पहुँचा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय ब्रह्मा की आज्ञा से दक्ष द्वारा मैथुनी सृष्टि का आरम्भ, अपने पुत्र हर्यश्वों तथा सबलाश्वों को निवृत्तिमार्ग में भेजने के कारण दक्ष का नारद को शाप देना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाप्राज्ञ !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय दक्षप्रजापति का तपस्या के प्रभाव से शक्ति का दर्शन और उनसे रुद्रमोहन की प्रार्थना करना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे शिवभक्त ! हे प्राज्ञ ! हे निष्पाप ! आपने शिवा तथा शिव के कल्याणकारी चरित्र का भली-भाँति… Read More