पुरुषसूक्त ॥ पुरुषसूक्त ॥ वेदों में प्राप्त सूक्तों में पुरुषसूक्त’ का अत्यन्त महनीय स्थान है । आध्यात्मिक तथा दार्शनिक दृष्टि से इस सूक्त का बड़ा महत्त्व है। इसीलिये यह सूक्त ऋग्वेद (१०वें मण्डल का ९०वाँ सूक्त), यजुर्वेद (३१वाँ अध्याय), अथर्ववेद (१९वें काण्डका छठा सूक्त), तैत्तिरीयसंहिता, शतपथब्राह्मण तथा तैत्तिरीय आरण्यक आदि में किंचित् शब्दान्तर के साथ प्रायः… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २० भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – २० दिव्य, भौम एवं अन्तरिक्षजन्य उत्पात तथा उनकी शान्तिके उपाय सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! अब मैं विविध प्रकार के अपशकुनों, उत्पातों एवं उनके फलों का वर्णन कर रहा हूँ ।… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १८ से १९ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १८ से १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १८ से १९ एकाह-प्रतिष्ठा तथा काली आदि देवियों की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी ने कहा — ब्राह्मणों ! कलियुग में अल्प सामर्थ्यवान् व्यक्ति देवता आदि की प्रतिष्ठा एक दिन में भी कर… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १४ से १७ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १४ से १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १४ से १७ पुष्पवाटिका तथा तुलसी की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! पुष्पवाटिका की प्रतिष्ठा में तीन हाथ की एक वेदी का निर्माण कर उस पर घट की… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १२ से १३ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १२ से १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १२ से १३ मण्डप, महायूप और पौंसले आदि की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — द्विजगणो ! अब मैं यागादि के निमित निर्मित होनेवाले मण्डपकी प्रतिष्ठा-विधि बतलाता हूँ । वह मण्डप… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ९ से ११ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ९ से ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ९ से ११ वट, बिल्व तथा पूगीफल आदि वृक्ष-युक्त उद्यान की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! वट वृक्ष की प्रतिष्ठा में वृक्ष के दक्षिण दिशा में उसकी जड़… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ४ से ८ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ४ से ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ४ से ८ अश्वत्थ, पुष्करिणी तथा जलाशय के प्रतिष्ठा की विधि सूतजी बोले — ब्राह्मणो ! अश्वत्थ-वृक्ष की प्रतिष्ठा करनी हो तो उसकी जड़ के पास दो हाथ लम्बी-चौड़ी एक… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २ से ३ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २ से ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग ) अध्याय – २ से ३ गोचर-भूमि के उत्सर्ग तथा लघु उद्यानों की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं गोचर-भूमि के विषयमें बता रहा हूँ, आप सुनें । गोचर… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय भाग – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १ उद्यान-प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! उद्यान आदि की प्रतिष्ठा में जो कुछ विशेष विधि है, अब उसे बता रहा हूँ, आपलोग सुनें । सर्वप्रथम एक चौकोर मण्डल की… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १९ से २१ प्रतिष्ठा-मुहूर्त एवं जलाशय आदिकी प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! ऋषियों ने देवता आदि की प्रतिष्ठा माघ, फाल्गुन आदि छः मास नियत किये हैं । जब… Read More