अग्निपुराण – अध्याय 266 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छाछठवाँ अध्याय विनायक-स्नान विधि विनायक स्नान कथनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! जो मनुष्य विघ्नराज विनायक द्वारा पीड़ित हैं, उनके लिये सर्व-मनोरथ साधक स्नान की विधि का वर्णन करता हूँ। कर्म में विघ्न और उसकी सिद्धि के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 265 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पैंसठवाँ अध्याय दिक्पाल स्नान की विधि का वर्णन दिक्पालादिस्नानम् पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! अब मैं सम्पूर्ण अर्थों को सिद्ध करने वाले शान्तिकारक स्नान का वर्णन करता हूँ, सुनो। बुद्धिमान् पुरुष नदी तट पर भगवान् श्रीविष्णु एवं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 264 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौंसठवाँ अध्याय देवपूजा तथा वैश्वदेव-बलि आदि का वर्णन देवपूजावैश्व देव बलिः पुष्कर कहते हैं — परशु राम ! अब मैं देवपूजा आदि कर्म का वर्णन करूँगा, जो उत्पातों को शान्त करने वाला है। मनुष्य स्नान करके ‘आपो हि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 263 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिरसठवाँ अध्याय नाना प्रकार के उत्पात और उनकी शान्ति के उपाय उत्पातशान्तिः पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! प्रत्येक वेद के ‘श्रीसूक्त’ को जानना चाहिये। वह लक्ष्मी की वृद्धि करने वाला है। ‘हिरण्यवर्णा हरिर्णी’ इत्यादि पंद्रह ऋचाएँ ऋग्वेदीय… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 262 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बासठवाँ अध्याय अथर्वविधान – अथर्ववेदोक्त मन्त्रों का विभिन्न कर्मों में विनियोग अथर्वव विधानम् पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! ‘सामविधान’ कहा गया। अब मैं ‘अथर्व विधान का वर्णन करूँगा। शान्तातीयगण के उद्देश्य से हवन कर के मानव शान्ति… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 261 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इकसठवाँ अध्याय सामविधान – सामवेदोक्त मन्त्रों का भिन्न-भिन्न कार्यों के लिये प्रयोग सामविधानं पुष्कर कहते हैं — परशुराम। मैंने तुम्हें ‘यजुर्विधान’ कह सुनाया, अब मैं ‘सामविधान’ कहूँगा। ‘वैष्णवी-संहिता’ का जप करके उसका दशांश होम करे। इस से मनुष्य… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 260 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ साठवाँ अध्याय यजुर्विधान-यजुर्वेद के विभिन्न मन्त्रों का विभिन्न कार्यों के लिये प्रयोग यजुर्विधानं पुष्कर कहते हैं — परशुराम! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले  ‘यजुर्विधान’ का वर्णन करता हूँ, सुनो। ॐकार-संयुक्त महाव्याहृतियाँ समस्त पापों का विनाश… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 259 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनसठवाँ अध्याय ऋग्विधान-विविध कामनाओं की सिद्धि के लिये प्रयुक्त होने वाले ऋग्वेदीय मन्त्रों का निर्देश ऋग्विधानं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं महर्षि पुष्कर के द्वारा परशुरामजी के प्रति वर्णित ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का विधान… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 258 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अट्ठावनवाँ अध्याय व्यवहार के वाक्पारुष्य, दण्डपारुष्य, साहस, विक्रियासम्प्रदान, सम्भूय-समुत्थान, स्तेय, स्त्री-संग्रहण तथा प्रकीर्णक- इन विवादास्पद विषयों पर विचार वाक्‌पारुष्यादिप्रकरणं वाक्पारुष्य [अब ‘वाक्पारुष्य’ (कठोर गाली देने आदि) के विषय में विचार किया जाता है। इसका लक्षण नारदजी ने इस… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 257 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तावनवाँ अध्याय सीमा-विवाद, स्वामिपाल विवाद, अस्वामिविक्रय, दत्ताप्रदानिक, क्रीतानुशय, अभ्युपेत्याशुश्रूषा, संविद्व्यतिक्रम, वेतनादान तथा द्यूतसमाह्वय का विचार सीमाविवादादिनिर्णयः सीमा-विवाद अग्निदेव कहते हैं — दो गाँवों से सम्बन्ध रखने वाले खेत की सीमा के विषय में विवाद उपस्थित होने पर तथा… Read More