॥ श्रीराधा अष्टादशशतीनाम स्तोत्र ॥ राधा ने वृन्दा से कहा कि तुम मेरे जन्म एवं समागम के बारे में कुछ नहीं जानती और न ही तुम मेरे नाम प्रभाव को जानती हो । वृन्दा ने जब उनके नाम प्रभाव को जानना चाहा तो राधा ने अपने १८०० नाम बताये । श्रीराधा के ये १८०० नाम… Read More


॥ अथ भुवनेश्वरीकृत राधास्तुतिः॥ राधा ने भुवनेश्वरी को स्मरण कर वृन्दावन को गोलोकमय बनाने को कहा तब भुवनेश्वरी ने राधा की महिमा वर्णन करते हुए प्रशंसापूर्वक कहा कि राधा आप त्रिभुवन की स्वयं लक्ष्मी हो । उसका यथा वर्णन — ॥ ब्राह्मणी उवाच ॥ ततः किमभवत् पश्चाद् देवगन्धर्व कथ्यताम् । पुनीहि मे श्रुतिपुटौ नानादोषकुलाकुलौ ॥… Read More


॥ त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ राधा ने त्रिपुर सुन्दरी की उपासना की कि हे मां मेरी सहायता करो तथा त्रिपुरसुन्दरी ने अपनी वशिन्यादि दूतियों को सहायता करने को कहा तब वशिन्यादि ने राधा की प्रशंसा व स्तुति की । यथा — जय जय राधे कृतनतराधे जगदभिवन्द्ये सुरवरवन्द्ये । धृतबहुरूपे स्मरमखरूपे सरसिजवक्त्रे सुमदिरनेत्रे ॥ जय… Read More


॥ अथ श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ मुनीन्द्र-वृन्द-वन्दिते त्रिलोक-शोकहारिणि, प्रसन्न-वक्त्र-पङ्कजे निकुञ्ज-भूविलासिनि । व्रजेन्द्र-भानुनन्दनि व्रजेन्द्र सूनुसङ्गते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ १ ॥ अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते, प्रवाल-बाल)-पल्लव-प्रभारुणाङ्घ्रिकोमले । वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ २ ॥… Read More


॥ अथ श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ इस कवच स्तोत्र में राधा को दशमहाविद्या प्रधान त्रिपुरसुन्दरी की दूती बताया गया है, अत: महाविद्या यह महाविद्या नहीं होकर तन्त्रानुसार उपमहाविद्या है । ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ देवदेव महादेव सृष्टिस्थित्यन्तकारक । राधिकाकवचं देव कथयस्व दयानिधे ॥ १ ॥ ॥ ईश्वरोवाच ॥… Read More


॥ सर्वरक्षाकर श्रीराधाकवचम् ॥ इस कवच को हल्दी, गोरोचन, केसर, हरिचन्दन से भोजपत्र पर लिखकर (श्लोक ९ – २१) धारण करने से अभीष्ट सिद्धि होती है । ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ कैलासवासिन् भगवन् भक्तानुग्रह-कारक । राधिका-कवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १ ॥ यद्यस्ति करुणा-नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् । त्वमेव शरणं नाथ शूल-पाणे पिनाक-धृक् ॥… Read More


॥ अथ श्रीराधा भक्तिज्ञान कवचम् ॥ कवच की महिमा तथा राधा अष्टाक्षर व नवाक्षर मंत्र का फल बताते हुए कहा कि ब्रह्मा, धर्मराज, नरनारायण, कामदेव, अग्नि, वायु, शेष कूर्मादि ने अपना अपना यथेष्ट सिद्ध किया । महर्षि दधीचि ने कवच तथा राधा मन्त्र — “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं रां राधिकायै स्वाहा ।” के प्रभाव… Read More


॥ श्रीराधाकवचस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ ॐ देवदेव महादेव परमप्रीतिदायक । राधायाः कवचं देव कथय प्राणवल्लभ ॥ १ ॥ ॥ श्रीमहादेवौवाच ॥ साधु साधु महादेवि भद्रं भद्रं सुमङ्गलम् । प्रेमभावान्वितायाश्च राधायाः कवचं परम् ॥ २ ॥ श्यामप्रेमविलासन्या गोपिन्या प्रेमसागरे । मग्नायाः कवचं देवि कथयामि शृणुष्व तत् ॥ ३ ॥ ऋषिर्नारायणः प्रोक्तो गायत्री छन्द इत्यपि ।… Read More


॥ राधाकृष्ण उपासनायां विविध न्यासाः ॥ राधाकृष्ण की उपासना में दुर्गा व दशमहाविद्याओं की तरह प्रणव, मातृका,नक्षत्रादि न्यास करने चाहिये । केशव एवं श्रीकण्ठादि न्यास तथा निम्न न्यास दैनिक पूजन समय अपने शरीर में करे अथवा पर्वादि के दिन करे । मूर्ति प्रतिष्ठा में भी ये न्यास देवमूर्ति में करने चाहिये । ॥ प्रणव न्यास… Read More


॥ सरस्वतीस्तोत्रं अथवा वाणीस्तवनं याज्ञ्यवल्क्योक्त ॥ ॥ नारायण उवाच ॥ वाग्देवतायाः स्तवनं श्रूयतां सर्वकामदम् । महामुनिर्याज्ञवल्क्यो येन तुष्टाव तां पुरा ॥ १ ॥ गुरुशापाच्च स मुनिर्हतविद्यो बभूव ह । तदाऽऽजगाम दुःखार्तो रविस्थानं च पुण्यदम् ॥ २ ॥ सम्प्राप्य तपसा सूर्यं कोणार्के दृष्टिगोचरे । तुष्टाव सूर्य्यं शोकेन रुरोद स पुनः पुनः ॥ ३ ॥ सूर्य्यस्तं पाठयामास… Read More