भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४५ January 13, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४५ नक्षत्रार्चन-विधि (रोगावलि-चक्र) भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! एक बार कौशिक मुनि अग्निहोत्र करने के बाद सुखपूर्वक बैठे हुए थे । उसी समय महर्षि गर्ग ने उनसे पूछा — ‘ब्रह्मन् ! बंदीगृह में निरुद्ध हो… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४४ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४४ विनायक-शान्ति महाराज युधिष्ठिर ने कहा — देवेश ! विभो ! अब आप विनायक-शान्ति की विधि मुझे बताये, जिसके करने से सभी मानव समस्त आपत्तियों से मुक्त हो जाते हैं । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — राजेन्द्र !… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४३ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४३ महाशान्ति-विधान भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! अब मैं भगवान् शंकर द्वारा कही गयी महाशान्ति का विधान बतलाता हूँ, यह राजाओं के लिये कल्याणकारी है तथा भयंकर विघ्नों को दूर करनेवाली है । इस महाशान्ति… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४२ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४२ कोटिहोम का विधान भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! प्राचीन काल में प्रतिष्ठान (पैठण) नामक नगर में संवरण नाम के एक महान् भाग्यशाली राजा थे । ये सभी शास्त्रों में निपुण, ब्रह्मतत्त्व के ज्ञाता, पितृभक्त… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४१ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४१ शान्तिक एवं पौष्टिक कर्मों तथा नवग्रह-शान्ति की विधि का वर्णन… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४० January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४० दीपमालिकोत्सव भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! पूर्वकाल में भगवान् विष्णु ने वामनरूप धारणकर दानवराज बलि को छलकर इन्द्र को राज्य का भार सौंप दिया और राजा बलि को पाताल लोक में स्थापित कर दिया… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३९ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३९ इन्द्रध्वजोत्सव के प्रसंग में उपरिचर वसुका वृत्तान्त भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! पूर्वकाल में देवासुर-संग्राम के समय ब्रह्मा आदि देवताओं ने ‘इन्द्र को जय प्राप्त हो’, इसलिये ध्वज-यष्टि का निर्माण किया । ध्वजयष्टि को… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३८ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३८ महानवमी ( विजयादशमी ) व्रत भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! महानवमी सब तिथियों में श्रेष्ठ है । सभी प्रकार के मंगल और भगवती की प्रसन्नता के लिये सब लोगों को और विशेषकर राजाओं को… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३७ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३७ श्रावणपूर्णिमा को रक्षाबन्धन की विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! प्राचीन काल में देवासुर-संग्राम में देवताओं द्वारा दानव पराजित हो गये । दुःखी होकर वे दैत्यराज बलि के साथ गुरु शुक्राचार्यजी के पास गये और… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३३ से १३६ January 12, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३३ से १३६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३३ से १३६ दमनकोत्सव, दोलोत्सव तथा रथयात्रोत्सव आदि का वर्णन राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! इस संसार में बहुत से सुगन्धित पुष्प हैं, परंतु उनको छोड़कर दमनक (दौना) नामक पुष्प देवताओं को क्यों… Read More