वशीकरण मन्त्रः- “ॐ नमो फूल सुगन्धा । फूल ही बाँधूँ सात समुद्रा । अहो फूल झटियारा, चौंसठ जोगिनी खरा प्यारा । ए फूल ए दिन पाऊँ, सूती सुवासिनी सेज बुलाऊँ । मुआ मड़ा मसान जगाऊँ, हाक करी उचाट लाऊँ । गलिहट मेरे पगे लगाऊँ । देखूँ गोरा भैरव ! तेरी शक्ति । मेरी भक्ति, गुरू… Read More


भक्त अल्लूदासजी (कविया) भक्तकवि अल्लूदास कविया-शाखा के चारण थे । इनका जन्म वि. स. १५६० में हेमराज कविया के घर मारवाड के सिणली ग्राम में हुआ था । अल्लूदास की परमात्म-भक्ति और काव्य से प्रभावित होकर आमेर-नरेश पृथ्वीराज कछवाह के पुत्र रूपसिंह ने इन्हें कुचामन के समीप जसराणा नामक ग्राम प्रदान किया था । इसके… Read More


स्वामी श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी (सलेमाबाद) श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी स. 1754 से 1797 तक निम्बार्क सम्प्रदाय के अखिल भारतीय पीठ सलेमाबाद के पीठाधीश थे । वे भी सलेमाबाद के पूर्व पीठाधीशों के समान बड़े प्रतापी थे । परम रसिक तो वे थे ही । ‘मनिमंजरी’ सखी के रूप में प्रिया प्रियतम की मानसिक सेवा मे निरन्तर… Read More


विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आठ-भुजी अम्बिका, एक नाम ओङ्कार । खट्-दर्शन त्रिभुवन में, पाँच पण्डवा सात दीप । चार खूँट नौ खण्ड में, चन्दा-सूरज दो प्रमाण । हाथ जोड़ बिनती करूँ, मम करो कल्याण ।।”… Read More


व्यापार-वर्धन मन्त्रः- “भँवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा । उठै जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर, सोखे नहिं जाय ।।”… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी विपरीत चालन मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरू का, एक ठौ सरसों सोला राई, मोरो पठ-वल कोरो जाई । खाय-खाय पड़ै मार, जे करै ते मरै । उलट विद्या ताही पर पड़ै । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा । फुरौ भर, ईश्वरी वाचा । दुहाई माता अञ्जनी की ।।”… Read More


।। श्री क्रम के कुलगुरु ।। श्रीकुल साधकों के कुल गुरु इस प्रकार है- दिव्यौघगुरु – १. परप्रकाशानंदनाथ २. परशिवानंदनाथ ३. पराशक्त्यम्ब ४. कौलेश्वरानंदनाथ ५. शुक्लदेव्यम्ब ६. कुलेश्वरानंदनाथ ७. कामेश्वर्यम्बा ।… Read More


।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More


विविध कीलन मन्त्रः- “भय कीलूँ, भैसासुर कीलूँ । कीलूँ अपनी काया । जागता मसान कीलूँ, जिसकी बैठूँ छाया । बलिहारी मुहम्मदा बीर की, कीलूँ पवन बावरी, मन चाहे जहाँ डोलूँ, दुष्ट की मुष्ट कीलूँ । मेरे कीले न कीलै, तो अपनी माँ के सङ्ग हराम करे, दुहाई मुहम्मदा वीर की ।।”… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना मन्त्रः- “बाद करत बादी चले, नौ सौ ढाल मढाय । जाते मारै बादिया औ करै बदिनियाँ राँड़ ।। पाँच बरस का बालक मारे, गर्भै करै अहार । देव को बाँध, देवी को बाँध, भूत को बाँध, चुड़ैल को बाँध ।। किए-कराए को बाँध, गली-घाट को बाँध । कब्जे मे कर… Read More