|| श्री नाथस्तोत्र राजः || नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयेऽन्वहम्। नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयऽन्वहम् ॥1॥ अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः। अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः ॥ 2 ॥ रक्षा मा दक्ष गोरक्ष ! क्षरमोक्षद माऽक्षर। जयकाम महाराज, जराहा मम कायज ॥ 3 ॥ घनसारद नाथाय, यथा नाद रसा नघ। ते स्तुमो नरधामारे, हेमाधार ! नमोऽस्तुते ॥… Read More


|| गोरक्ष गायत्री || ॐ गुरुजी! सत् नम: आदेश ! गुरूजी को आदेश। ओऽमकारो शिव रुपी, मध्याह्ने हंसरुपी सन्ध्याया साधु रुपी, परमहंस दो अक्षर, गुरू तो गोरख काया तो गायत्री ॐ ब्रह्म, सोहम् शक्ति, शून्य माला अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म वेद, असंख्य शाखा, हरमुख प्रवर, निरंजन गौत्र, त्रिकुटी क्षैत्र, जुगति जोत, जल… Read More


श्री गोरक्षनाथ स्तवन कैलाशाचल चारु श्रंग रचिता वेदी यदी यासनं, शान्तं शंख शशांक कुन्दकुमुस स्फितश्रियालिंगितम् । बालार्करुणतीर्णकोण किरण ज्योतिर्जटा मण्डितं, तज्जयोतिर्मयमैश्वर वपुरिदं गोरक्ष ! ते धीमहि ।। आत्म-खलु विश्व-मूलम् ॐ कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । गोरक्ष-बालं गुरु-शिष्य-पालं शेष-हिमालं शशि-खण्ड-भालम् ।। कालस्य-कालं जित-जन्म-जालं वन्दे जटालं जगदाब्जनालम् । गोरक्षनाथ ! भवरुप भवाब्धि पोत, भक्तार्ति-नाशन विभो करुणैकमूर्ते । त्वपाद–पद्म–मकरन्द–मधुव्रतोऽहं, तापं… Read More


नक्षत्र चरण व उनका विस्तार चरणाक्षर आदि  क्र. सं. चरण विस्तार नवमांश चरणाक्षर स्वामी क्र. नक्षत्र विस्तार स्वामी देवता 1 प्रथम 0°.00′ से 3°.20′ मेष चू मंगल 1 अश्विनी 0°.00′ से 13°.20′ केतु अश्विनी कुमार 2 द्वितीय 3°.20’से 6°.40′ वृष चे शुक्र “ “ “ “ 3 तृतीय 6°.40’से 10°.00′ मिथुन चो बुध “ “… Read More


आनन्द आदि योगों का ज्ञान एवं फल देखने की विधि इस प्रकार है – रविवार को यदि अश्विनी नक्षत्र है तो “आनन्द योग” इसी प्रकार भरणी नक्षत्र है तो “काल दण्ड योग” होगा – तदनुसार शेष वार व नक्षत्र के योग और उनके फल जाने जा सकते हैं । विशेष- इन योगों के निर्धारण हेतु अभिजित… Read More


तिथि वार व नक्षत्र के योग   क्र॰सं॰ योग रवि सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि विशेष 1. सिद्धी योग जया  भद्रा पूर्णा नन्दा रिक्ता सब दोषों का नाश करता है  तिथि (३, ८, १३) (2, ६, १२) (५, १०, १५) (१, ६, ११) (४, ९, १४) 2 मृत्यु योग (अधम योग) नन्दा तिथि भद्रा… Read More


गर्भ-स्तम्भन मन्त्रः- “शुद्ध बुद्ध को ठकुरा बाँधो, गर्भ रहे जी ठहर पाके फूटे बीज गिरे । श्री रामचन्द्र जी, हत्या तोहे परे । ईश्वर तेरी साख, गौरा गाँडा बाँध के नौ महीना राख । ताला झिन्ना न झरै, पट-पट बीधे ताल । लोहू जामुन दे गए, ब्रह्मा और मुरार । ऊँचे चढ़े न नीचे धँसे,… Read More


रोगों की झाड़नी मन्त्रः- “खेरे पै की आमली, अगल-बगल की डार । ऊपर मोती गा गहे, तर भैंसा रखवार । वा भैंसा न जानिए, पालै तेली कलार । नौ गगरा मद के पिए, नौ सौ बकरा खाय । सांझी बाबा को चीर-फार, शिव बाबा की जटा उखार । छत्तीस रोग हांक के न आवे, तो… Read More


हनुमान शाबर मन्त्रः- “निज ध्यान धूप, शिव वीर हनुमान, जटा – जूट अवधूत, जङ्ग जञ्जीर, लँगोट गाढ़ो । भूत को वश, परीत को वश, गदा तेल सिन्दूर चढ़े । आप देखे, तो सत्य की नाव नारसिंह खेवे । दुष्ट को लात बजरङ्ग देवे । भक्त की कड़ी आठ लाख अस्सी हजार वश कर । रावण… Read More


आत्म-रक्षा-मन्त्र मन्त्रः- “चन्दा बाँधों, सूरज बाँधों । बाँधों गङ्गा माई । तेंतीस कोटि के देवता बाँधों । हनुमत की राम दुहाई । मरघट का मसान बाँधों । मन चाहे लड्‌डू खाऊँ । पूजा करूँ गणेश की । मन चाहे जहाँ चला जाऊँ । श्री हनुमान जी की राम दुहाई ।।”… Read More