पूजा में आरती का महत्त्व September 11, 2015 | aspundir | Leave a comment पूजा में आरती का महत्त्व ‘आरती’ पूजन के अन्त में देवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है । ‘स्कन्द-पुराण’ में लिखा है – “मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं, यत्-कृतं पूजनं हरेः । सर्व सम्पूर्णतामेति, कृते नीराजने शिवे ।।” अर्थात् मन्त्र-हीन और क्रिया-हीन होने पर भी नीराजन (आरती) कर लेने से उसमें सम्पूर्ण पूर्णता आ जाती है ।… Read More
अद्भुत व चमत्कारी गोमती चक्र September 11, 2015 | aspundir | Leave a comment अद्भुत व चमत्कारी गोमती चक्र होली पर अथवा ग्रहण काल में साधक को चाहिए कि गोमती चक्र अपने सामने रखे लें और उस पर निम्न मन्त्र की 11 माला फेरें :- मन्त्रः- “ॐ वं आरोग्यानिकरी रोगानशेषा नमः” इस प्रकार जब 11 मालाएँ सम्पन्न हो जायें तब साधक को वह गोमती चक्र सावधानी-पूर्वक अपने पास रखना… Read More
धन-दायक तांत्रिक सामग्री – गोमती चक्र September 11, 2015 | aspundir | 3 Comments धन-दायक तांत्रिक सामग्री – गोमती चक्र १॰ सात गोमती चक्रों को शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें । २॰ यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल… Read More
ग्रह बाधा के पूर्व संकेत September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment ग्रह बाधा के पूर्व संकेत ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं । जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है । जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ… Read More
भगवान् श्री राम की दिन-चर्या September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवान् श्री राम की दिन-चर्या “आनन्द-रामायण” के राज्य-काण्ड के १९ वेँ सर्ग में ‘भगवान् श्रीराम’ की दिन-चर्या का वर्णन है । इस वर्णन से सदाचारों का महत्त्व भली-भाँति स्पष्ट होता है । महर्षि वाल्मीकि अपने शिष्यों को बताते हैं – “भगवान् श्रीराम नित्य प्रातः-काल चार घड़ी रात्रि शेष रहते मङ्गल-गीत आदि को श्रवण कर जागते… Read More
कामना अनुसार देवता उपासना September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment कामना अनुसार देवता उपासना श्रीमद्-भागवत (२/३/२-१०) में विभिन्न कामनाओं के उद्देश्य से विभिन्न देवताओं की उपासना का उल्लेख मिलता है – ब्रह्मवर्चसकामस्तु यजेत ब्रह्मणस्पतिम् । इन्द्रमिन्द्रियकामस्तु प्रजाकामः प्रजापतीन् ।। देवीं मायां तु श्रीकामस्तेजस्कामो विणावसुम् । वसुकामो वसून् रुद्रान् वीर्यकामोऽथ वीर्यवान् ।। अन्नाद्यकामस्त्वदितिं स्वर्गकामोऽदितेः सुतान् । विश्वान् देवान राज्यकामः साध्यान् संसाधको विशाम् ।। आयुष्कामोऽश्विनौ देवौ पुष्टिकाम… Read More
विविध फल-दायिनी श्रीचित्रसेन-साधना September 10, 2015 | aspundir | 1 Comment विविध फल-दायिनी श्रीचित्रसेन-साधना मन्त्रः- “क्लीं राजन् गन्धर्व-गगनाश्रय-चित्रसेन ! कन्यां प्रयच्छ मे स्वाहा ।” विनियोगः- ॐ अस्य श्रीचित्रसेन-मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः । विराट् छन्दः । गन्धर्व-प्रवर-श्रीचित्रसेन देवता । अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More
दुःस्वप्न-नाशक प्रयोग September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment दुःस्वप्न-नाशक प्रयोग १॰ विष्णुं नारायणं कृष्णं, रामं च श्रीहरिं शिवम् । श्रियं लक्ष्मीं राधिकां जानकीं प्रभां च पार्वतीम् ।। जपन् द्वादश दुःस्वप्नः, सत्-फलदः प्रजायते ।।… Read More
मेधा सूक्त September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment ॥ मेधा सूक्त ॥ यजुर्वेद के ३२वें अध्याय में मेधा-प्राप्ति के कुछ मन्त्र पठित हैं, जो मेधा-परक होने से ‘मेधा-सूक्त’ कहलाते हैं । ‘मेधा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है – धारणा शक्ति (Judgeent Power), प्रज्ञा (WisefulL, Intellect), बुद्धि आदि । मेधा-शक्ति-सम्पन्न व्यक्ति ही ‘मेधावी’ (Intelligent, Brilliant) कहलाता है । ‘मेधा’ बुद्धि की एक शक्ति-विशेष है… Read More
लक्ष्मी – नाम मन्त्र द्वारा हवन September 10, 2015 | aspundir | Leave a comment ‘श्रीलक्ष्मी’- नाम मन्त्र द्वारा हवन – पूर्व-मुख होकर आसन पर बैठे और अपने पास गन्ध, पुष्प, अक्षत, समानान्यार्घ्य-जल, कुश, काष्ठ आदि पूजन सामग्री रखें । – कुश से काष्ठ आदि सकल सामग्री का मार्जन करें । – भूमि को गो-मय और जल से लीपे । – तीन बार ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज का… Read More