श्रीबालरक्षा September 2, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीबालरक्षा श्रीगणेशाय नमः । श्रीकृष्णाय नमः । अव्यादजोङघ्रिंमणिमांस्तव जान्वथोरू यज्ञोऽच्युतः कटितटं जठरं हयास्यः । ह्रत्केशवस्त्वदुर ईश इनस्तु कंठं विष्णुर्भुजं मुखमुरुक्रम ईश्वरः कम् ॥ १ ॥ चक्रयग्रतः सहगदो हरिरस्तु पश्चात्त्वत्पार्श्वयोर्धनुरसौ मधुहाजनश्च । कोणेषु शंख उरुगाय उपर्युपेन्द्रस्तार्क्ष्यः क्षितौ हलधरः पुरुषः समंतात् ॥ २ ॥… Read More
श्रीलक्ष्मीस्तव September 2, 2015 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीलक्ष्मीस्तव ॥ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ १॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ २॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ३॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ४॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि । योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ५॥ स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे… Read More
कलश एवं जयन्ती का माहात्म्य September 2, 2015 | aspundir | Leave a comment कलश एवं जयन्ती का माहात्म्य माँ दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ ‘कलश’-स्थापना से होता है। स्थापना हेतु ‘कलश’ स्वर्ण, चाँदी, पीतल, ताम्र अथवा मिट्टी का होना चाहिए। ‘कलश’ देखने में सुडौल और पवित्र होने चाहिए। मिट्टी के ऐसे ‘कलश’ प्रयोग में नहीं लाने चाहिए, जिनमें छिद्र होने की सम्भावना हो।विशेष अनुष्ठान करना हो, तो धातु… Read More
सिद्ध तांत्रिक टोटके September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment सिद्ध तांत्रिक टोटके १॰ हाथी की लीद को चाँदी के ताबीज में भरकर छोटे बच्चे के गले में पहना दें, तो उस बच्चे को बुरी नजर का दोष नही लगता। २॰ रविवार या मंगलवार के दिन अश्विनी नक्षत्र में घोड़े के नाखून को आग में जलाकर उसका धुआँ भूत-प्रेत बाधा ग्रसित रोगी को देने से… Read More
तरिगोंडा वेंगमाम्बा September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment तरिगोंडा वेंगमाम्बा भक्त जब कवि बनता है या कवि में जब भक्ति का उदय होता है, तब काव्य का सृजन ही नहीं होता, बल्कि काव्य के माध्यम से भक्ति का भी विकास होता है । भक्त-कवियों की कृतियाँ एवं उनके व्यक्तित्व ही इसके साक्ष्य हैं । आन्ध्र की मीरा समझी जाने वाली तरिगोंडा वेंगमाम्बा इसी… Read More
कार्तवीर्यार्जुन दर्पण-प्रयोग September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री कार्तवीर्यार्जुन दर्पण-प्रयोग घर से भागे हुए व्यक्ति के बारे में यदि पता न चल रहा हो, तब उसकी स्थिति व परिस्थिति जानने के लिए यह प्रयोग किया जा सकता है । वैसे तो इस प्रयोग के द्वारा चोरी गई वस्तुओं तथा उनके चोरों का भी ज्ञान पाया जा सकता है, परन्तु क्योंकि प्रयोग मँहगा… Read More
सर्व-सौख्यकारं दत्तात्रेय-स्तोत्रम् September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment सर्व-सौख्यकारं दत्तात्रेय-स्तोत्रम् यस्य नाम श्रुतेः सद्यो मृत्युर्दूरात्पलायते । दुःखवार्ता विलीयेत दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥१॥ शोको नंदाय कल्पेत दैन्यं दारिद्रयहेतये । रोगःस्वंगाप्तये सम्यग् दिगंबर नमोऽस्तुते ॥२॥ परयंत्रादिकं किञ्चित् प्रभवेन्नैव सूरिषु ।… Read More
कार्तवीर्यार्जुन मन्त्र-प्रयोग September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री कार्तवीर्यार्जुन मन्त्र-प्रयोग आज के धन-प्रधान युग में यदि किसी का परिश्रम से कमाया हुआ धन किसी जगह फँस जाए तथा उसकी पुनः प्राप्ति की सम्भावना भी दिखाई न पड़े, तो श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग अचूक तथा सद्यः फल-दायी होता है । श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग ‘तन्त्र’-शास्त्र की दृष्टि से बड़े गुप्त बताए जाते हैं । इस… Read More
कृत्तिवास रामायण की रामकथा September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment कृत्तिवास रामायण की रामकथा तुलसीदास जी के आविर्भाव से लगभग एक सौ वर्ष पूर्व बंगदेश (बंगाल) में कृत्तिवास नामक महाकवि का आविर्भाव माना जाता है । उनका जन्म 1433 ई॰ का माना जाता है । श्रीराम ही उनके उपास्यदेव थे । उन्होंने ‘कृत्तिवास रामायण’ की रचना की थी । इसमें सात काण्ड हैं । उन्होंने… Read More
कार्तवीर्यार्जुन द्वादश नामस्तॊत्रम् September 1, 2015 | aspundir | Leave a comment कार्तवीर्यार्जुनॊनाम राजाबाहुसहस्रवान्। तस्यस्मरण मात्रॆण गतम् नष्टम् च लभ्यतॆ॥ कार्तवीर्यह:खलद्वॆशीकृत वीर्यॊसुतॊबली। सहस्र बाहु:शत्रुघ्नॊ रक्तवास धनुर्धर:॥… Read More