इन्द्रकृतं परमेश्वर-श्रीकृष्णस्तोत्रं इन्द्र उवाच अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योतीरुपं सनातनम् । गुणातीतं निराकारं स्वेच्छामयमनन्तकम् ।।१ भक्तध्यानाय सेवायै नानारुपधरं वरम् । शुक्लरक्तपीतश्यामं युगानुक्रमणेन च ।।२ शुक्लतेजःस्वरुपं च सत्ये सत्यस्वरुपिणम् । त्रेतायां कुङ्कुमाकारं ज्वलन्तं ब्रह्मतेजसा ।।३… Read More


दश महा-विद्याओं की उत्पत्ति दक्ष प्रजापति ने अपने द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान् शिव को निमन्त्रित नहीं करने पर जब भगवती ने अपने पिता से कारण पुछने के लिये पितृ-गृह जाने के लिए भगवान् शिव से अनुमति लेनी चाही, तो महादेव ने अनुमति नहीं दी । यह सुनकर क्रोधावेश में सती के अंग कम्पित होने… Read More


वर्ष-गाँठ (जन्म-दिन) कैसे मनाएँ ? (१) आत्म-शोधनः- प्रातःकाल स्नान आदि करके नवीन वस्त्र धारण करे। पूजा-स्थान में अपने सम्मुख पहले से स्थापित ‘पञ्च-पात्र’ के जल में, निम्न मन्त्र से ‘अंकुश-मुद्रा’ द्वारा ‘सूर्य-मण्डल’ से तीर्थों का आवाहन करे- ॐ गंगे च यमुने चैव, गोदावरी सरस्वति ! नर्मदे सिन्धु कावेरि ! जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।। फिर ‘पञ्च-पात्र’ से… Read More


कालीदास और घटकर्पर महाराज विक्रमादित्य के नव-रत्नों के नाम इस प्रकार है – धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वेताल-भट्ट, घटकर्पर, कालिदास, वाराह-मिहिर तथा रुचि । घटकर्पर को विद्वान् बनाने तथा दरबार में स्थान दिलाने में कालिदास का भी हाथ था । इसके विषय में ‘बंगाल एशियाटिक सोसायटी’ के प्रमुख सदस्य तथा अंग्रेज विद्वान् “हेवरलिन” ने एक… Read More


क्लीं-बीज का अनुभूत प्रयोग एक फुट व्यास के गोल सफेद कागज पर पेंसिल से कागज के मध्य में लगभग चार अंगुल ऊँचा “क्लीं” बीजाक्षर लिखें । कागज के खाली भाग में कामनानुसार रङ्ग भरें । जैसे ‘लक्ष्मी-प्राप्ति’ के लिए पीला, ‘आकर्षण’ के लिए लाल, सभी तरह की ‘बीमारी’ के लिए ‘हरा रङ्ग’ । प्रातः-काल, प्रतिदिन,… Read More


।। श्री गर्भ चण्डी ।। (गौड मतेन लघुचण्डी पाठक्रमः) तंत्रसाधना के अनुसार बीजाक्षरों का सम्पुट लोम-विलोम लगता है । ।।गर्भकवचम्।। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः शूलेन पाहिन नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके । घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्या निःस्वनेन च । मः न क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। १ ।। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः प्राच्यां… Read More


गायत्री मन्त्र द्वारा प्राण-वायु का संचार जिस प्रकार नाग के मस्तिष्क में मणि स्थित रहती है, उसी प्रकार मानव-मस्तिष्क के ललाट में भी विभूतियों से ओत-प्रोत मणि स्थित है । यह मणि प्राण-वायु के विशेष सञ्चार के प्रभाव से समस्त विभूतियों की किरणों से जगमगा उठती है । गायत्री मन्त्र के साथ उसके प्रत्येक अक्षर… Read More


सौभाग्य-प्राप्ति, वर-वधू-प्राप्ति प्रयोग १॰ प्रातः-काल चम्पा के फूलों से हवन करने से वेश्याओं का वशीकरण होता है । २॰ सायं-काल जल के साथ घिसे हुए चन्दन के साथ नव-मालिका (वासन्ती, नेवारी, सेउती या मोगरा) के फूलों का अथवा पलाश (ढाक, छेवला) के फूलों का त्रि-मधु के साथ हवन करने से, कन्या को उत्तम वर तथा… Read More


दश-महा-विद्या-स्तोत्रम् नमस्ते चण्डिके ! चण्डि ! चण्ड-मुण्ड-विनाशिनि । नमस्ते कालिके ! काल-महा-भय-विनाशिनी ! ।।१ शिवे ! रक्ष जगद्धात्रि ! प्रसीद हरि-वल्लभे ! प्रणमामि जगद्धात्रीं, जगत्-पालन-कारिणीम् ।।२ जगत्-क्षोभ-करीं विद्यां, जगत्-सृष्टि-विधायिनीम् । करालां विकटा घोरां, मुण्ड-माला-विभूषिताम् ।।३… Read More


ऐसे हुए श्रीराम अजेय भगवन् श्रीराम अपने युग के अजेय योद्धा थे । देव, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर, राक्षस आदि में भी उनके समान योद्धा न था । तीनों लोकों को जीतने वाले रावण पर विजय पाना कोई आसान काम नहीं था । तत्कालीन सभी शक्तियाँ व्यक्तिगत एवं सामूहिक रुप से रावण से परास्त… Read More