श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-45 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय श्रीराम की विजय हेतु ब्रह्माजी तथा देवगणों का देवी की आराधना करना, देवी द्वारा राक्षसों के वध का वरदान देना अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे ब्रह्मणा देवीस्तुतिवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — सुरश्रेष्ठ ब्रह्माजी बिल्ववृक्ष की छाया में भगवती जगदम्बिका का असमय में भी भक्तिपूर्वक पूजन… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-44 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौवालीसवाँ अध्याय श्रीराम द्वारा भगवती की स्तुति, प्रसन्न होकर जगदम्बा द्वारा विजय की आकाशवाणी करना, कुम्भकर्ण का युद्धभूमि में प्रवेश तथा श्रीराम के साथ उसका घोर युद्ध अथः चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीराम कुम्भकर्णयोर्युद्धवर्णनं ॥ श्रीराम कृत कात्यायनी स्तुति ॥ ॥ श्रीराम उवाच ॥ नमस्ते त्रिजगद्वन्द्ये संग्रामे… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-43 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा श्रीराम से देवी की सर्वव्यापकता तथा विभिन्न दिव्य लोकों का वर्णन करना, देवी के लोक तथा उनके स्वरूप का वर्णन, श्रीराम द्वारा जगज्जननी जगदम्बा का पूजन अथः त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे दुर्गालोकवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — महामुने ! ब्रह्माजी के मुख से इस प्रकार… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-42 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बयालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का श्रीराम को कृष्णपक्ष में ही देवी की पूजा करने का आदेश देना तथा स्वयं के चतुर्मुख होने का पूर्वप्रसंग सुनाना, ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा देवी की स्तुति अथः द्विचत्वारिंशत्तमोध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे रामब्रह्मणोर्मन्त्रणावर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — तब भगवान् ब्रह्मा जी ने… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-41 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकतालीसवाँ अध्याय श्रीराम का ब्रह्माजी से विजयप्राप्ति का उपाय पूछना और ब्रह्माजी द्वारा उन्हें जगदम्बा की उपासना करने का परामर्श देना अथः एकचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे ब्रह्मरामचन्द्रयोरर्मन्त्रवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — इस प्रकार युद्ध में पराजित राक्षसों के स्वामी रावण ने युद्ध करने के लिए महाबलि कुम्भकर्ण… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-40 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चालीसवाँ अध्याय समुद्र पर पुल बाँधना और श्रीराम-सेना का लङ्कापुरी में प्रवेश, राम द्वारा पितृरूप से जयप्रदा भगवती की आराधना करना, श्रीराम-रावण-युद्ध का प्रारम्भ, श्रीराम तथा उनकी सेना के द्वारा अनेक राक्षसों का संहार और घायल रावण का रणभूमि से पलायन अथः चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे रावणयुद्धभङ्गवर्णनं… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-39 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनतालीसवाँ अध्याय सीताजी के शोक में श्रीराम का विलाप, सुग्रीव से मैत्री, हनुमान् जी द्वारा समुद्र-लंघन तथा अशोक-वाटिका में श्रीसीताजी का दर्शन, हनुमान् जी की प्रार्थना पर लङ्का में प्रतिष्ठित जगदम्बा द्वारा लङ्का का परित्याग करना, अशोकवाटिका का विध्वंस, लङ्कादहन तथा हनुमान् जी का श्रीरामजी… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-38 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अड़तीसवाँ अध्याय भगवान् श्रीराम की ऐश्वर्य-लीलाएँ, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, जनकपुरी जाकर शिवधनुष को तोड़ना तथा विवाह, श्रीराम का वनवास, भरत द्वारा नन्दिग्राम में मुनिवृत्ति से निवास करना, लक्ष्मण का शूर्पणखा के नाक-कान काटना, रावण द्वारा सीता का हरण अथः अष्टत्रिंशत्तमोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे श्रीजानकीहरणं श्रीमहादेवजी… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-37 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सैंतीसवाँ अध्याय शिवजी द्वारा हनुमान्रूप में प्रकट होने की बात बताना, विष्णु का महाराज दशरथ के घर में राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के रूप में प्रकट होना, लक्ष्मी का सीता के रूप में तथा अन्य देवगणों का ऋक्ष, वानर आदि रूपों में प्रकट होना… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-36 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छत्तीसवाँ अध्याय रामोपाख्यान का प्रारम्भ, देवी कात्यायनी की आराधना से रावण का त्रैलोक्यविजयी होना, ब्रह्माजी की प्रार्थना पर विष्णु का राम के रूप में अवतरित होने का आश्वासन देना तथा जगदम्बा द्वारा रावण के वध का उपाय बताना अथः षट्त्रिंशोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे श्रीभगवतीनारायण संवादवर्णनं नारदजी बोले… Read More