श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-65 August 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-65 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पैंसठवाँ अध्याय भगवान् विष्णु का वामनरूप में अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि का दान लेना, तीन पगों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नापकर बलि को पाताल भेज देना अथः पञ्चषष्टितमोऽध्यायः वामनावतारप्रस्तावे बलिपातालयात्राकथनं श्रीमहादेवजी बोले — विरोचनपुत्र धर्मात्मा दैत्यराज बलि ने देवराज इन्द्र से… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-64 August 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-64 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौंसठवाँ अध्याय भगवान् शंकर के गायन से विष्णु का द्रवीभूत होना, ब्रह्माजी द्वारा उस द्रवरूप गङ्गा को अपने कमण्डलु में धारण करना, भगवती गङ्गा का द्रवमयी हो पृथ्वी पर आना अथः चतुःषष्टितमोऽध्यायः शिवनारदसंवादे गङ्गाया द्रवरूपवर्णनं श्रीनारदजी बोले — परमेश्वर ! आपने कृपापूर्वक महापापनाशक, पुण्यप्रद, धन्य… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-63 August 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-63 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तिरसठवाँ अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और शिव का महाकाली के दर्शन करना, ब्रह्मा और विष्णु द्वारा भगवती महाकाली की स्तुति, भगवती का इन्द्र को दर्शन देना तथा इन्द्र का ब्रह्महत्याजनित पाप से मुक्त होना अथः त्रिषष्टितमोऽध्यायः श्रीभगवतीद्वारगमनाद्देवराजब्रह्म-हत्याहरणोपाख्यानं श्रीमहादेवजी बोले — कुछ समय बाद पुष्प चुनने वाली… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-62 August 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-62 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बासठवाँ अध्याय भगवान् विष्णु का इन्द्र से महाकाली के लोक के विषय में अनभिज्ञता व्यक्त करना; ब्रह्मा, विष्णु और इन्द्र का शिवलोक जाना तथा भगवान् शिव के साथ भगवती महाकाली के लोक में जाना अथः द्विषष्टितमोऽध्याय ब्रह्मादीनां देवराजेन सह भगवतीस्थानगमनं श्रीमहादेवजी बोले — नारदजी !… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-61 August 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-61 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकसठवाँ अध्याय इन्द्र का ब्रह्महत्या के पाप से ग्रस्त होना, महर्षि गौतम की सम्मति से इन्द्र का ब्रह्मलोक जाना तथा इन्द्र और ब्रह्मा का वैकुण्ठलोक जाना अथः एकषष्टितमोऽध्यायः गौतमवाक्याद्ब्रह्ममयीस्थानानुसन्धानार्थं देवराजस्य चतुर्मुखविष्णुलोकगमनं श्रीमहादेवजी बोले — महामते ! युद्ध में दुर्धर्ष वृत्रासुर का संहार करके ऐरावत हाथी… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-60 August 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-60 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ साठवाँ अध्याय वृत्रासुर के वध के लिये देवराज इन्द्र का दधीचि से अस्थियाँ माँगना, दधीचि का प्राण-त्याग, इन्द्र द्वारा दधीचि की अस्थियों से वज्र बनाकर वृत्रासुर का संहार अथः षष्टितमोऽध्यायः दधीचिप्राणत्यागे देवराजस्य ब्रह्महत्यावर्णनं श्रीनारदजी बोले — देवदेव ! महेश्वर ! प्रभो ! जिस तरह से… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-59 August 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-59 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनसठवाँ अध्याय महाकाली के दिव्य लोक का वर्णन अथः एकोनषष्टितमोऽध्यायः श्रीब्रह्ममयीमहाकालीस्थानवर्णनं श्रीनारदजी बोले — देवदेव! जगन्नाथ! कृपामय ! जगत्प्रभो ! मैं पुनः आपसे भगवती का उत्कृष्ट आख्यान सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ कैलासपर्वत पर शिवसांनिध्य में भगवती की जो मूर्तियाँ हैं, उनमें भगवती दुर्गा… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-58 August 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-58 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण, बलराम, पाण्डवों तथा अन्य वृष्णिवंशियों का स्वर्गगमन अथः अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः स्वर्गयात्रागमनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! इस प्रकार छलपूर्वक पृथ्वी का भार मिटाकर श्रीकृष्ण ने पृथ्वीतल से पुनः अपने धाम आने का मन में निश्चय किया ॥ १ ॥ इसी बीच पृथ्वीतल पर… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-57 August 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-57 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्तावनवाँ अध्याय महाभारतयुद्ध का वर्णन अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय महाभारतयुद्धवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तब पृथ्वी के भार का हरण करने के लिये महाकाली कृष्णरूप से अपनी सेना को धृतराष्ट्रपुत्रों की सहायता में नियोजित कर स्वयं पूर्णरूप से सात्यकिसहित पाण्डवों के पास चली आयी । महामते ! अनेक… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-56 August 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-56 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छप्पनवाँ अध्याय पाण्डवों द्वारा भगवती की स्तुति, भगवती द्वारा प्रसन्न होकर विजय का आशीर्वाद देना, पाण्डवों का अज्ञातवास के लिये राजा विराट के नगर में जाना, भीम द्वारा कीचक और उपकीचकों का वध, अभिमन्यु-विवाह अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः कीचकवधोपाख्यानं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! बहुत काल तक… Read More