श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-01 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पहला अध्याय ऋषियों और सूतजी के संवाद के प्रसंग में गणेशजी की महिमा और राजा सोमकान्त के चरित्र का वर्णन अथः प्रथमोऽध्यायः सोमकान्त वर्णनं नमस्तस्मै गणेशाय ब्रह्मविद्याप्रदायिने । यस्यागस्त्यायते नाम विघ्नसागरशोषणे ॥ ब्रह्मविद्या के प्रदाता उन गणेशजी को नमस्कार है, जिनका नाम अगस्त्यमुनि [^1]  की भाँति विघ्नरूपी समुद्र को सुखाने… Read More


श्रीगणेशपुराण – एक परिचय अत्यन्त प्राचीन काल की बात है, सौराष्ट्रदेश के प्रसिद्ध देवनगर में शास्त्र – मर्मज्ञ सोमकान्त नामक धर्मपरायण एक नरेश थे। वे अतिशय सुन्दर, विद्वान्, धनवान्, तेजस्वी एवं पराक्रमी थे। उनकी बुद्धिमती, अनिन्द्य सुन्दरी, धर्मपरायणा सती पत्नी का नाम सुधर्मा था । सुधर्मा के गर्भ से हेमकण्ठ नामक अत्यन्त सुन्दर, शूर, पराक्रमी… Read More


श्रीगणपति-ध्यान- मंजरी गणपति सिन्दूराभं त्रिनेत्रं पृथुतरजठरं हस्तपद्यैर्दधानं दन्तं पाशाङ्कुशेष्टान्युरुकरविलसद्बीजपूराभिरामम्। बालेन्दुद्योतमौलिं करिपतिवदनं दानपूरार्द्रगण्डं भोगीन्द्राबद्धभूषं भजत गणपतिं रक्तवस्त्राङ्गरागम् ॥ जो सिन्दूरकी-सी अंगकान्ति वाले और त्रिनेत्रधारी हैं; जिनका उदर बहुत विशाल है; जो अपने चार करकमलों में दन्त, पाश, अंकुश और वर-मुद्रा धारण करते हैं; जिनके विशाल शुण्ड-दण्ड में बीजपूर (बिजौरा नीबू या अनार) शोभा दे रहा है;… Read More


श्रीगणेश के विविध मन्त्र १ – श्रीमहागणपतिस्वरूप प्रणव- मन्त्र — ‘ॐ’। २- श्रीमहागणपति का प्रणव- सम्पुटित बीज-मन्त्र — ‘ॐ गं ॐ ।’ ३- सबीज गणपति-मन्त्र — ‘ गं गणपतये नमः ।’ ४- प्रणवादि सबीज गणपति-मन्त्र — ‘ॐ गं गणपतये नमः ।’… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-81 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इक्यासीवाँ अध्याय कलियुग के मानवों का स्वभाव तथा भगवान् शंकर की उपासना और शिवनामसंकीर्तन की महिमा अथः एकाशीतितमोऽध्यायः श्रीवेदव्यासजैमिनिसंवादे श्रीमहादेवदेवर्षिनारदप्रश्नोत्तरकथनं श्रीमहादेवजी बोले — वत्स ! भगवान् शंकर की पूजा का माहात्म्य मुझसे भक्तिभाव तथा ध्यानपूर्वक संक्षेप में सुनिये ॥ १ ॥ कलियुग में सभी मानव… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-80 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अस्सीवाँ अध्याय रुद्राक्ष का माहात्म्य तथा उसके धारण का फल अथः अशीतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे रुद्राक्षमाहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं रुद्राक्ष की महिमा तथा उसके परम पवित्र और गोपनीय आख्यान का संक्षेप में वर्णन कर रहा हूँ, आप ध्यान से सुनिये ॥ १ ॥… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-79 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उन्यासीवाँ अध्याय तुलसी, बिल्व और आँवलावृक्षका माहात्म्य अथः ऊनाशीतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे तुलसीमाहात्म्यवर्णने आमलकबिल्वसंयोगकथनं श्रीनारदजी बोले — परमेश्वर ! महान् पातकों का नाश करने वाले योनिपीठतीर्थ का माहात्म्य आपके मुखकमल से मैंने सुना । ईश्वर ! आपने जो सर्वश्रेष्ठ, महापुण्यदायक बिल्वपत्र का माहात्म्य संक्षेप में वहाँ पर… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-78 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठहत्तरवाँ अध्याय कामाख्यादेवी तथा सदाशिव भगवान् शंकर की उपासना का विशेष महत्त्व, बिल्वपत्र तथा बिल्ववृक्ष की महिमा एवं कामाख्यापीठ का माहात्म्य अथः अष्टसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे योनिपीठमाहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — वहाँ [ भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में] जो व्यक्ति वैशाख की तृतीया तिथि को भगवती चण्डिका की… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-77 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सतहत्तरवाँ अध्याय कामरूपतीर्थ में प्रतिष्ठित दस महाविद्याओं का वर्णन तथा कामाख्या कवच अथः सप्तसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीमहाकामाख्याकवचवर्णनं श्रीनारदजी बोले — महेश्वर ! कामरूप महाक्षेत्र में दस महाविद्याओं की अधिष्ठात्री देवी महेश्वरी कौन हैं ? उनके विषय में हमें बताइये ॥ १ ॥ श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-76 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छिहत्तरवाँ अध्याय कामरूपतीर्थ (कामाख्या शक्तिपीठ) के माहात्म्य का वर्णन अथः षट्सप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे कामाख्यामाहात्म्यवर्णनं श्रीनारदजी बोले — प्रभो ! देव ! जगन्नाथ ! आपके मुखकमल से भगवती गङ्गा के अतुलनीय माहात्म्य को सुनकर मैं पवित्र हो गया हूँ, इसमें कोई संदेह नहीं है । पुनः आपसे… Read More