श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-11 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय ब्रह्माजी का व्यासजी को गणेशजी के मन्त्र के अनुष्ठान की विधि बताना अथः एकादशोऽध्यायः मन्त्रकथनं भृगुजी बोले — [हे राजन्!] चतुर्मुख ब्रह्माजी इसके अनन्तर [व्यासजी द्वारा ] किये गये प्रश्न का समाधान करने की इच्छा से बोले — [ हे व्यासजी ! ] मैं गणेशजी के मन्त्रों का… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ दसवाँ अध्याय गणेश पूजन न करने से व्यासजी का विघ्नों से अभिभूत होना और ब्रह्माजी का उन्हें गणेशाराधन का उपदेश देना अथः दशमोऽध्यायः गणेशमङ्गलाभावे व्यासस्य भ्रान्तिः, ब्रह्मदेवसमीपगमनञ्च भृगुजी बोले — [भगवान् ] नारायण के अंश से उत्पन्न, पराशर के पुत्र महामुनि वेदव्यासजी भूत और भविष्य के ज्ञाता तथा वेद एवं… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ नौवाँ अध्याय भृगुमुनि का राजा सोमकान्त को गणेशपुराण के श्रवण का उपदेश देना अथः नवमोऽध्यायः राजोपदेशज्ञानोपदेशकथनं सूतजी बोले — तदनन्तर भृगुमुनि ने क्षणभर ध्यान करके उस [राजा सोमकान्त ] -के पूर्वकर्मजनित दुःख को देखकर अत्यन्त विह्वल होकर उस राजा से कहा — ॥ १ ॥ कहाँ तुम्हारे पापों का समूह… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ आठवाँ अध्याय राजा सोमकान्त द्वारा पूर्वजन्म में किये गये पापों तथा वृद्धावस्था में गणेश मन्दिर के जीर्णोद्धार का वर्णन अथः अष्टमौऽध्यायः भृगोर्हुङ्कारेण नानाशङ्कानां निवारणम् भृगुजी बोले — उस ब्राह्मण (गुणवर्धन) – ने इस प्रकार बार-बार करुणा से युक्त एवं अवसादपूर्ण वचन कहे, परंतु उन्हें सुनकर भी तुम्हारा हृदय नहीं पसीजा… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सातवाँ अध्याय भृगुमुनि के द्वारा राजा सोमकान्त के पूर्वजन्म का वर्णन अथः सप्तमोऽध्यायः सोमकान्त पूर्वजन्म कथनं ऋषियों ने कहा — [हे सूतजी !] तब राजा सोमकान्त ने वहाँ जाकर क्या किया और सर्वज्ञ भृगुमुनि ने उन्हें क्या उपाय बताया ? ॥ १ ॥ हे द्विजश्रेष्ठ ! आप हम श्रोताओं के… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छठा अध्याय राजा सोमकान्त का भृगुमुनि के आश्रम में जाना अथः षष्टोऽध्यायः भृगो आश्रमे सोमकान्तस्य निवासः सूतजी बोले — सुधर्मा के इस प्रकार के वचन सुनकर भृगुपुत्र च्यवन ने त्वरापूर्वक अपना जल से भरा कलश उठाया और परदुःखकातर होने के कारण चुपचाप अपने घर को चले गये। तब भृगु ने… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय सुधर्मा-च्यवन-संवाद अथः पञ्चमोऽध्यायः सुधर्माच्यवन संवाद सूतजी बोले — [ हेमकण्ठ ने] तत्पश्चात्‌ (राजा से विदा लेकर) माता के पास आकर स्नेह से व्याकुल बुद्धि से उससे कहा कि हे माता! मुझ निरपराध का त्याग आप कैसे कर रही हैं?॥ १ ॥ पुत्र ( हेमकण्ठ )-ने कहा —  यह… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौथा अध्याय सोमकान्त का वनगमन अथः चतुर्थोऽध्यायः सोमकान्ततपोवनगमनं सूतजी बोले — राज्याभिषेक सम्पन्न होने पर उन राजा सोमकान्त ने ब्राह्मणों का पूजन किया और उन्हें अंगभूत दक्षिणा के साथ दस सहस्र गौएँ तथा मणि, मोती और मूँगे प्रदान किये। उन्होंने उन सबको हाथी, गौएँ, घोड़े, धन, रेशमी परिधान देकर सन्तुष्ट… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तीसरा अध्याय राजा सोमकान्त का राजकुमार हेमकण्ठ को सदाचार और राजनीति की शिक्षा देना अथः तृतीयोऽध्यायः सोमकान्तस्य पुत्रेभ्य उपदेशः, आचारादि निरूपणम् सूतजी बोले — तत्पश्चात् राजा ने उठकर पुत्र को दाहिने हाथ से पकड़कर राजमहलके अग्रभाग में [स्थित उस कक्ष में] प्रवेश किया, जहाँ वे सर्वदा मन्त्रणा करते थे; जहाँ… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ दूसरा अध्याय गलित कुष्ठ से पीड़ित राजा सोमकान्त का वन में जाने का निश्चय करना अथः द्वितीयोऽध्याय सोमकान्तस्य अङ्गेभ्य गलितकुष्ठरोगस्य उद्भवः, वन गन्तुं च विचारः सूतजी बोले — हे ऋषियो ! आप सब अब सोमकान्त के दुष्कृत्य को सुनें, उस धर्मशील राजा को पूर्वजन्मों के कर्मफल से अकस्मात् अत्यन्त दुःखदायी… Read More