श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-31 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकतीसवाँ अध्याय गौतममुनि द्वारा अहल्या और इन्द्र को शाप अथः एकत्रिंशतितमोऽध्यायः शक्रशापवर्णनं रुक्मांगद बोले — हे महामुने ! गौतम [मुनि ] -के आने पर क्या घटना घटित हुई, उसे आप सम्पूर्ण रूप से मुझे बताइये; इस विषय में जानने की मेरे मन में महान् इच्छा है ॥ १ ॥ नारदजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तीसवाँ अध्याय इन्द्र का अहल्या के साथ छल करना अथः त्रिंशतितमोऽध्यायः अहल्याधर्षणं नारदजी बोले — [हे राजन्!] किसी समय मैं इन्द्र से मिलने अमरावती गया हुआ था। उन्होंने मेरा विधिपूर्वक सम्यक् प्रकार से पूजनकर और अत्यन्त विनम्र होकर कहा — ॥ १ ॥ इन्द्र बोले — हे मुने! आप सम्पूर्ण… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनतीसवाँ अध्याय देवर्षि नारद का राजा रुक्मांगद को कुष्ठ से मुक्ति हेतु गणेशकुण्ड में स्नान की सलाह देना अथः एकोनत्रिंशोऽध्यायः नारदागमनं [ भृगु ] मुनि बोले — [ हे राजा सोमकान्त !] उस वटवृक्ष के नीचे [प्रायोपवेशन के उद्देश्य से] बैठे हुए राजा रुक्मांगद ने किसी दिन मुनिश्रेष्ठ देवर्षि नारद… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठाईसवाँ अध्याय रुक्मांगद का कुष्ठरोग से ग्रस्त होना अथः अष्टाविंशतितमोऽध्यायः प्रायोपवेशनं प्रायोपवेशन (प्रायोपवेशन)।—संज्ञा। भोजन का पूर्णतः त्याग करना और ध्यान की स्थिर मुद्रा में मृत्यु की प्रतीक्षा करना। प्रायश्चित या धार्मिक पुण्य प्राप्ति हेतु किया जाने वाला कार्य। ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यास!] तत्पश्चात् रुक्मांगद ने [वहाँ उस आश्रम… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-27 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्ताईसवाँ अध्याय राजा भीम की गणेशोपासना और गणेशजी की कृपा से उसे रुक्मांगद नामक पुत्र की प्राप्ति अथः सप्तविंशोऽध्यायः रूक्माङ्गदाभिषेक वर्णनं व्यासजी बोले — हे पितामह! बुद्धिमान् और कृपावान् विश्वामित्रमुनि ने [राजा] भीम को [गणेशजी के दर्शन का] कौन-सा उपाय बतलाया था, उसे आप मुझसे कहें। जैसे अमृत का पान… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-26 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छब्बीसवाँ अध्याय दक्ष को राज्य की प्राप्ति और उनकी वंश-परम्परा का वर्णन अथः षड्विंशोऽध्यायः परम्परावर्णनं विश्वामित्रजी बोले — [ हे राजा भीम !] एक दिन जब शुभ ग्रहों की युति थी, [उस समय] शुभ लग्न, शुभ दिन और शुभ फल प्रदान करने वाले योग में नगर में अनेक प्रकार के… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-25 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पच्चीसवाँ अध्याय कौण्डिन्यनगर के राजा चन्द्रसेन की पुत्रहीन अवस्था में मृत्यु, मुद्गलमुनि का उनके उत्तराधिकारी के सम्बन्ध में निर्णय देना अथः पञ्चविशोऽध्यायः संस्कार वर्णनं विश्वामित्रजी बोले — हे राजन् ! दैव और काल के प्रभाव से घटित इस मंगलमयी आश्चर्यकारी घटना के विषय में श्रवण करो। कौण्डिन्यनगर में महाबुद्धिमान् चन्द्रसेन… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-24 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौबीसवाँ अध्याय दक्ष को राज्यप्राप्तिसूचक स्वप्न का दर्शन अथः चतुर्विंशोऽध्यायः स्वप्नकथनं राजा भीम ने पूछा — हे मुनिवर ! बुद्धिमान् राजपुत्र ने कहाँ, कैसे और किसका अनुष्ठान किया था ? हे मुने ! इसका विस्तारपूर्वक आप वर्णन कीजिये; क्योंकि मैं [इस कथा को] सुनकर भी तृप्त नहीं हो पा रहा… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तेईसवाँ अध्याय बल्लाल के शापसे कल्याण वैश्य को अन्धत्व, बधिरत्व और मूकत्व की प्राप्ति; माता की प्रार्थना पर बल्लाल द्वारा शापमुक्ति का उपाय बताना अथः त्रयोविंशोऽध्यायः भविष्यकथनं भृगुजी बोले — [ हे राजा सोमकान्त !] विश्वामित्र के वचन सुनकर [कल्याण नाम वाले] उस वैश्य से सम्बन्ध रखने वाली कथा के… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय दक्ष के पूर्वजन्म की कथा के प्रसंग में बल्लाल की गणेशभक्ति और बल्लालविनायक की महिमा का वर्णन अथः द्वाविंशोऽध्यायः बल्लालविनायक कथनं राजा बोले — हे मुनिश्रेष्ठ ! आपने कमलापुत्र दक्ष की चेष्टाओं से सम्बन्धित आश्चर्यजनक वृत्तान्त का वर्णन किया, [जिसे सुनकर मेरे मन में] महान् विस्मय उत्पन्न हो… Read More