श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-51 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्यावनवाँ अध्याय गणेशचतुर्थीव्रतानुष्ठान विधि के वर्णन के प्रसंग में राजा कर्दम के पूर्वजन्म की कथा अथः पञ्चाशत्तमोऽध्यायः हिमवत् पार्वती संवाद पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! आपने गणेश- चतुर्थी की महिमा [एवं उसके अनुष्ठानादि का] भली-भाँति वर्णन किया, मैं अब आपके अमृततुल्य वचनों [-के श्रवण]-से प्रसन्न हो गयी हूँ; परंतु… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-50 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचासवाँ अध्याय श्रीगणेशजी के मन्त्रों के अनुष्ठान एवं गणेशचतुर्थी व्रत की विधि अथः पञ्चाशत्तमोऽध्यायः हिमवद्गिरिजा संवादे चतुर्थीव्रत कथनं पार्वतीजी बोलीं — हे गिरिराज ! मैं [ गणेशजी का ] मन्त्र नहीं जानती हूँ, अतः आप ही उसे स्वयं बतायें, जिससे मैं गणेशजी का अनुग्रह और कल्याणकारी शिव को प्राप्त कर… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-49 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय श्रीगणेशजी की पार्थिव पूजा की विधि अथः एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः गणेश पार्थिवपूजा निरूपणं पार्वतीजी बोलीं — हे दयानिधि । हे गिरिराज ! हे पिता! सर्वेश्वर जगद्गुरु गणेशजी की उपासना के विषय में शीघ्र कहिये ॥ १ ॥ जिसके द्वारा मैं सम्यक् रूप से शिव की समीपता प्राप्त करके शाश्वत कल्याण… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-48 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय त्रिपुर-विजय के उपलक्ष्य में देवताओं द्वारा त्रिपुरारि-महोत्सव (देव-दीपावली ) – का आयोजन, हिमवान् का पार्वती को गणेशजी की महिमा बताना अथः अष्टचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः पार्वत्यारागमनम्, पार्थिवपूजा (भाद्रपदस्य शुद्धचतुर्थीपर्यन्तम्) महात्म्यम् व्यासजी बोले — हे पितामह! मैंने त्रिपुरासुर के वध से सम्बन्धित महान् आख्यान का श्रवण किया, फिर भी मैं अब यह… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-47 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय त्रिपुरदाह एवं त्रिपुरासुर का वध अथः सप्तचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करत्रिपुरयोर्युद्धम्, त्रिपुरदहनं व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन् ! गजानन गणेशजी के प्रसन्न होने तथा उनसे सहस्र नामों को प्राप्त कर लेने के अनन्तर शिवजी ने क्या किया; यह सब मुझसे कहिये ॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यास!] गणेशजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-46 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय श्रीगणेशसहस्रनाम स्तोत्र अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः शिवस्य वरदानं ॥ व्यास उवाच ॥ कथं नाम्नां सहस्रं स्वं गणेश उपदिष्टवान् । शिवायैतन्ममाचक्ष्व लोकानुग्रहतत्पर ॥ १ ॥ व्यासजी ने पूछा — सम्पूर्ण लोकों के ऊपर अनुग्रह में तत्पर रहनेवाले पितामह! गणेशजी ने भगवान् शिव के प्रति अपने सहस्रनामों का उपदेश किस प्रकार किया,… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-45 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय शिवकृत गणपतिस्तुति अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः शिवस्य वरदानं [ व्यास ] मुनि बोले — [हे ब्रह्मन्!] तब प्रसन्न हुए विघ्नहर्ता देवाधिदेव विघ्नेश्वर के भगवान् शंकर को वर देने के लिये उत्सुक होने पर उन सदाशिव ने क्या-क्या वर माँगे थे?॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — [हे व्यासजी ! ] गणेशजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-44 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय नारदजी के निर्देश से भगवान् शंकर का तप करके गणेशजी को प्रसन्न करना अथः चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः शङ्करेण तपः, गजाननेन दर्शनम्, शङ्करेण वरप्राप्तिः व्यासजी बोले — [हे ब्रह्मन्!] तब त्रिपुरासुर से पराजित शम्भु ने क्या किया ? कैसे उस जयशाली दैत्य त्रिपुरासुर पर उन्होंने विजय प्राप्त की ? ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-43 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय त्रिपुरासुर के साथ युद्ध में भगवान् शंकर की पराजय अथः त्रिचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करस्य पराजय, पार्वत्याश्च हिमालयसमीप गमनं ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यासजी ! ] उस द्वन्द्व-युद्ध में गिरिशायी भगवान् शंकर असुर सेनानायक त्रिपुरासुर से, षडानन भगवान् स्कन्द प्रचण्ड से और नन्दी चण्ड से युद्ध करने लगे ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-42 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बयालीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर और त्रिपुरासुर का युद्ध अथः द्विचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करत्रिपुरयोर्युद्धम् व्यासजी बोले — [हे ब्रह्मन्!] उन [द्विजश्रेष्ठ] कलाधर के चले जाने के बाद उस दैत्य (त्रिपुरासुर ) – ने क्या किया? उस मंगलमयी चिन्तामणि [गणेशजी की] मूर्ति को उसने कैसे लाकर उन कलाधर को प्रदान किया ? हे चतुरानन… Read More