श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-70 August 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-70 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्तरवाँ अध्याय संकष्टचतुर्थी व्रत की महिमा अथः सप्ततितमोऽध्यायः चतुर्थी व्रतोपाख्यानं कृतवीर्य राजा बोले — हे प्रभो ! पूर्वकाल में इस व्रत (संकष्टचतुर्थीव्रत)-को किसने किया? भूलोक में इसका प्रचार किसने किया? इस व्रत का क्या पुण्य है ? इसके करने का क्या फल है? दया करके इसे मुझे बतलाइये ॥ १… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-69 August 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-69 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय देवराज इन्द्र का राजा शूरसेन से संकष्टचतुर्थी व्रत की विधि का निरूपण करना अथः एकोनसप्ततितमोऽध्यायः सङ्कष्टचतुर्थीव्रतस्य साङ्गोपाङ्गमहिमा [राजा ] शूरसेन बोले — [हे देवराज ! सिद्धि प्रदान करने वाले तथा] हितकर उत्तम संकष्टचतुर्थी व्रत का ब्रह्माजी ने कृतवीर्य के पिता को किस प्रकार उपदेश किया था? वह आप… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-68 August 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-68 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अड़सठवाँ अध्याय कृतवीर्य के पिता का कृतवीर्य को स्वप्न में दर्शन देना और उसे संकष्टचतुर्थीव्रत की पुस्तक देना अथः अष्टषष्टितमोऽध्यायः व्रतनिरूपणं शूरसेन बोले — हे सौ यज्ञों के कर्ता इन्द्र! आप गणनायक गणेशजी की पुनः [ किसी] अन्य कथा का वर्णन कीजिये । तत्पश्चात् (ब्रह्माजी से वार्ता के पश्चात् )… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-67 August 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-67 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सड़सठवाँ अध्याय दूर्वांकुर की महिमा के प्रति संशयग्रस्त आश्रया को कौण्डिन्यमुनि का इन्द्र के पास दूर्वांकुर के भार के बराबर स्वर्ण लाने के लिये भेजना और एक दूर्वांकुर पर त्रैलोक्य की सम्पदा का भी न्यून होना अथः सप्तषष्टितमोऽध्यायः एकस्यापि दूर्वाङ्कुरस्य कौण्डिन्यपत्न्यै आश्रयप्रदाने सामर्थ्यम् [ गणेशजी के ] गण बोले —… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-66 August 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-66 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छाछठवाँ अध्याय कुष्ठी ब्राह्मण के वेश में गणेशजी का अपने भक्त द्विज-दम्पती के यहाँ जाना और उनके द्वारा भक्तिपूर्वक प्रदत्त दूर्वांकुरमात्र से तृप्त होना अथः षट्षष्टितमोऽध्यायः विरोचना त्रिशिराभ्यां प्रदत्तयार्वया गजाननस्य तृप्तिः कौण्डिन्य बोले — [हे प्रिये ! ] उन दोनों (द्विजदम्पती) – के लिये पृथ्वी ही आसन (बिछावन) और आकाश… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-65 August 27, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-65 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पैंसठवाँ अध्याय गणेशजी द्वारा राजा जनक के दानशीलता जनित अभिमान का मर्दन अथः पञ्चषष्टितमोऽध्यायः राजा जनकस्य सत्वहरणम् [ मुनि ] कौण्डिन्य बोले — हे देवि ! किसी समय गजानन गणेशजी सुखासन में बैठे हुए थे । [ उसी समय ] नारदमुनि उनका दर्शन करने के लिये आये। वे बहुत दिनों… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-64 August 27, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-64 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय गणेशपूजन में दूर्वांकुर के माहात्म्य के प्रसंग में अनलासुर के शमन की कथा अथः चतुःषष्टितमोऽध्यायः दूर्वामाहात्म्य वर्णनं आश्रया बोली — हे महामुनि! देवताओं और ऋषियों के पलायन कर जाने पर जब बालकरूपधारी गणेशजी पर्वत के समान स्थित रहे, तब उस बालक और अनलासुर के मध्य कौन-सी आश्चर्यजनक घटना… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-63 August 27, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-63 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिरसठवाँ अध्याय गणेश-पूजन में दूर्वांकुर के माहात्म्य के प्रसंग में अनलासुर के आतंक का वर्णन अथः त्रिषष्टितमोऽध्यायः दुर्वामाहात्म्यं गणेशजी के गण बोले — हे योगिजनो! आप सभी अपने चंचल मन को स्थिरकर श्रवण करें। [गणेशजी की] जिस महिमा का कथन करने में [सहस्रमुख ] शेष तथा चतुर्मुख ब्रह्माजी भी समर्थ… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-62 August 27, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-62 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बासठवाँ अध्याय भाद्र शुक्ल चतुर्थीव्रत के अन्तर्गत गणेशजी को दूर्वार्पण के माहात्म्य का वर्णन अथः द्विषष्टितमोऽध्यायः दूर्वोपाख्यानं कृतवीर्य के पिता ने पूछा — [ हे ब्रह्मन् !] ‘भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को चन्द्रमा के उदय होने पर ही गणेशजी की पूजा क्यों की जाती है’ – यह… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-61 August 27, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-61 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकसठवाँ अध्याय गणेशजी द्वारा चन्द्रमा को शाप देना तथा देवताओं की प्रार्थना पर पुनः अनुग्रह करना, चन्द्रमा द्वारा वरद विनायक की स्थापना अथः एकषष्ठितमोऽध्यायः चन्द्रशापानुग्रहवर्णनं ब्रह्माजी बोले — हे राजन् ! एक बार मैं गिरिशायी भगवान् शंकर के निवास स्थान कैलासपर्वत पर गया हुआ था। वहाँ सभा के मध्य में… Read More