श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-80 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अस्सीवाँ अध्याय माता रेणुका के स्मरण करने पर परशुराम का आगमन, माता द्वारा सारा वृत्तान्त जानकर परशुराम का दुखी होना और माता द्वारा प्राप्त इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियविहीन बनाने की आज्ञा को स्वीकार करना, परशुराम द्वारा माता-पिता का और्ध्वदैहिक संस्कार करना अथः अशीतितमोऽध्यायः रामोपाख्याने और्ध्वदैहिकसंस्कारोपदेश ब्रह्माजी बोले — राजा… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-79 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उन्यासीवाँ अध्याय जमदग्नि द्वारा कामधेनु को देने से मना करने पर कार्तवीर्य का क्रुद्ध होकर अपने सैनिकों को युद्ध का आदेश देना, इधर कामधेनु द्वारा अनेक वीरों का प्रादुर्भाव और उनके द्वारा कार्तवीर्य की सेना का पराभव, क्रुद्ध कार्तवीर्य द्वारा महर्षि जमदग्नि का वध, रेणुका का कार्तवीर्य को शाप देना… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-78 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अठहत्तरवाँ अध्याय मुनि जमदग्नि द्वारा ससैन्य राजा कार्तवीर्य का आतिथ्य; कामधेनु का अद्भुत प्रभाव देखकर राजा का बलपूर्वक उसे ग्रहण करने की इच्छा करना अथः अष्टसप्ततितमोऽध्यायः कार्तवीर्येण (सहस्रार्जुनेन) कामधेनुं नेतुं प्रयत्नः ब्रह्माजी बोले — मुनि जमदग्नि ने अपने शिष्यों से कहा — ‘तुम लोग नदी के तटपर निवास कर रहे… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-77 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सतहत्तरवाँ अध्याय श्रीपरशुरामजी के आविर्भाव के प्रसंग में महर्षि जमदग्नि का आख्यान, कार्तवीर्यार्जुन का महर्षि जमदग्नि के आश्रम में आना और महर्षि द्वारा कामधेनु के प्रभाव से ससैन्य राजा का सत्कार करना अथः सप्तसप्ततितमोऽध्यायः सहस्रार्जुनस्य जमदग्नेराश्रममागमनम्, भोजन प्रसङ्गं व्यासजी बोले — [ हे ब्रह्मन्!] अन्य किसके द्वारा इस व्रत को… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-76 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छिहत्तरवाँ अध्याय श्रीगणेशजी के चार अक्षरवाले ‘गजानन’ नाम- मन्त्र के माहात्म्य में ब्राह्मण-पुत्र बुध का आख्यान, शापवश वैश्यकुल में उत्पन्न बुध का कुष्ठी होना और ‘गजानन’ नाम- मन्त्र के श्रवण से उसे विनायक धाम की प्राप्ति अथः षट्सप्ततितमोऽध्यायः सङ्कष्टचतुर्थीमाहात्म्यकथनं दूत बोले — प्राचीनकाल की बात है, गौड़ देश के गौड़… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-75 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचहत्तरवाँ अध्याय राजा शूरसेन का संकष्टचतुर्थीव्रत करना और उसके प्रभाव से सम्पूर्ण प्रजासहित उनको ले जाने के लिये गणेशलोक से विमान आना अथः पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः शूरसेनकृतचतुर्थीव्रतफलनिरूपणं ब्रह्माजी कहते हैं — [ हे व्यासजी !] संकष्ट- चतुर्थीव्रतजनित [पुण्य] – की महिमा को सुनकर और देखकर राजा शूरसेन ने उस व्रत को करने… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-74 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौहत्तरवाँ अध्याय संकष्टचतुर्थी व्रत की महिमा के सन्दर्भ में एक गलत्कुष्ठा चाण्डाली की कथा अथः चतुःसप्ततितमोऽध्यायः चाण्डाल्युपाख्यानं व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन् ! उन राजा शूरसेन ने आदरपूर्वक इन्द्र के मुख से इतिहाससहित संकष्टचतुर्थी व्रत को सुनकर उस उत्तम व्रत को कैसे किया था ? ॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-73 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय गणेशजी की आराधना के प्रभाव से कार्तवीर्य को दिव्य देह और सहस्त्र भुजाओं की प्राप्ति अथः नामत्रिसप्ततितमोऽध्यायः कृतवीर्यपुत्राय प्रवालक्षेत्रानुष्ठानं गणेशदर्शनं, (कृतवीर्येण) सहस्रभुजानां च प्राप्तिः इन्द्र बोले — वह राजपुत्र भगवान् गजानन का ध्यान करते हुए उनके प्रति दृढ़ निष्ठा रखकर गुरु (दत्तात्रेयजी) द्वारा उपदिष्ट मन्त्र का नियमपूर्वक जप… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-72 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बहत्तरवाँ अध्याय कृतवीर्य की पत्नी का अंगहीन पुत्र को जन्म देना, दत्तात्रेयजी का आना और कृतवीर्यपुत्र को गणेशजी के एकाक्षरमन्त्र का उपदेश देना, कृतवीर्य का पुत्र को गणपति-आराधना के लिये वन में भेजना अथः द्विसप्ततितमोऽध्यायः कार्तवीर्यप्रादुर्भावः शूरसेन बोले — हे शतयज्ञकर्ता इन्द्र ! व्रत की सम्पूर्ति होने पर राजा और… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-71 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय संकष्टचतुर्थी व्रत के उद्यापन की विधि, संकष्टचतुर्थी व्रत के अनुष्ठान से राजा कृतवीर्य को पुत्रप्राप्ति अथः एकसप्ततितमोऽध्यायः सङ्कष्टचतुर्थीव्रतोद्यापनाविधिः राजा बोले — हे महाप्राज्ञ [ब्रह्माजी ] ! इस (संकष्ट चतुर्थी)- व्रत का उद्यापन कैसे करना चाहिये ? संसार हित की कामना से उसे मुझे विस्तारपूर्वक बताइये ॥ १ ॥… Read More