श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-008 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ आठवाँ अध्याय गणेशजी की बाललीला के सन्दर्भ में उद्धत तथा धुन्धुर नामक दैत्यों के वध की कथा और चित्र नामक गन्धर्व के उद्धार का आख्यान अथः अष्टमोऽध्यायः नक्रमोक्षणं ब्रह्माजी बोले — अत्यन्त पराक्रमशालिनी उस विरजा नामक राक्षसी के वध का समाचार सुनकर उद्धत तथा धुन्धुर नामक महान् बल से सम्पन्न… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-007 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सातवाँ अध्याय वसिष्ठ आदि ऋषियों का बालक महोत्कट का दर्शन करने के लिये कश्यपजी के आश्रम में आना, विरजा राक्षसी द्वारा बालक महोत्कट का अपहरण, बालक का विरजा राक्षसी का उद्धार कर अपने धाम भेजना, कश्यप द्वारा अदिति को बालक की रक्षा करते रहने का आदेश देना अथः सप्तमोऽध्यायः विरजाराक्षसीमोक्षणं… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-006 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छठा अध्याय दैत्यों के भार से पीड़ित पृथ्वी का ब्रह्माजी के पास जाकर अपनी व्यथा बताना, ब्रह्मादि देवताओं द्वारा परमात्मा गणेश से अवतार धारण करने की प्रार्थना करना, देवी अदिति और कश्यप के पुत्ररूप में गणेशजी का अवतरण, कश्यप द्वारा उनके जातकर्मादि संस्कार करना और ‘महोत्कट’ यह नाम रखना अथः… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-005 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय अदिति की तपस्या से प्रसन्न गणेशजी का उनके पुत्ररूप में जन्म ग्रहण करने की स्वीकृति देना अथः पञ्चमोऽध्यायः अदितिवरप्राप्तिवर्णनं ब्रह्माजी बोले — [हे व्यास!] कश्यप [ऋषि] मेरे ही मानस पुत्र हैं, जो अत्यन्त बुद्धिमान्, पुण्यशाली, धर्मशील, तपस्वी, जितेन्द्रिय, अत्यन्त दयावान्, संसार मे सभी के दुःखों और शोक का… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-004 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौथा अध्याय नरान्तक की भूलोक और नागलोक पर विजय अथः चतुर्थोऽध्यायः भूतलरसातलविजय व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन् ! मैंने आपके मुख से देवान्तक के चरित का भक्तिपूर्वक श्रवण किया, अब आप मुझे यह बतायें कि नरान्तक ने क्या किया ? ॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-003 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तीसरा अध्याय देवान्तक की देवलोक पर विजय अथः तृतीयोऽध्यायः देवलोकविजयं ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यास!] तदनन्तर देवान्तक एवं नरान्तक प्रातः उठकर गुरुजनों का ध्यानकर तथा उनका पूजनकर और सम्पूर्ण देवताओं का स्मरणकर तथा उन्हें प्रणाम करके नैर्ऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशा में गये। मल-मूत्र का त्यागकर और दन्त एवं जिह्वा का… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-002 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ दूसरा अध्याय देवान्तक और नरान्तक की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव का प्रकट होना और उन्हें वरदान देना अथः द्वितीयोऽध्यायः देवान्तकनरान्तकवरप्राप्तिवर्णनं व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन् ! उन दोनों (नरान्तक और देवान्तक)- ने उस (पंचाक्षरी महाविद्या) -का अनुष्ठान कहाँ और कैसे किया ?  आदरपूर्वक पूछने वाले मुझसे वह सब विस्तारपूर्वक… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-001 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पहला अध्याय देवान्तक और नरान्तक का जन्म तथा नारदजी का उन्हें पंचाक्षरी महाविद्या का उपदेश देना अथः प्रथमोऽध्यायः नारदोपदेशो मुनिगण बोले — हे सूतजी ! हे महामते ! हम सबने आपके द्वारा सम्यक् रूप से वर्णित आख्यान का आदरपूर्वक श्रवण किया; परंतु जैसे प्राणी प्रतिदिन अन्न का भक्षण करने पर… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-92 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बानबेवाँ अध्याय देवताओं को गणेशजी से अनेक वरदानों की प्राप्ति, देवताओं आदि द्वारा गणेशजी की द्वादश मूर्तियों की स्थापना, गणेशजी के सुमुख आदि द्वादश नामों के स्मरण का माहात्म्य, उपासनाखण्ड के श्रवण की महिमा तथा उपासनाखण्ड का उपसंहार अथः द्विनवतितमोऽध्यायः ब्रह्मव्यास भृगुसोमकान्त संवादे गजानननामनिरूपणं ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार से… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-91 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्यानबेवाँ अध्याय गणेशजी की आज्ञा से ब्रह्माजी द्वारा सात मानस पुत्रों की सृष्टि, ब्रह्मापुत्र कश्यप द्वारा गणेशजी की आराधना और विविध वरों की प्राप्ति, कश्यपपत्नियों से सृष्टि का विस्तार, कश्यप पुत्रों द्वारा गणेशजी की स्तुति अथः एकनवतितमोऽध्यायः कश्यपसृष्टिवर्णनं व्यासजी बोले — हे देव! भगवान् गणेशजी की दूसरी अन्य कथा भी… Read More