श्रीगणपति सहस्रनामावली तन्त्रों और पुराणों में वर्णित इष्टदेवता के सहस्त्रनामों द्वारा उनकी स्तुति करने की पावन परम्परा अत्यन्त प्राचीन- काल से चली आ रही है। इनके एक बार के पाठ से नाम-मन्त्रों की दस माला का जप सम्पन्न हो जाता है । भगवान्‌ के गुणों और लीला – चरित्रों को लेकर ऋषियों द्वारा उपदिष्ट सहस्रनामों… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-60 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ साठवाँ अध्याय भूमिपुत्र मंगल की उत्पत्ति की कथा, उसकी उग्र तपस्या से गणेशजी का प्रसन्न होकर वर देना, अंगारकचतुर्थीव्रत की महिमा अथः षष्टितमोऽध्यायः अङ्गारक चतुर्थी व्रतोपाख्यान ब्रह्माजी बोले — हे राजन् ! मैं अंगारक चतुर्थी की महिमा को संक्षेप में कहता हूँ, तुम इसे सावधान होकर श्रवण करो ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-59 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनसठवाँ अध्याय कृतवीर्य के पूर्वजन्म की कथा, संकष्टचतुर्थीव्रत की विधि और उसकी महिमा अथः एकोनषष्टितमोऽध्यायः चतुर्थीव्रतकथनं राजा बोले — [हे देवेन्द्र!] भ्रूशुण्डीमुनि के उन पितरों के कुम्भीपाक नरक से निकलकर दिव्य लोक (गणेशजी के धाम) – में चले जाने पर कृतवीर्य के पिता ने [ अपनी वंश-परम्परा को बचाये रखने… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-58 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय संकष्टचतुर्थीव्रत की महिमा के प्रसंग में भ्रूशुण्डीमुनि के पितरों के उद्धार की कथा अथः अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः सङ्कष्ट चतुर्थी व्रत कथनं ब्रह्माजी बोले — हे व्यासजी ! मरुत्वान् इन्द्र के इस प्रकार के उत्तम वचन सुनकर और उस [भ्रूशुण्डि मुनि की] अमृतोपम कथा का श्रवण कर प्रसन्न हुए राजा शूरसेन… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-57 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्तावनवाँ अध्याय भ्रूशुण्डीमुनि का प्रारम्भिक जीवन, मुद्गलमुनि की उनपर कृपा, उनकी कठोर तपस्या तथा उन्हें गणेश – सारूप्य की प्राप्ति अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः भ्रुशुण्ड्युपाख्यानं शतक्रतु इन्द्र बोले —  [हे राजन्!] अब मैं तुमसे इस प्राचीन कथा को कहता हूँ कि जिस प्रकार मुनि भ्रूशुण्डी ने गणाधिपति गणेशजी की भक्ति के प्रभाव… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-56 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छप्पनवाँ अध्याय गणपत्युपासना की महिमा के सन्दर्भ में भ्रूशुण्डीमुनि का आख्यान अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः इन्द्रविमानपतनं भृगुजी बोले — हे राजन् ! इस प्रकार मैंने [गणेश- चतुर्थी व्रत के] सम्पूर्ण माहात्म्य को कहा। अब जो ब्रह्माजी द्वारा व्यासजी के प्रति कहा गया था, उसे तुम पुनः सुनो ॥ १ ॥ सोमकान्त बोले… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-55 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचपनवाँ अध्याय गणेशचतुर्थी व्रत के माहात्म्य के सन्दर्भ में राजा चन्द्रांगद और रानी इन्दुमती के पुनर्मिलन की कथा अथः पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः शिवपार्वती संयोग हिमवान् बोले — [हे पार्वती!] इस प्रकार उस रानी इन्दुमती के गणेशचतुर्थीव्रत के पूर्ण होने पर गणेशजी की कृपा से पाताल में नागकन्याओं की मति बदल गयी ॥… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-54 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौवनवाँ अध्याय प्रजाजनों को आश्वासन देना, रानी इन्दुमती का राजा को मृत समझकर विलाप करना तथा नारदजी के उपदेश से गणेशचतुर्थी का व्रत करना अथः चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः इन्दुमती नारद संवादं पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! उस रानी के मूर्च्छित हो जाने पर प्रजाजनों ने क्या किया ? हृदय को आनन्द… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-53 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिरपनवाँ अध्याय हिमवान्-पार्वती-संवाद में राजा चन्द्रांगद का उपाख्यान अथः त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः चन्द्राङ्गदोपाख्यान हिमवान् बोले — हे शुभानने! अब मैं राजा चन्द्रांगद और उनकी पत्नी इन्दुमती द्वारा किये गये इस व्रत को तुमसे कहता हूँ। मालवदेश में कर्ण नाम का एक विख्यात नगर है, वहाँ चन्द्रांगद नाम का अत्यन्त पराक्रमी राजा हुआ… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-52 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बावनवाँ अध्याय राजा नल के पूर्वजन्म का वृत्तान्त अथः द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः नलव्रत निरुपणं पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! नल कौन थे ? उन नल ने इस [गणेशचतुर्थी] व्रत को किस कारण से किया था ? – यह मुझे बतलाइये । [ गणेशजी के व्रतविषयक] इन आख्यानों को श्रवण करने से… Read More