श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्कीसवाँ अध्याय राजकुमार दक्ष की मुद्गल से भेंट और मुद्गल का उसे गणेशजी के एकाक्षर मन्त्र का उपदेश देना अथः एकविंशतितमोऽध्यायः मन्त्रोपदेश वर्णनं [ मुनि ] विश्वामित्रजी बोले — [हे राजा भीम!] अत्यन्त विह्वल वल्लभपुत्र दक्ष इधर-उधर घूमता और दौड़ता रहा, उसे अपने वस्त्रों और आभूषणों का भी ज्ञान न… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बीसवाँ अध्याय बालक दक्ष द्वारा विघ्नविनायक गणेशजी की स्तुति करना और गणेशजी का उसे दर्शन देना अथः विंशतितमोऽध्यायः दक्षस्तुतिः ब्रह्माजी बोले — [हे व्यासजी !] तदनन्तर उस (राजा)-ने ब्राह्मणों, साधुओं, ज्योतिषियों और वेदज्ञों को बुलाकर उनका रत्न, वस्त्र, धन आदि से पूजनकर, तत्पश्चात् उनसे पूछकर उसने अपने पुत्र का नाम… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-19 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उन्नीसवाँ अध्याय राजा भीम की निःसंतानता के कारण का वर्णन अथः एकोनविंशतितमोऽध्यायः कमलापुत्र वर्णनं भृगुजी बोले — [ हे राजन्!] इस आख्यान को सुनकर और षडक्षर मन्त्र की [जप] – विधि जानकर भी व्यासजी ने ब्रह्माजी से पुनः इस प्रकार पूछा, जैसे उनकी तद्विषयक इच्छा पूर्ण न हुई हो ॥… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-18 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अठारहवाँ अध्याय विष्णु का गणेशजी के षडक्षरमन्त्र का अनुष्ठान करना और गणेशजी की कृपा से मधु-कैटभ का वध करना अथः अष्टादशोऽध्यायः सिद्धक्षेत्रोत्पत्ति कथनं सोमकान्त बोले — [हे मुनिश्रेष्ठ!] भगवान् श्रीहरि ने कैसे और कहाँ उस उत्तम [षडक्षर] मन्त्र का जप किया? उन्होंने किस प्रकार सिद्धि प्राप्त की, वह सब मुझसे… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-17 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय भगवान् विष्णु का मधु-कैटभ से मल्लयुद्ध करना, उन्हें जीतने में अपने को असमर्थ समझ गन्धर्वरूप से गायन-वादनकर भगवान् शिव को प्रसन्न करना और भगवान् शिव का उन्हें गणेशजी के षडक्षरमन्त्र का उपदेश देना अथः सप्तदशोऽध्यायः मन्त्रोपदेश भृगुजी बोले — जबतक भगवान् विष्णु [निद्रा त्यागकर] उठते, तबतक उन दोनों… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-16 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सोलहवाँ अध्याय सृष्टि-वर्णन, मधु-कैटभ की उत्पत्ति और ब्रह्माजी द्वारा उनके वध हेतु योगनिद्रा देवी की प्रार्थना करना अथः षोडशोऽध्यायः देवीप्रार्थनं राजा [ सोमकान्त ] बोले — हे ब्रह्मर्षि ! भगवान् गणेश की कथा सुनकर मन में हर्ष हो रहा है। इस कथारूपी अमृत से मैं तृप्त नहीं हो रहा हूँ,… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-15 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा भगवान् गणेश की आराधना अथः पञ्चदशोऽध्यायः गजानन पूजा निरूपणं भृगुजी बोले — हे सोमकान्त ! लोकपितामह ब्रह्माजी ने व्यासजी से आगे जो कहा, उसे मैं कहता हूँ; तुम आदरपूर्वक श्रवण करो ॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — हे मुनिवर ! तत्पश्चात् मैंने एक बड़ा सुन्दर स्वप्न… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-14 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय सृष्टि करते समय विघ्नों द्वारा बाधित ब्रह्माजी का भगवान् गणेश की प्रार्थना करना अथः चतुर्दशोऽध्यायः ब्रह्मचिन्तावर्णनं राजा [ सोमकान्त ] बोले — [ हे मुनिश्रेष्ठ !] तब सहस्रों ब्रह्माण्डों को देखने के बाद ब्रह्माजी ने क्या किया? उन्होंने गजानन (गणेशजी ) – से आज्ञा प्राप्तकर किस प्रकार सृष्टि… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-13 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भगवान् गणेश की स्तुति करना तथा गणेशजी का अपने उदर में स्थित असंख्य ब्रह्माण्डों का उन्हें दर्शन कराना अथः त्रयोदशोऽध्यायः ब्रह्मस्तुतिवर्णनं व्यासजी ने कहा — [हे ब्रह्मन् !] पाँच मुखों वाले शिव, चार मुखों वाले ब्रह्मा और सहस्र मस्तकों वाले विष्णु [^1]  ने… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-12 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बारहवाँ अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और शिव को भगवान् गणेश के दर्शन अथः द्वादशोऽध्यायः गजाननदर्शनं सूतजी बोले — [ हे शौनकजी !] ब्रह्माजी के मुख से निकले हुए इन वचनों को सुनकर महान् हर्ष से युक्त मुनि व्यासजी ने उनसे पुनः पूछा ॥ १ ॥ व्यासजी ने कहा — [ हे… Read More