अग्निपुराण – अध्याय 319 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ उन्नीसवाँ अध्याय वागीश्वरी की पूजा एवं मन्त्र आदि वागीश्वरीपूजा भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द! अब मैं मण्डलसहित ‘वागीश्वरी-पूजन’ की विधि बता रहा हूँ। ऊहक (ऊ) को काल (घ) — से संयुक्त करके उसका चन्द्रमा (अनुस्वार) से योग… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 318 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ अठारहवाँ अध्याय अन्तःस्थ, कण्ठोष्ठ तथा शिव स्वरूप मन्त्र का वर्णन; अघोरास्त्र-मन्त्र का उद्धार; ‘विघ्न मर्द’ नामक मण्डल तथा गणपति-पूजन की विधि गणपूजाः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! जिसके ऊपर तेज (र्) हो, ऐसे विश्वरूप (ह्) को… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 317 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सत्रहवाँ अध्याय सकलादि मन्त्रों के उद्धार का क्रम सकलादिमन्त्रोद्धारः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! सकल, निष्कल, शून्य, कलाढ्य, समलंकृत, क्षपण, क्षय, अन्तःस्थ, कण्ठोष्ठ तथा आठवाँ शिव [^1]  —ये प्रासादपरासंज्ञक मन्त्र के आठ स्वरूप माने गये हैं।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 316 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सोलहवाँ अध्याय त्वरिता आदि विविध मन्त्र एवं कुब्जिका विद्याका कथन नानामन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — मुने। पहले ‘हूं’ रखे, फिर ‘खे चच्छे’ — ये तीन पद जोड़कर मन्त्र की शोभा बढ़ावे। तत्पश्चात् ‘क्षः स्त्रीं हूं क्षे’ लिखकर अन्त… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 315 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पंद्रहवाँ अध्याय स्तम्भन आदि के मन्त्रों का कथन स्तम्भनादिमन्त्रः अग्निदेव कहते हैं — मुने ! अब मैं स्तम्भन, मोहन, वशीकरण, विद्वेषण तथा उच्चाटन के प्रयोग बताता हूँ। विषव्याधि, आरोग्य, मारण तथा उसके शमन के प्रयोग भी बता रहा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 314 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चौदहवाँ अध्याय त्वरिता के पूजन तथा प्रयोग का विज्ञान त्वरिताज्ञानम् निग्रहयन्त्र अग्निदेव कहते हैं — मुने ! ‘ॐ ह्रीं ह्रूं खे च च्छे क्षः स्वी ह्रूं क्षे ह्रीं फट् त्वरितायै नमः ।’ इस मन्त्र से न्यासपूर्वक त्वरितादेवी की… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 313 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तेरहवाँ अध्याय नाना मन्त्रों का वर्णन नानामन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् विनायक (गणेश) के पूजन की विधि बताऊँगा। योगपीठ पर प्रथम तो आधारशक्ति की पूजा करे। फिर अग्नि आदि कोणों तथा पूर्वादि दिशाओं में… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 312 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बारहवाँ अध्याय त्वरिता-विद्या से प्राप्त होने वाली सिद्धियों का वर्णन त्वरिता-विद्या अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं विद्या प्रस्ताव का वर्णन करूँगा, जो धर्म, काम आदि की सिद्धि प्रदान करने वाला है। नौ कोष्ठों के विभाग से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 311 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ ग्यारहवाँ अध्याय त्वरिता-मन्त्र के दीक्षा ग्रहण की विधि त्वरितामूलमन्त्रादिः अग्निदेव कहते हैं —- मुने। अब सिंहासन पर स्थित वज्र से व्याप्त कमल में मन्त्र न्यासपूर्वक दीक्षा आदि का विधान बताऊँगा ॥ १ ॥ ‘हे हे हुति वज्रदन्त पुरु… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 310 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ दसवाँ अध्याय अपरत्वरिता-मन्त्र एवं मुद्रा आदि का वर्णन त्वरितामन्त्रादि अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं दूसरी ‘अपरा विद्या’ का वर्णन करता हूँ, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली है। धूलि से निर्मित, वज्र चिह्न से आवृत… Read More