अग्निपुराण – अध्याय 229 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनतीसवाँ अध्याय अशुभ और शुभ स्वप्नों का विचार स्वप्नाध्यायः पुष्कर कहते हैं — अब मैं शुभाशुभ स्वप्नों का वर्णन करूँगा तथा दुःस्वप्न-नाश के उपाय भी बतलाऊँगा । नाभि के सिवा शरीर के अन्य अंगों में तृण और वृक्षों… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 228 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय युद्ध–यात्रा के सम्बन्ध में विचार युद्धयात्रा पुष्कर कहते हैं — जब राजा यह समझ ले कि किसी बलवान् आक्रन्द [^1]  (राजा) के द्वारा मेरा पार्ष्णिग्राह[^2]  राजा पराजित कर दिया गया है तो वह सेना को युद्ध… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 227 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्ताईसवाँ अध्याय अपराधों के अनुसार दण्ड के प्रयोग राजधर्माः दण्डप्रणयनं पुष्कर कहते हैं — राम! अब मैं दण्डनीति का प्रयोग बतलाऊँगा, जिससे राजा को उत्तम गति प्राप्त होती है। तीन जौ का एक ‘कृष्णल’ समझना चाहिये, पाँच कृष्णल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 226 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छब्बीसवाँ अध्याय पुरुषार्थ की प्रशंसा; साम आदि उपायों का प्रयोग तथा राजा की विविध देवरूपता का प्रतिपादन राजधर्माः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! दूसरे शरीर से उपार्जित किये हुए अपने ही कर्म का नाम ‘दैव’ समझिये। इसलिये… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 225 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचीसवाँ अध्याय राज-धर्म-राजपुत्र-रक्षण आदि राजधर्माः पुष्कर कहते हैं — राजा को अपने पुत्र की रक्षा करनी चाहिये तथा उसे धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और धनुर्वेद की शिक्षा देनी चाहिये । साथ ही अनेक प्रकार के शिल्पों की शिक्षा देनी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 224 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौबीसवाँ अध्याय अन्तःपुर के सम्बन्ध में राजा के कर्त्तव्य; स्त्री की विरक्ति और अनुरक्ति की परीक्षा तथा सुगन्धित पदार्थों के सेवन का प्रकार स्त्रीरक्षादिकामशास्त्रं पुष्कर कहते हैं — अब मैं अन्तःपुर के विषय में विचार करूँगा। धर्म, अर्थ… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 223 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तेईसवाँ अध्याय राष्ट्र की रक्षा तथा प्रजा से कर लेने आदि के विषय में विचार राजधर्माः पुष्कर कहते हैं — (राज्य का प्रबन्ध इस प्रकार करना चाहिये) राजा को प्रत्येक गाँव का एक-एक अधिपति नियुक्त करना चाहिये। फिर… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 222 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बाईसवाँ अध्याय राजा के दुर्ग, कर्तव्य तथा साध्वी स्त्री के धर्म का वर्णन दुर्गसम्पत्तिः पुष्कर कहते हैं — अब मैं दुर्ग बनाने के विषय में कहूँगा । राजा को दुर्गदेश ( दुर्गम प्रदेश अथवा सुदृढ़ एवं विशाल किले)… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 221 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इक्कीसवाँ अध्याय अनुजीवियों का राजा के प्रति कर्तव्य का वर्णन अनुजीविवृत्तं पुष्कर कहते हैं — भृत्य को राजा की आज्ञा का उसी प्रकार पालन करना चाहिये, जैसे शिष्य गुरु की और साध्वी स्त्रियाँ अपने पति की आज्ञा का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 220 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बीसवाँ अध्याय राजा के द्वारा अपने सहायकों की नियुक्ति और उनसे काम लेने का ढंग सहायसम्पत्तिः पुष्कर कहते हैं — अभिषेक हो जाने पर उत्तम राजा के लिये यह उचित है कि वह मन्त्री को साथ लेकर शत्रुओं… Read More