अग्निपुराण – अध्याय 219 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उन्नीसवाँ अध्याय राजा के अभिषेक के समय पढ़नेयोग्य मन्त्र अभिषेकमन्त्राः पुष्कर ने कहा —  अब मैं राजा और देवता आदि के अभिषेक सम्बन्धी मन्त्रों का वर्णन करूँगा, जो सम्पूर्ण पापों को दूर करनेवाले हैं। कलश से कुशयुक्त जल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 218 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अठारहवाँ अध्याय राजा के अभिषेक की विधि राज्यभिषेकः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! पूर्वकाल में परशुरामजी के पूछने पर पुष्कर ने उनसे जिस प्रकार राजधर्म का वर्णन किया था, वही मैं तुमसे बतला रहा हूँ ॥ १ ॥… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 217 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्रहवाँ अध्याय गायत्री से निर्वाण की प्राप्ति वसिष्ठकृत लिंगमूर्ति स्तुति अथवा श्रीपरमेश्वरस्तोत्र गायत्रीनिर्वाणं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! किसी अन्य वसिष्ठ ने गायत्री जपपूर्वक लिङ्गमूर्ति शिव की स्तुति करके भगवान् शंकर से निर्वाणस्वरूप परब्रह्म की प्राप्ति की ॥… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 216 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सोलहवाँ अध्याय गायत्री मन्त्र के तात्पर्यार्थ का वर्णन गायत्रीनिर्वाणं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! इस प्रकार संध्या का विधान करके गायत्री का जप और स्मरण करे। यह अपना गान करनेवाले साधकों के शरीर और प्राणों का त्राण… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 215 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पंद्रहवाँ अध्याय संध्या-विधि सन्ध्याविधिः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! जो पुरुष ॐकार को जानता है, वह योगी और विष्णुस्वरूप है। इसलिये सम्पूर्ण मन्त्रों के सारस्वरूप और सब कुछ देनेवाले ॐकार का अभ्यास करना चाहिये । समस्त मन्त्रों के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 214 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौदहवाँ अध्याय नाड़ीचक्र का वर्णन मन्त्रमाहात्म्यं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं नाड़ीचक्र के विषय में कहता हूँ, जिसके जानने से श्रीहरि का ज्ञान हो जाता है। नाभि के अधोभाग में कन्द (मूलाधार) है, उससे अङ्कुरों… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 213 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तेरहवाँ अध्याय पृथ्वीदान तथा गोदान की महिमा पृथ्वीदानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं ‘पृथ्वीदान’ के विषय में कहता हूँ। ‘पृथ्वी’ तीन प्रकार की मानी गयी है। सौ करोड़ योजन विस्तार वाली सप्तद्वीपवती समुद्रों सहित जम्बूद्वीप… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 212 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बारहवाँ अध्याय विविध काम्य-दान एवं मेरुदानों का वर्णन मेरुदानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आपके सम्मुख काम्य-दानों का वर्णन करता हूँ, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। प्रत्येक मास में प्रतिदिन पूजन करते… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 211 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय नाना प्रकार के दानों का वर्णन नानादानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! जिसके पास दस गौएँ हों, वह एक गौ; जिसके पास सौ गौएँ हों, वह दस गौएँ; जिसके पास एक हजार गौएँ हों, वह सौ… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 210 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ दसवाँ अध्याय सोलह महादानों के नाम; दस मेरुदान, दस धेनुदान और विविध गोदानों का वर्णन महादानानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं सभी प्रकार के दानों का वर्णन करता हूँ। सोलह महादान होते हैं। सर्वप्रथम तुलापुरुषदान, फिर… Read More