अग्निपुराण – अध्याय 179 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनासीवाँ अध्याय चतुर्थी तिथि के व्रत चतुर्थीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं आपके सम्मुख भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले चतुर्थी-सम्बन्धी व्रतों का वर्णन करता हूँ । माघ के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को उपवास करके गणेश का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 178 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय तृतीया तिथि के व्रत तृतीयाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं आपके सम्मुख तृतीया तिथि को किये जाने वाले व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं। ललितातृतीया को किये जाने… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 177 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सतहत्तरवाँ अध्याय द्वितीया तिथि के व्रत द्वितीयाव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं द्वितीया के व्रतों का वर्णन करूँगा, जो भोग और मोक्ष आदि देनेवाले हैं। प्रत्येक मास की द्वितीया को फूल खाकर रहे और दोनों अश्विनीकुमार नामक… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 176 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छिहत्तरवाँअध्याय प्रतिपदा तिथि के व्रत प्रतिपद्व्रतानि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं आपसे प्रतिपद् आदि तिथियों के व्रतों का वर्णन करूँगा, जो सम्पूर्ण मनोरथों को देनेवाले हैं। कार्तिक, आश्विन और चैत्र मास में कृष्णपक्ष की प्रतिपद् ब्रह्माजी की… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 175 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय व्रत के विषय में अनेक ज्ञातव्य बातें व्रतपरिभाषा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी! अब मैं तिथि, वार, नक्षत्र, दिवस, मास, ऋतु वर्ष तथा सूर्य संक्रान्ति के अवसर पर होनेवाले स्त्री-पुरुष- सम्बन्धी व्रत आदि का क्रमशः वर्णन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 174 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय प्रायश्चित्तों का वर्णन प्रायश्चित्तानि अग्निदेव कहते हैं — देव मन्दिर के पूजन आदि का लोप करने पर प्रायश्चित्त करना चाहिये। पूजा का लोप करने पर एक सौ आठ बार जप करे और दुगुनी पूजा की व्यवस्था… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 173 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय अनेकविध प्रायश्चित्तों का वर्णन प्रायश्चित्तानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ब्रह्मा के द्वारा वर्णित पापों का नाश करने वाले प्रायश्चित्त बतलाता हूँ। जिससे प्राणों का शरीर से वियोग हो जाय, उस कार्य को ‘हनन’… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 172 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बहत्तरवाँ अध्याय समस्त पापनाशक स्तोत्र सर्वपापप्रायश्चित्ते पापनाशनस्तोत्रं ॥ पुष्कर उवाच ॥ परदारपरद्रव्यजीवहिंसादिके यदा । प्रवर्तते नृणां चित्तं प्रायश्चित्तं स्तुतिस्तदा ॥ १ ॥ पुष्कर कहते हैं —जब मनुष्यों का चित्त परस्त्रीगमन, परस्वापहरण एवं जीवहिंसा आदि पापों में प्रवृत्त होता… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 171 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इकहत्तरवाँ अध्याय गुप्त पापों के प्रायश्चित्त का वर्णन रहस्यादिप्रायश्वित्तं पुष्कर कहते हैं —अब मैं गुप्त पापों के प्रायश्चित्तों का वर्णन करता हूँ, जो परम शुद्धिप्रद है । एक मास तक पुरुषसूक्त का जप पाप का नाश करने वाला… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 170 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सत्तरवाँ अध्याय विभिन्न प्रायश्चित्तों का वर्णन प्रायश्चित्तानि पुष्कर कहते हैं — अब मैं महापातकियों का संसर्ग करने वाले मनुष्यों के लिये प्रायश्चित्त बतलाता हूँ । पतित के साथ एक सवारी में चलने, एक आसन पर बैठने, एक साथ… Read More