अग्निपुराण – अध्याय 169 June 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 169 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनहत्तरवाँ अध्याय ब्रह्महत्या आदि विविध पापों के प्रायश्चित्त प्रायश्चित्तानि पुष्कर कहते हैं — अब मैं आपको इन सब पापों का प्रायश्चित्त बतलाता हूँ। ब्रह्महत्या करने वाला अपनी शुद्धि के लिये भिक्षा का अन्न भोजन करते हुए एवं मृतक… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 168 June 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 168 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अड़सठवाँ अध्याय महापातकों का वर्णन महापातकादिकथनम् पुष्कर कहते हैं — जो मनुष्य पापों का प्रायश्चित्त न करें, राजा उन्हें दण्ड दे। मनुष्य को अपने पापों का इच्छा से अथवा अनिच्छा से भी प्रायश्चित्त करना चाहिये। उन्मत्त, क्रोधी और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 167 June 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 167 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सड़सठवाँ अध्याय ग्रहों के अयुत-लक्ष-कोटि हवनों का वर्णन अयुतलक्षकोटिहोमाः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं शान्ति, समृद्धि एवं विजय आदि की प्राप्ति के निमित्त ग्रहयज्ञ का पुनः वर्णन करता हूँ। ग्रहयज्ञ ‘अयुतहोमात्मक’, ‘लक्षहोमात्मक’ और ‘कोटिहोमात्मक’ के भेद… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 166 June 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 166 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छाछठवाँ अध्याय वर्णाश्रम धर्म आदि का वर्णन वर्णधर्मादिकथनं पुष्कर कहते हैं — अब मैं श्रौत और स्मार्त-धर्म का वर्णन करता हूँ। वह पाँच प्रकार का माना गया है। वर्णमात्र का आश्रय लेकर जो अधिकार प्रवृत्त होता है, उसे… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 165 June 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 165 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पैंसठवाँ अध्याय विभिन्न धर्मो का वर्णन नानाधर्माः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! हृदय में जो सर्वसमर्थ परमात्मा दीपक के समान प्रकाशित होते हैं, मन, बुद्धि और स्मृति से अन्य समस्त विषयों का अभाव करके उनका ध्यान करना… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 164 June 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 164 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौंसठवाँ अध्याय नवग्रह हवन का वर्णन नवग्रहहोमः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी! लक्ष्मी, शान्ति पुष्टि, वृद्धि तथा आयुकी इच्छा रखनेवाले वीर्यवान् पुरुष को ग्रहों की भी पूजा करनी चाहिये। सूर्य, सोम, मङ्गल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु तथा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 163 June 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 163 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरसठवाँ अध्याय श्राद्धकल्प का वर्णन श्राद्धकल्पकथनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले श्राद्धकल्प का वर्णन करता हूँ, सावधान होकर श्रवण कीजिये । श्राद्धकर्ता पुरुष मन और इन्द्रियों को वश में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 162 June 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 162 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बासठवाँ अध्याय धर्मशास्त्र का उपदेश धर्मशास्त्रकथनं पुष्कर कहते हैं — मनु, विष्णु, याज्ञवल्क्य, हारीत, अत्रि, यम, अङ्गिरा, वसिष्ठ, दक्ष, संवर्त, शातातप, पराशर, आपस्तम्ब, उशना, व्यास, कात्यायन, बृहस्पति, गौतम, शङ्ख और लिखित — इन सबने धर्म का जैसा उपदेश… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 161 June 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 161 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इकसठवाँ अध्याय संन्यासी के धर्म यतिधर्मः पुष्कर कहते हैं — अब मैं ज्ञान और मोक्ष आदि का साक्षात्कार कराने वाले संन्यास धर्म का वर्णन करूँगा। आयु के चौथे भाग में पहुँचकर, सब प्रकार के सङ्ग से दूर हो… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 160 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 160 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ साठवाँ अध्याय वानप्रस्थ आश्रम वानप्रस्थाश्रमः पुष्कर कहते हैं — अब मैं वानप्रस्थ और संन्यासियों के धर्म का जैसा वर्णन करता हूँ, सुनो। सिर पर जटा रखना, प्रतिदिन अग्निहोत्र करना, धरती पर सोना और मृगचर्म धारण करना, वन में… Read More