अग्निपुराण – अध्याय 149 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनचासवाँ अध्याय होम के प्रकार-भेद एवं विविध फलों का कथन लक्षकोटिहोमः भगवान् महेश्वर ने कहा — देवि ! होम से युद्ध में विजय, राज्यप्राप्ति और विघ्नों का विनाश होता है। पहले ‘कृच्छ्रव्रत’ करके देहशुद्धि करे । तदनन्तर सौ… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 148 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय संग्राम-विजयदायक सूर्य पूजन का वर्णन सङ्ग्रामविजयपूजा भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! (अब मैं संग्राम में विजय देनेवाले सूर्यदेव के पूजन की विधि बताता हूँ।) ‘ॐ डे ख ख्यां सूर्याय संग्रामविजयाय नमः ।’ यह मन्त्र… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 147 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय गुह्यकुब्जिका, नवा त्वरिता तथा दूतियों के मन्त्र एवं न्यास-पूजन आदि का वर्णन त्वरितापूजादिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! (अब मैं गुह्य कुब्जिका, नवा त्वरिता, दूती तथा त्वरिता के गुह्याङ्ग एवं तत्त्वों का वर्णन करूँगा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 146 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छियालीसवाँ अध्याय त्रिखण्डी – मन्त्र का वर्णन, पीठस्थान पर पूजनीय शक्तियों तथा आठ अष्टक देवियों का कथन अष्टाष्टकदेव्यः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर से सम्बन्ध रखनेवाली त्रिखण्डी का वर्णन करूँगा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 145 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पैंतालीसवाँ अध्याय मालिनी आदि नाना प्रकार के मन्त्र और उनके षोढा-न्यास मालिनीनानामन्त्राः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं छः प्रकार के न्यासपूर्वक नाना प्रकार के मन्त्रों का वर्णन करूँगा। ये छहों प्रकार के न्यास ‘शाम्भव’,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 144 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौंवालीसवाँ अध्याय कुब्जिका की पूजा-विधि का वर्णन कुब्जिकापूजा भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं धर्म, अर्थ, काम तथा विजय प्रदान करने वाली श्रीमती कुब्जिकादेवी के मन्त्र का वर्णन करूंगा। परिवारसहित मूलमन्त्र से उनकी पूजा करनी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 143 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय कुब्जिका सम्बन्धी न्यास एवं पूजन की विधि कुब्जिकापूजा महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं कुब्जिका की क्रमिक पूजा का वर्णन करूँगा, जो समस्त मनोरथों को सिद्ध करने वाली है। ‘कुब्जिका’ वह शक्ति है, जिसकी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 142 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बयालीसवाँ अध्याय चोर और जातक का निर्णय, शनि दृष्टि, दिन-राहु, फणि-राहु, तिथि-राहु तथा विष्टि-राहु के फल और अपराजिता-मन्त्र एवं ओषधि का वर्णन मन्त्रौषधादिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं मन्त्र- चक्र तथा औषध चक्रों का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 141 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय छत्तीस कोष्ठों में निर्दिष्ट ओषधियों के वैज्ञानिक प्रभाव का वर्णन षट्त्रिंशत्पदकज्ञानम् महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं छत्तीस पदों (कोष्ठकों) में स्थापित की हुई ओषधियों का फल बताता हूँ। इन ओषधियों के सेवन से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 140 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चालीसवाँ अध्याय वश्य आदि योगों का वर्णन वश्यादियोगाः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं वशीकरण आदि के योगों का वर्णन करूँगा। निम्नाङ्कित ओषधियों को सोलह कोष्ठवाले चक्र में अङ्कित करे — भृङ्गराज (भँगरैया), सहदेवी (सहदेइया),… Read More