अग्निपुराण – अध्याय 159 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 159 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ उनसठवाँ अध्याय असंस्कृत आदि की शुद्धि असंस्कृतादिशौचं पुष्कर कहते हैं — मृतक का दाह संस्कार हुआ हो या नहीं, यदि श्रीहरि का स्मरण किया जाय तो उससे उसको स्वर्ग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति हो सकती है। मृतक… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 158 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 158 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अट्ठावनवाँ अध्याय गर्भस्त्राव आदि सम्बन्धी अशौच स्रावाद्याशौचं पुष्कर कहते हैं — अब मैं मनु आदि महर्षियों के मत के अनुसार गर्भस्राव जनित अशौच का वर्णन करूँगा। चौथे मास के स्राव तथा पाँचवें, छठे मास के गर्भपात तक यह… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 157 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 157 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय मरणाशौच तथा पिण्डदान एवं दाह-संस्कारकालिक कर्तव्य का कथन शावाशौचादिः पुष्कर कहते हैं — अब मैं ‘प्रेतशुद्धि’ तथा ‘सूतिकाशुद्धि’ का वर्णन करूँगा। सपिण्डों में अर्थात् मूल पुरुष की सातवीं पीढ़ी तक की संतानों में मरणाशौच दस दिन… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 156 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 156 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ छप्पनवाँ अध्याय द्रव्य-शुद्धि का वर्णन द्रव्यशुद्धिः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब द्रव्यों की शुद्धि बतलाऊँगा । मिट्टी का बर्तन पुनः पकाने से शुद्ध होता है। किंतु मल-मूत्र आदि से स्पर्श हो जाने पर वह पुन: पकाने… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 155 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 155 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचपनवाँ अध्याय आचार का वर्णन आचारः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! प्रतिदिन प्रातः काल ब्राह्ममुहूर्त में उठकर श्रीविष्णु आदि देवताओं का स्मरण करे। दिन में उत्तर की ओर मुख करके मल-मूत्र का त्याग करना चाहिये, रात में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 154 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 154 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ चौवनवाँ अध्याय विवाहविषयक बातें विवाहः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! ब्राह्मण अपनी कामना के अनुसार चारों वर्णों की कन्याओं से विवाह कर सकता है, क्षत्रिय तीन से, वैश्य दो से तथा शूद्र एक ही स्त्री से विवाह… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 153 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 153 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ तिरपनवाँ अध्याय संस्कारों का वर्णन और ब्रह्मचारी के धर्म का वर्णन ब्रह्मचर्याश्रमधर्मः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! अब मैं आश्रमी पुरुषों के धर्म का वर्णन करूँगा; सुनो! यह भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है। स्त्रियों के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 152 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 152 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ बावनवाँ अध्याय गृहस्थ की जीविका का वर्णन गृहस्थवृत्तिः पुष्कर कहते हैं — परशुरामजी ! ब्राह्मण अपने शास्त्रोक्त कर्म से ही जीविका चलावे; क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र के धर्म से जीवन-निर्वाह न करे। आपत्तिकाल में क्षत्रिय और वैश्य की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 151 June 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 151 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय वर्ण और आश्रम सामान्य धर्म, वर्णों तथा विलोमज जातियों के विशेष धर्म का वर्णन वर्णेतरधर्माः अग्निदेव कहते हैं — मनु आदि राजर्षि जिन धर्मो का अनुष्ठान करके भोग और मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं, उनका वरुण… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 150 June 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 150 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ पचासवाँ अध्याय मन्वन्तरों का वर्णन मन्वन्तराणि अग्निदेव कहते हैं — अब मैं मन्वन्तरों का वर्णन करूँगा। सबसे प्रथम स्वायम्भुव मनु हुए हैं। उनके आग्नीध्र आदि पुत्र थे। स्वायम्भुव मन्वन्तर में यम नामक देवता, और्व आदि सप्तर्षि तथा शतक्रतु… Read More