अग्निपुराण – अध्याय 273 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिहत्तरवाँ अध्याय सूर्यवंश का वर्णन सूर्य्यवंशकीर्त्तनं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं तुमसे सूर्यवंश तथा राजाओं के वंश का वर्णन करता हूँ। भगवान् विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा जी प्रकट हुए हैं। ब्रह्माजी के पुत्र का नाम… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 272 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बहत्तरवाँ अध्याय विभिन्न पुराणों के दान तथा महाभारत-श्रवण में दान-पूजन आदि का माहात्म्य दानादिमाहात्म्यम् पुष्कर कहते हैं — परशुराम। पूर्वकाल में लोकपितामह ब्रह्मा ने मरीचि के सम्मुख जिस का वर्णन किया था, पचीस हजार श्लोकों से समन्वित उस… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 271 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ एकहत्तरवाँ अध्याय वेदों के मन्त्र और शाखा आदि का वर्णन तथा वेदों की महिमा वेद शाखादिकीर्तनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम! वेदमन्त्र सम्पूर्ण विश्वपर अनुग्रह करने वाले तथा चारों पुरुषार्थों के साधक हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 270 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तरवाँ अध्याय विष्णु पञ्जर स्तोत्र का कथन विष्णु पञ्जरम् पुष्कर कहते हैं — द्विजश्रेष्ठ परशु राम। पूर्वकाल में भगवान् ब्रह्मा ने त्रिपुर संहार के लिये उद्यत शंकर की रक्षा के लिये ‘विष्णुपञ्जर’ नामक स्तोत्र का उपदेश किया था।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 269 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनहत्तरवाँ अध्याय छत्र, अश्व, ध्वजा, गज, पताका, खड्ग, कवच और दुन्दुभि की प्रार्थना के मन्त्र छत्रादिमन्त्रादयः पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! अब मैं छत्र आदि राजोपकरणों के प्रार्थनामन्त्र बतलाता हूँ, जिनसे उन की पूजा कर के नरेशगण… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 268 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अड़सठवाँ अध्याय सांवत्सर-कर्म; इन्द्र-शची की पूजा एवं प्रार्थना; राजा के द्वारा भद्रकाली तथा अन्यान्य देवताओं के पूजन की विधि; वाहन आदि का पूजन तथा नीराजना नीराजनाविधिः पुष्कर कहते हैं — अब मैं राजाओं के करने योग्य सांवत्सर-कर्म का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 267 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सरसठवाँ अध्याय माहेश्वर-स्नान आदि विविध स्नानों का वर्णन; भगवान् विष्णु के पूजन से तथा गायत्रीमन्त्र द्वारा लक्ष होमादि से शान्ति की प्राप्ति का कथन माहेश्वर स्नानं लक्षकोटिहोमादयः पुष्कर कहते हैं — अब मैं राजा आदि की विजयश्री को… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 266 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छाछठवाँ अध्याय विनायक-स्नान विधि विनायक स्नान कथनं पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! जो मनुष्य विघ्नराज विनायक द्वारा पीड़ित हैं, उनके लिये सर्व-मनोरथ साधक स्नान की विधि का वर्णन करता हूँ। कर्म में विघ्न और उसकी सिद्धि के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 265 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पैंसठवाँ अध्याय दिक्पाल स्नान की विधि का वर्णन दिक्पालादिस्नानम् पुष्कर कहते हैं — परशुराम ! अब मैं सम्पूर्ण अर्थों को सिद्ध करने वाले शान्तिकारक स्नान का वर्णन करता हूँ, सुनो। बुद्धिमान् पुरुष नदी तट पर भगवान् श्रीविष्णु एवं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 264 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौंसठवाँ अध्याय देवपूजा तथा वैश्वदेव-बलि आदि का वर्णन देवपूजावैश्व देव बलिः पुष्कर कहते हैं — परशु राम ! अब मैं देवपूजा आदि कर्म का वर्णन करूँगा, जो उत्पातों को शान्त करने वाला है। मनुष्य स्नान करके ‘आपो हि… Read More