अग्निपुराण – अध्याय 283 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिरासीवाँ अध्याय नाना रोगनाशक ओषधियों का वर्णन नाना रोगहराण्यौषधानि भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं — अडूसा,मुलहठी या कचूर [1], दोनों प्रकार की हल्दी और इन्द्रयव — इनका क्वाथ बालकों के सभी प्रकार के अतिसार में तथा स्तन्य (माता के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 282 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बयासीवाँ अध्याय आयुर्वेदोक्त वृक्ष-विज्ञान वृक्षायुर्वेदः भगवान् धन्वन्तरि ने कहा — सुश्रुत! अब मैं वृक्षायुर्वेद का वर्णन करूँगा। क्रमशः गृह के उत्तर दिशा में प्लक्ष (पाकड़), पूर्व में वट (बरगद), दक्षिण में आम्र और पश्चिम में अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 281 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इक्यासीवाँ अध्याय रस आदि के लक्षण [1] रसादिलक्षणं भगवान् धन्वन्तरि ने कहा — सुश्रुत। अब मैं ओषधियों के रस आदि के लक्षणों और गुणों का वर्णन करता हूँ, ध्यान देकर सुनो। जो ओषधियों के रस, वीर्य और विपाक… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 280 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अस्सीवाँ अध्याय सर्वरोगहर औषधों का वर्णन सर्वरोगहराण्यौषधानि भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत ! शारीर, मानस, आगन्तुक और सहज — ये चार प्रकार की व्याधियाँ हैं। ज्वर और कुष्ठ आदि ‘शारीर’ रोग हैं, क्रोध आदि ‘मानस’ रोग हैं,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 279 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ उनासीवाँ अध्याय [^1] सिद्ध ओषधियों का वर्णन सिद्धौषधानिः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आयुर्वेद का वर्णन करूँगा, जिसे भगवान् धन्वन्तरि ने सुश्रुत से कहा था। यह आयुर्वेद का सार है और अपने प्रयोगों द्वारा मृतक… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 278 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरुवंश का वर्णन पुरुवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! पूरु से जनमेजय हुए, जनमेजय से प्राचीवान् नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। प्राचीवान् से मनस्यु और मनस्यु से राजा वीतमय का जन्म हुआ। वीतमय से शुन्धु हुआ, शुन्धु… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 277 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय तुर्वसु आदि राजाओं के वंश का तथा अङ्गवंश का वर्णन राजवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! तुर्वसु के पुत्र वर्ग और वर्ग के पुत्र गोभानु हुए। गोभानु से त्रैशानि, त्रैशानि से करंधम और करंधम से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 276 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छिहत्तरवाँ अध्याय श्री कृष्ण की पत्नियों तथा पुत्रों के संक्षेप से नामनिर्देश तथा द्वादश-संग्रामों का संक्षिप्त परिचय द्वादशसङ्ग्रामाः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ महर्षि कश्यप वसुदेव के रूप में अवतीर्ण हुए थे और नारियों में श्रेष्ठ अदिति का… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 275 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचहत्तरवाँ अध्याय यदुवंश का वर्णन यदुवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ । यदु के पाँच पुत्र थे — नीलाञ्जिक, रघु, क्रोष्टु, शतजित् और सहस्रजित्। इनमें सहस्रजित् सबसे ज्येष्ठ थे। शतजित् के हैहय, रेणुहय और हय — ये तीन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 274 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौहत्तरवाँ अध्याय सोमवंश का वर्णन सोमवंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं सोमवंश का वर्णन करूँगा, इसका पाठ करने से पाप का नाश होता है। विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए। ब्रह्मा के पुत्र महर्षि अत्रि… Read More