ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 81 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) इक्यासीवाँ अध्याय ब्रह्मा व शिव द्वारा शुक्र को समझाना, तारा द्वारा पुत्र जन्म तथा गुरु के साथ जाना श्रीकृष्ण बोले — इसी बीच शुक्र ने आकाशमार्ग से आती हुई देव-सेना को देखा, जो युद्ध के शस्त्रास्त्र धारण किये थी । उस सेना… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 80 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) अस्सीवाँ अध्याय चन्द्रमा द्वारा तारा का अपहरण, तारा द्वारा चन्द्रमा को शाप देना तथा शुक्र द्वारा उपदेश देना श्रीकृष्ण बोले — पूर्व समय में गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा जो नवीन यौवन सम्पन्न, रत्नों के आभूषणों से सुभूषित, अत्युत्तम और सूक्ष्म वस्त्र… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 79 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) उन्नासीवाँ अध्याय जमदग्नि तथा सूर्य का परस्पर शाप देना, ब्रह्माजी द्वारा दोनों को समझाना-बुझाना नन्द बोले — हे जगत्प्रभो ! राहु से ग्रस्त सूर्य और चन्द्रमा तथा भादों मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में चन्द्रमा का दर्शन क्यों… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 78 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) अठहत्तरवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के द्वारा नन्द को आध्यात्मिक ज्ञान का उपदेश, बाईस प्रकार की सिद्धि, सिद्धमन्त्र तथा अदर्शनीय वस्तुओं का वर्णन नन्दजी बोले — जगन्नाथ श्रीकृष्ण ! मैंने अच्छे स्वप्नों का वर्णन सुना। यह वेदों का सारभाग तथा लौकिक- वैदिक नीति का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 77 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) सतहत्तरवाँ अध्याय सुस्वप्न-दर्शन के फल का विचार नन्दजी ने पूछा — प्रभो ! किस स्वप्न से कौन-सा पुण्य होता है और किससे मोक्ष एवं सुख की सूचना मिलती है ? कौन-कौनसा स्वप्न शुभ बताया गया है ? श्रीभगवान् बोले — तात !… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 76 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) छिहत्तरवाँ अध्याय जिनके दर्शन से पुण्यलाभ और जिनके अनुष्ठान से पुनर्जन्म का निवारण होता है, वस्तुओं और सत्कर्मों का वर्णन तथा विविध दानों के पुण्यफल का कथन श्रीनन्द ने कहा — सर्वेश्वर ! जिनके दर्शन से पुण्य और जिन्हें देखने से पाप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 75 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) पचहत्तरवाँ अध्याय लोकनीति, लोकमर्यादा तथा लौकिक सदाचार से सम्बन्ध रखने वाले विविध विधि-निषेधों का वर्णन, कुसङ्ग और कुलटा की निन्दा, सती और भक्त की प्रशंसा, शिवलिङ्ग-पूजन एवं शिव की महत्ता नन्दजी की यह बात सुनकर सर्वज्ञ भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्हें श्रुति-दुर्लभ आह्निक-कृत्य-सम्बन्धी… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 74 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) चौहतरवाँ अध्याय श्रीकृष्ण द्वारा नन्दजी को ज्ञानोपदेश श्रीनारायण कहते हैं — नारद! भगवान् श्रीकृष्ण परमानन्दमय परिपूर्णतम प्रभु हैं। भक्तों पर अनुग्र हके लिये व्याकुल रहने वाले परम परमात्मा हैं। पृथ्वी का भार उतारने के लिये अवतीर्ण हुए वे भगवान् निर्गुण, प्रकृति से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 73 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) तिहतरवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का नन्द को अपना स्वरूप और प्रभाव बताना; गोलोक, रासमण्डल और राधा-सदन का वर्णन; श्रीराधा के महत्त्व का प्रतिपादन तथा उनके साथ अपने नित्य सम्बन्ध का कथन और दिव्य विभूतियों का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर शोक… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 72 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) बहतरवाँ अध्याय पुरी की शोभा का वर्णन, कुब्जा पर कृपा, माली को वरदान, धोबी का उद्धार, कुब्जा का गोलोकगमन, कंस का दुःस्वप्न, रङ्गभूमि में कंस का पधारना, धनुर्भङ्ग, हाथी का वध, कंस का उद्धार, उग्रसेन को राज्यदान, माता-पिता के बन्धन काटना, वसुदेवजी… Read More