॥ भगवती दुर्गा ॥ एकाक्षर:- भगवती दुर्गा का एकाक्षरी बीजमंत्र “दुं” है । दां दीं दूं दें दौं दः से अङ्गन्यास करे । ॥ अथ अष्टाक्षर मंत्र प्रयोगः ॥ भगवती दुर्गा का अष्टाक्षर मंत्र प्रधान हैं ।… Read More


॥ भगवती गौरी ॥ चतुरक्षर मन्त्रः- “ह्रीं भवान्यै नमः” मंत्र के अज ऋषि, छन्द अनुष्टप, देवता गौरी हैं । बालार्काऽभां त्रिनयनां खड्गखेटवराभयान् । दोर्भिदधानां सिंहस्थां भवानीं भावयेत् सदा ॥… Read More


॥ दुर्गाभुवनवर्णनम् ॥ ॥ श्री भैरव उवाच ॥ तंत्रादौ देवि वक्ष्येऽहं दुर्गाभुवनमद्भुतम् । जयं नाम महादिव्यं बहुविस्तारविस्तृतम् । नानारत्न समाकीर्णं सूर्यकोटिसमप्रभम् ॥ १७ ॥ इन्द्रगोपकवर्णं च चन्द्रकोटिमनोहरम् । अप्रमेयमसंख्यैयमगम्यं सर्ववादिनाम् ॥ १८ ॥… Read More


भगवान् श्रीशङ्कराचार्य विरचित श्रीभगवती-मानस-पूजा-स्तोत्र (हिन्दी पद्यानुवाद श्री अमरसिंह ‘अमर’) ॥ प्रबोधन ॥ उषा-काल में गायक जन की मङ्गल-ध्वनि से शीघ्र जागिए । महती कृपा-कटाक्ष द्वारा, जगदम्बे ! जग को सुख-मय करिए ॥ १ ॥ ॥ आवाहन ॥ स्वर्ण-वेदियों से अति शोभित, दिशि-दिशि स्वर्ण-कलश से सज्जित । मणि-मय मम मानस-मण्डप में, कृपया पूजन ग्रहण कीजिए ॥… Read More


श्रीभगवती शतक (पञ्जाब के सिद्ध सन्त पूज्य दौलतराम जी रचित) नमो भगवती ! जागती ज्योति-ज्वाला । तुही रक्ष-पाला कृपाला दयाला ॥ तुही दीन के दुःख-दारिद्र हरती । तुही भक्त को पार संसार करती ॥ १ ॥ तुही भूरि सुख की सदा देन-हारी । सभी छोंड़ि मैं ओट लीन्ही तिहारी ॥ नमो योगिनी ! योग में… Read More


विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आठ-भुजी अम्बिका, एक नाम ओङ्कार । खट्-दर्शन त्रिभुवन में, पाँच पण्डवा सात दीप । चार खूँट नौ खण्ड में, चन्दा-सूरज दो प्रमाण । हाथ जोड़ बिनती करूँ, मम करो कल्याण ।।”… Read More


देवी कृपा-प्राप्ति के लिए पहले कोई भी एक पुराना मन्दिर भग्न मन्दिर ढूंढ़े, जहाँ कोई न जाता हो । फिर किसी भी दिन वहाँ जाकर देवता को अक्षत आदि देकर निमन्त्रण दे दें कि आपकी कृपा के लिए मैं यहाँ ४० दिन नित्य आऊँगा । दूसरे दिन से रात को १२ बजे वहाँ जाकर यथा-शक्ति… Read More


भगवती ( शताक्षी) शाकम्भरी प्राचीन समय की बात है । दुर्गम नाम का एक महान् दैत्य था । उसका जन्म हिरण्याक्ष के कुलमें हुआ था तथा उसके पिताका नाम रुरु था । ‘देवताओं का बल वेद है । वेदके लुप्त हो जाने पर देवता भी नहीं रहेंगे’ – ऐसा सोचकर दुर्गम ने ब्रह्माजी से वर… Read More


श्रीदुर्गा आसुरी-कल्प विनियोगः- ॐ आसुरी-मन्त्रस्य, अंगिरा ऋषिः, विराट् छन्दः, श्रीदुर्गा आसुरी देवता, ॐ वीजं, स्वाहा शक्तिः, वशीकरणे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- अंगिरा ऋषये नमः शिरसि, विराट् छन्दसे नमः मुखे, श्रीदुर्गा आसुरी देवतायै नमः हृदि, ॐ वीजाय नमः गुह्ये, स्वाहा शक्तये नमः पादयो, वशीकरणे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।… Read More


अत्यधिक कष्ट-शान्ति के लिए श्रीवन-दुर्गा मन्त्र-विधान सङ्कल्पः- देश-कालौ स्मृत्वा अमुक-गोत्रोऽमुक-शर्माहं अमुक-कार्य-सिद्धयर्थे (मनोऽभिलषित-कार्य-सिद्धयर्थे वा) श्रीवन-दुर्गा-मन्त्रस्य एकादश-शत-संख्यक-जपं करिष्ये । विनियोगः- ॐ अस्य श्रीवन-दुर्गा-देवता-मन्त्रस्य श्रीआरण्यक ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीवन-दुर्गा देवता, ॐ वीजं, स्वाहा शक्तिः, सङ्कल्पोद्दिष्ट-कार्य-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More