भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १२० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १२० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १२० वैवस्वतके लक्षण और सूर्यनारायणको महिमा विष्णुभगवान् ने ब्रह्माजी से पूछा — ब्रह्मन् । संसार में मनुष्य विष, रोग, ग्रह और अनेक प्रकार के उपद्रवों से पीड़ित रहते हैं, यह किन कर्म का फल है,… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११९ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११९ यमदूत और नारकीय जीवोंके संवादके प्रसंगमें सूर्य-मन्दिरमें दीपदान करने एवं दीप चुराने के पुण्य-पापों का परिणाम ब्रह्माजी बोले— विष्णो ! एक समय घोर नरक में पड़े हुए भूखे, आर्त-दुःखी और विलाप करते हुए जीव… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११८ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११८ भद्र ब्राह्मण की कथा एवं कार्तिक मासमें सूर्य-मन्दिरमें दीपदानका फल ब्रह्माजी बोले — विष्णो ! जो कार्तिक मास में सूर्यदेव के मन्दिर में दीप प्रज्वलित करता है, उसे सम्पूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११७ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११७ भोजकों की उत्पत्ति तथा उनके लक्षणों का वर्णन अरुण ने पूछा — भगवन् ! यह भोजक कौन हैं ? किसका पुत्र हैं ? इसने ऐसा कौन-सा उत्तम कर्म किया है, जिस कारण ब्राह्मण आदि… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११६ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११६ सूर्य-भक्त सत्राजित् की कथा तथा त्रिविक्रम-व्रतकी विधि ब्रह्माजी बोले — विष्णो ! प्राचीन काल में राजा ययाति के कुल में सत्राजित् नामक एक प्रतापी चक्रवर्ती राजा हुए थे । वे अत्यन्त प्रभावशाली, तेजस्वी, कान्तिमान्,… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११३ से ११४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११३ से ११४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११३ से ११४ कौसल्या और गौतमीके संवाद-रूप में भगवान् सूर्यका माहात्म्य-निरूपण तथा भगवान् सूर्यके प्रिय पत्र-पुष्पादि का वर्णन ब्रह्माजी बोले — जनार्दन ! देवलोक में गौतमी और कौसल्या का सूर्य के विषय में… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११३ से ११४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११३ से ११४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११३ से ११४ सूर्य-मन्दिर निर्माण का फल तथा यमराज का अपने दूतों को सूर्य-भक्तों से दूर रहने का आदेश, घृत तथा दूध से अभिषेक का फल ब्रह्माजी ने कहा — हे वासुदेव !… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११२ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११२ सूर्यपूजा में भाव-शुद्धि की आवश्यकता एवं त्रिप्राप्ति-सप्तमी-व्रत ब्रह्माजी बोले — गरुडध्वज ! भक्तिपूर्वक शुद्ध हृदय से मात्र जलार्पणद्वारा भी सूर्यभगवान् की पूजा करने पर दुर्लभ फल की प्राप्ति हो जाती है । राग-द्वेषादि से… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११० से १११ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ११० से १११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ११० से १११ अनन्त-सप्तमी तथा अव्यङ्ग-सप्तमीका विधान ब्रह्माजी ने कहा — अच्युत ! भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को जितेन्द्रिय होकर सप्ताश्ववाहन भगवान् आदित्य को प्रणाम करके पुष्य-धूप आदि सामग्रियों से… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १०७ से १०९ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १०७ से १०९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १०७ से १०९ सूर्यपदद्वय-व्रत, सर्वाप्ति-सप्तमा एव मार्तण्ड-सप्तमी की विधि ब्रह्माजी बोले — धर्मज्ञ ! अब मैं जगद्धाता देवदेवेश्वर भगवान् सूर्यनारायण के पदद्वय-माहात्म्य का वर्णन करता हूँ, इसे आप सुनें — अंशुमाली सूर्यदेव ने… Read More