November 24, 2018 | aspundir | 1 Comment || श्री नाथस्तोत्र राजः || नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयेऽन्वहम्। नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयऽन्वहम् ॥1॥ अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः। अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः ॥ 2 ॥ रक्षा मा दक्ष गोरक्ष ! क्षरमोक्षद माऽक्षर। जयकाम महाराज, जराहा मम कायज ॥ 3 ॥ घनसारद नाथाय, यथा नाद रसा नघ। ते स्तुमो नरधामारे, हेमाधार ! नमोऽस्तुते ॥ 4 ॥ विभु संमत नादो वा, वादो ना तमसं भुवि। ते स्तुमो नयवादेशं , शं देवाय नमोऽस्तुते ॥ 5 ॥ नवपारद सायामा, मायासादर पावन। ते स्तुमो नवमीनार्या, र्यानामीव नमोऽस्तुते ॥ 6 ॥ वन जानि वश वेशा, शावेशा वनिजा नव। कायिना नुत शं खेन, नशे शं तनु नायिका ॥ 7॥ किं न हीन जरं देवं, बंदे रंजन हीन किम्। दाससारस मा सेवा, वासे मा सरसा सदा ॥ 8 ॥ सवने जय देवेशा, शावेदे यजने वस। तारता जर वै देवे, वेदे दे रजया रता ॥ 9 ॥ भाशु भास जरा भासा, साभा राज सभा शुभा। सार राज तथा भाषा, साभा यात जरा रसा ॥ 10 ॥ श्रीमानायकृतः समोऽप्युभयतः श्रीस्स्तोत्रराजोऽधुना, नाथानां मुदमावहन् विजयते, निर्णीतसारो रसः। पक्षे दक्षविचारितेऽपि जनयन्नानन्दमन्यार्थदो, बालानां शरणार्थिनां शरणदो, वर्वर्ति सर्वोपरि ॥ 11 ॥ शिवम् स्वस्ति श्रीश्रेयः श्रेणायः श्रीमतां समुल्लसन्तु तराम्। श्री नाथाय नम:। Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe
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