भूत-प्रेत, बाधा-नाशक मन्त्र

विधि:- सूर्य या चन्द्र ग्रहण अथवा दीपावली की महानिशा में इस मन्त्र को सिद्ध कर लिया जाये। सिद्धि के समय पूजा, प्रसाद, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य आदि का ध्यान रखना चाहिए ।
आवश्यकता होने पर इस मन्त्र से सात बार जल अभिमन्त्रित करके रोगी को वह जल पिला दें । साथ ही बाधा-ग्रस्त व्यक्ति को मोर-पंख से मन्त्रोच्चारण करते हुए सात बार झाड़ दें।

मन्त्रः-
“ओम नमो आदेश गुरू को ओम अपर के या कट मेष खम्ब प्रति प्रहलाद राखे पाताल राखे पाँव देवी जंघा राखे काली का मस्तक राखे महादेव जी कोई या पिण्ड प्राण को छोड़े-छोड़े तो देव-दानव-भूत-प्रेत-डाकिनी-शाकिनी गण्डा ताप तिजारी जूड़ी एक पहरु दो पहरु सांझ को सबेरे को किया को कराया को उलट वाही के पिण्ड परे इस पिण्ड की रक्षा श्री नरसिंह जी करे शब्द सांचा पिण्ड कांचा फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।”

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3 comments on “भूत-प्रेत, बाधा-नाशक मन्त्र

  • सर एक तांत्रिक ने पाच साल से प्रयोग किए हुए है । मुझे
    आवाज़े सुनाई देती है । और मेरा माइंड सेट मै जिस तरह
    चलाना चाहता हु । उसी प्रकार नहि कंट्रोल हो रहा ।
    मै सर रजिस्ट्रेशन की प्रोसेसिंग जानना चाहता हु।
    मै संगीत मै रुचि रखता हु। लेकिन प्रयोग की वजह से
    एकाग्रता नहि बनी रहती है ।
    सो प्लीज सर

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