December 13, 2025 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीराधाकृतं गणेशस्तोत्रम् ॥ विघ्ननाश के लिये ॥ ध्यान ॥ शर्वं लम्बोदरं स्थूलं ज्वलन्तं ब्रह्मतेजसा । गजवक्त्रं वह्निवर्णमेकदन्तमनन्तकम् ॥ सिद्धानां योगिनामेव ज्ञानिनां च गुरोर्गुरुम् । ध्यातं मुनीन्द्रैर्देवेन्द्रैर्ब्रह्मेशशेषसंज्ञकैः ॥ सिद्धेन्द्रैर्मुनिभिः सद्भिर्भगवन्तं सनातनम् । ब्रह्मस्वरूपं परमं मङ्गलं मङ्गलालयम् ॥ सर्वविघ्नहरं शान्तं दातारं सर्वसंपदाम् । भवाब्धिमायापोतेन कर्णधारं च कर्मिणाम् ॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणम् । ध्यायेद्ध्यानात्मकं साध्यं भक्तेशं भक्तवत्सलम् ॥ ‘जो खर्व (छोटे कदवाले), लम्बोदर ( तोंदवाले), स्थूलकाय, ब्रह्मतेजसे उद्भासित, हाथी से मुखवाले, अग्निसरीखे कान्तिमान्, एकदन्त और असीम हैं; जो सिद्धों, योगियों और ज्ञानियोंके गुरु-के-गुरु हैं; ब्रह्मा, शिव और शेष आदि देवेन्द्र, मुनीन्द्र, सिद्धेन्द्र, मुनिगण तथा संतलोग जिनका ध्यान करते हैं; जो ऐश्वर्यशाली, सनातन, ब्रह्मस्वरूप, परम मङ्गल, मङ्गलके स्थान, सम्पूर्ण विघ्नोंको हरनेवाले, शान्त, सम्पूर्ण सम्पत्तियोंके दाता, कर्मयोगियोंके लिये भवसागरमें मायारूपी जहाजके कर्णधारस्वरूप शरणागत- दीन-दुःखीकी रक्षामें तत्पर, ध्यानरूप साधना करनेयोग्य, भक्तोंके स्वामी और भक्तवत्सल हैं; उन गणेशका ध्यान करना चाहिये ।’ ॥ राधिकोवाच ॥ परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमीश्वरम् । विघ्ननिघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनन्तकम् ॥ सुरासुरेन्द्रैः सिद्धेन्द्रैः स्तुतं स्तौमि परात्परम् । सुरपद्मदिनेशं च गणेशं मङ्गलायनम् ॥ इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम् । यः पठेत्प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात्प्रमुच्यते ॥ (ब्रह्मवैवर्त्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्ड १२१ । १०३–१०५ ) श्रीराधिका ने कहा — जो परम धाम, परब्रह्म, परेश, परमेश्वर, विघ्नोंके विनाशक, शान्त, पुष्ट, मनोहर और अनन्त हैं; प्रधान-प्रधान सुर और असुर जिनका स्तवन करते हैं; जो देवरूपी कमल के लिये सूर्य और मङ्गलों के आश्रय स्थान हैं; उन परात्पर गणेश की मैं स्तुति करती हूँ । यह उत्तम स्तोत्र महान् पुण्यमय तथा विघ्न और शोक को हरनेवाला है । जो प्रातः काल उठकर इसका पाठ करता है, वह सम्पूर्ण विघ्नों से विमुक्त हो जाता है। उक्त स्तोत्र से पूर्व यदि नम्न मन्त्र का एक सहस्र जप करें तो अतिउत्तम होता है – मन्त्रः- ‘ॐ गं गौं गणपतये विघ्नविनाशिने स्वाहा’ Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe