शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 31 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इकतीसवाँ अध्याय शिव द्वारा ब्रह्मा-विष्णु को शंखचूड का पूर्ववृत्तान्त बताना और देवों को शंखचूडवध का आश्वासन देना सनत्कुमार बोले — अत्यन्त दीन ब्रह्मा तथा विष्णुजी का वचन सुनकर शंकरजी हँसते हुए मेघ के समान गम्भीर वाणी में कहने लगे — ॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 30 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसवाँ अध्याय ब्रह्मा तथा विष्णु का शिवलोक पहुँचना, शिवलोक की तथा शिवसभा की शोभा का वर्णन, शिवसभा के मध्य उन्हें अम्बासहित भगवान् शिव के दिव्यस्वरूप का दर्शन और शंखचूड से प्राप्त कष्टों से मुक्ति के लिये प्रार्थना सनत्कुमार बोले — हे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 29 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनतीसवाँ अध्याय शंखचूड का राज्यपद पर अभिषेक, उसके द्वारा देवों पर विजय, दुखी देवों का ब्रह्माजी के साथ वैकुण्ठगमन, विष्णु द्वारा शंखचूड के पूर्वजन्म का वृत्तान्त बताना और विष्णु तथा ब्रह्मा का शिवलोक-गमन सनत्कुमार बोले — [हे व्यास!] तपस्या करके वर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 28 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठाईसवाँ अध्याय शंखचूड की पुष्कर-क्षेत्र में तपस्या, ब्रह्मा द्वारा उसे वर की प्राप्ति, ब्रह्मा की प्रेरणा से शंखचूड का तुलसी से विवाह सनत्कुमार बोले — इसके बाद उस शंखचूड ने जैगीषव्य महर्षि के उपदेश से ब्रह्माजी के पुष्कर-क्षेत्र में प्रीतिपूर्वक बहुत… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय शंखचूड की उत्पत्ति की कथा सनत्कुमार बोले — हे मुने ! अब आप शंकरजी का एक और चरित प्रेमपूर्वक सुनिये, जिसके सुननेमात्र से शंकरजी के प्रति दृढ़ भक्ति उत्पन्न हो जाती है ॥ १ ॥ एक शंखचूड नामक दानव… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय विष्णुजी के मोहभंग के लिये शंकरजी की प्रेरणा से देवों द्वारा मूलप्रकृति की स्तुति, मूलप्रकृति द्वारा आकाशवाणी के रूप में देवों को आश्वासन, देवताओं द्वारा त्रिगुणात्मिका देवियों का स्तवन, विष्णु का मोहनाश, धात्री (आँवला), मालती तथा तुलसी की उत्पत्ति… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय जलन्धरवध से प्रसन्न देवताओं द्वारा भगवान् शिव की स्तुति सनत्कुमार बोले — [हे व्यास!] इसके बाद ब्रह्मा आदि सभी देवता एवं मुनिगण सिर झुकाकर प्रिय वाणी से देवदेवेश की स्तुति करने लगे — ॥ १ ॥ ॥ देवा ऊचुः… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय दैत्यराज जलन्धर तथा भगवान् शिव का घोर संग्राम, भगवान् शिव द्वारा चक्र से जलन्धर का शिरश्छेदन, जलन्धर का तेज शिव में प्रविष्ट होना, जलन्धर-वध से जगत् में सर्वत्र शान्ति का विस्तार व्यासजी बोले — ब्रह्माजी के श्रेष्ठ पुत्र परम… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय विष्णु द्वारा माया उत्पन्नकर वृन्दा को स्वप्न के माध्यम से मोहित करना और स्वयं जलन्धर का रूप धारणकर वृन्दा के पातिव्रत का हरण करना, वृन्दा द्वारा विष्णु को शाप देना तथा वृन्दा के तेज का पार्वती में विलीन होना… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय श्रीशिव और जलन्धर का युद्ध, जलन्धर द्वारा गान्धर्वी माया से शिव को मोहितकर शीघ्र ही पार्वती के पास पहुँचना, उसकी माया को जानकर पार्वती का अदृश्य हो जाना और भगवान् विष्णु को जलन्धरपत्नी वृन्दा के पास जाने के लिये… Read More