॥ मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ Continue :- मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद नवाक्षरी मृत्युञ्जय – ॐ जूं सः पालय पालय । दशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्र – ॐ जूं सः मां पालय पालय । (किसी अन्य के लिये ‘मां’ के स्थान पर रोगी का नाम द्वितीया विभक्ति का एक वचन बनाकर जोड़ देना चाहिये) द्वादशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्रः –… Read More


॥ अथ शिव पञ्चावरण देवानां स्तुतिः ॥ इस स्तोत्र में रुद्र यन्त्र में वर्णित पूजा का वृहत् कर्म है जो व्यक्ति नित्य रुद्र यन्त्र का अर्चन करने में असमर्थ हैं वे यदि इस स्तोत्र का पाठ करें तो उसे यन्त्रार्चन का पूर्ण फल मिलता है । स्तोत्रं वक्षामि ते कृष्ण पंचावरणमार्गतः । योगेश्वरमिदं पुण्यं कर्म… Read More


॥ अथ त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ बहुधा मृत्युञ्जय प्रयोग रोग-पीड़ा निवारण में ही करते हैं । ग्रहपीड़ा शमन में भी शुभ है । शिव प्रतिमा व शिवलिङ्ग पर अलग-अलग कामना के लिये अलग-अलग अभिषेक द्रव्य हैं । अभिचार व प्रेतादि दोष में सरसों के तेल का अभिषेक, उष्णज्वर, टाईफाईड में दही की छाछ… Read More


॥ श्री रुद्र कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ विनियोग- ॐ अस्य श्री रुद्र कवच स्तोत्र महा मंत्रस्य दूर्वासऋषिः अनुष्ठुप् छंदः त्र्यंबक रुद्रो देवता ह्रां बीजं श्रीं शक्तिः ह्रीं कीलकम् – मम मनसोभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ह्रामित्यादिषड्बीजैः षडंगन्यासः ॥ ॥ ध्यानम् ॥… Read More


॥ ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ॥ नारद उवाच ॥ शिवस्य कवचं ब्रूहि मत्स्य राजेन यद्धृतम् । नारायण महाभाग श्रोतुं कौतूहलं मम ॥ १ ॥ ॥ श्रीनारायण उवाच ॥… Read More


॥ सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरव उवाच ॥ शैलजे देवदेवेशि सर्वाम्नायप्रपूजिते । सर्वं मे कथितं देवि कवचं न प्रकाशितम् ॥ १ ॥ प्रासाद्याख्यस्य मन्त्रस्य कवचं मे प्रकाशय । सदाशिवमहादेवभावितं सिद्धिदायकम् ॥ २ ॥ अप्रकाश्यं महामन्त्रं भैरवीभैरवोदयम् । सर्वरक्षाकरं देवि यदि स्नेहोऽस्ति मां प्रति ॥ ३ ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरवी उवाच ॥… Read More


॥ श्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम् – महाभारतान्तर्गतम् ॥ ॥ वासुदेव उवाच ॥ ततः स प्रयतो भूत्वा मम तात युधिष्ठिर । प्राञ्जलिः प्राह विप्रर्षिर्नामसङ्ग्रहमादितः ॥ १ ॥ ॥ उपमन्युरुवाच ॥ ब्रह्मप्रोक्तैर्ऋषिप्रोक्तैर्वेदवेदाङ्गसम्भवैः । सर्वलोकेषु विख्यातं स्तुत्यं स्तोष्यामि नामभिः ॥ २ ॥ महद्भिर्विहितैः सत्यैः सिद्धैः सर्वार्थसाधकैः । ऋषिणा तण्डिना भक्त्या कृतैर्वेदकृतात्मना ॥ ३ ॥ यथोक्तैः साधुभिः ख्यातैर्मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः । प्रवरं प्रथमं स्वर्ग्यं… Read More


॥ दक्षिणामूर्ति शिव ॥ दक्षिणामूर्ति शिव को तन्त्रों का रचियता माना है । बुद्धि, विवेक व ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाले एवं जगद्गुरु है । जिन लोगों को सद्गुरु का आश्रय नहीं मिल पा रहा है वे दक्षिणामूर्ति शिव को गुरु मानकर अपनी साधना को आगे बढ़ा सकते हैं । यदि दीक्षित मन्त्र के अलावा… Read More


॥ शिव श्रीकण्ठादि कलामातृका न्यासः ॥ कोई भी रुद्र प्रयोग हो, मृत्युंजय प्रयोग या शिव के किसी अन्य स्वरूप का यन्त्र का प्रयोग पुरश्चरणादि, होवें तो श्रीकण्ठादि कलामातृका न्यास करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती है । विनियोगः – अस्य श्रीकण्ठादिकलान्यासस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिः, गायत्री छन्दः, अर्द्धनारीश्वरो देवता, हलो बीजानि, स्वराः शक्तयः, चतुर्विध पुरुषार्थ सिद्ध्यर्थे न्यासे… Read More


॥ रुद्र यन्त्रम् ॥ रुद्र यन्त्र के मध्य में पञ्चकोण है, उसके बाहर अष्टदल, उसके बाहर षोडशदल, उसके ऊपर चतुर्विंशतिदल, उसके ऊपर द्वात्रिंशदल तथा उसके बाहर चत्वारिंशदल (कहीं-कहीं पर ४५ दल का भी लेख है।) पश्चात् बाहर भूपूर में (द्वारयुक्त परिधि) बनाकर यन्त्र शोधन करें। यह यन्त्र शिव पूजन व मृत्युञ्जय प्रयोग दोनों में किया… Read More