अथर्ववेदीया श्रीराधिकातापनीयोपनिषत् ॥ अथर्ववेदीया श्रीराधिकातापनीयोपनिषत् ॥ [ श्रुतियों द्वारा श्रीराधिकाजी की अपरिमित महिमा की प्रतिपादक स्तुति] “ब्रह्मवादिनो वदन्ति, कस्माद्राधिकामुपासते आदित्योऽभ्यद्रवत् ॥ १ ॥ श्रुतय ऊचुः— सर्वाणि राधिकाया दैवतानि सर्वाणि भूतानि राधिकायास्तां नमामः ॥ २ ॥ देवतायतनानि कम्पन्ते राधाया हसन्ति नृत्यन्ति च सर्वाणि राधादैवतानि । सर्वपापक्षयायेति व्याहृतिभिर्हुत्वाथ राधिकायै नमामः ॥ ३ ॥ भासा यस्याः कृष्णदेहोऽपि गौरो जायते देवस्येन्द्रनीलप्रभस्य… Read More
ऋग्वेदीया श्रीराधोपनिषत् ॥ ऋग्वेदीया श्रीराधोपनिषत् ॥ [ भगवत्स्वरूपा श्रीराधिकाजी की महिमा तथा उनका स्वरूप ] “ओमथोर्ध्व मन्थिन ऋषयः सनकाद्या भगवन्तं हिरण्यगर्भमुपासित्वोचुः देव कः परमो देवः, का वा तच्छक्तयः, तासु च का वरीयसी भवतीति सृष्टिहेतुभूता च केति । स होवाच — हे पुत्रकाः शृणुतेदं ह वाव गुह्याद् गुह्यतरमप्रकाश्यं यस्मै कस्मै न देयम् । स्निग्धाय ब्रह्मवादिने गुरुभक्ताय देयमन्यथा दातुर्महदघम्भवतीति… Read More
राधोपनिषत् ॥ राधोपनिषत् ॥ प्रथमः प्रपाठकः ॐ अथ सुषुप्तौ रामः स्वबोधमाधायेव किं मे देवः ? क्वासौ कृष्णो योऽयं मम भ्रातेति ? तस्य का निष्ठा ब्रूहीति । सा वै ह्युवाच । राम शृणु-भूर्भुवः स्वर्महर्जनस्तपः सत्यं तलं वितलं सुतलं रसातलं तलातलं महातलं पातालं एवं पञ्चाशत्कोटियोजनं बहुलं स्वर्णाण्डं ब्रह्माण्डमिति अनन्तकोटिब्रह्माण्डानामुपरि कारणजलोपरि महाविष्णोर्नित्यं स्थानं वैकुण्ठः ।… Read More
श्रीराधामाधव एवं उनके परिकरों आदि का परिचय श्रीराधामाधव एवं उनके परिकरों आदि का परिचय (व्रज-लीला के सन्दर्भ में) श्रीकृष्ण एवं उनके लीला—सहचर पितामह — पर्जन्य। पितामही – वरीयसी। मातामह — सुमुख। मातामही – पाटला। ताऊ — उपनन्द एवं अभिनन्द। ताई — तुंगी (उपनन्द की पत्नी), पीवरी (अभिनन्द की पत्नी)। चाचा — सन्नन्द (सुनन्द) एवं नन्दन । चाची — कुवलया (सन्नन्द की पत्नी),… Read More
संत श्री जलाराम बापा संत श्री जलाराम बापा संत श्री जलाराम बापा एक हिन्दु संत थे । वे राम-भक्त थे । वे ‘बापा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं । जलाराम बापा का जन्म सन् 1799 (4 नवम्बर 1799 विक्रम सम्वत 1856, वीरपुर-(खेरडी राज्य) में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव में हुआ था । ये लोहाणा क्षत्रियकुल में… Read More
चित्रध्वज से चित्रकला चित्रध्वज से चित्रकला प्राचीनकाल में चन्द्रप्रभ नाम के एक राजर्षि थे । भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से उन्हें चित्रध्वज नामक सुन्दर पुत्र प्राप्त था । वह बचपन से ही भगवान् का भक्त था । जब वह बारह वर्ष का हुआ, तब राजा ने किसी ब्राह्मण के द्वारा उसे अष्टादशाक्षर (ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा)… Read More
श्रीजानकी-मंगल – हिन्दी भावार्थ सहित श्रीजानकी-मंगल – हिन्दी भावार्थ सहित ( प्रातः स्मरणीय गोस्वामी तुलसीदास जी ने जगज्जननी आद्याशक्ति भगवती श्री जानकी जी तथा परात्पर पुर्ण पुरूषोत्तम भगवान् श्रीराम के परम मंगलमय विवाहोत्सव का बड़े ही मधुर शब्दों में वर्णन किया है। जनक पुर मे स्वयंवर की तैयारी से आरंभ करके विश्वामित्र के अयोध्या जाकर श्रीराम -लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा… Read More
श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ श्रीहरिः ॥ ॥ श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ आरति अतिपावन पुरान की । धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ महापुरान भागवत निरमल । शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल । परमानन्द-सुधा-रसमय कल । लीला-रति-रस रस-निधान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ कलि-मल-मथनि त्रिताप-निवारिनि । जन्म-मृत्युमय भव-भय-हारिनि । सेवत सतत सकल सुखकारिनि । सुमहौषधि हरि-चरित-गान की ॥ आरति… Read More
वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षयतृत्तीया) वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षयतृत्तीया) वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षयतृतीया कहते हैं । यह सनातनधर्मियों का प्रधान त्यौहार है । इस दिन दिये हुए दान और किये हुए स्त्रान, होम, जप आदि सभी कर्मों का फल अनन्त 1 होता है – सभी अक्षय हो जाते हैं; इसीसे इसका नाम अक्षया 2 हुआ है । इसी तिथि… Read More
श्रीभगवती-मानस-पूजा-स्तोत्र भगवान् श्रीशङ्कराचार्य विरचित श्रीभगवती-मानस-पूजा-स्तोत्र (हिन्दी पद्यानुवाद श्री अमरसिंह ‘अमर’) ॥ प्रबोधन ॥ उषा-काल में गायक जन की मङ्गल-ध्वनि से शीघ्र जागिए । महती कृपा-कटाक्ष द्वारा, जगदम्बे ! जग को सुख-मय करिए ॥ १ ॥ ॥ आवाहन ॥ स्वर्ण-वेदियों से अति शोभित, दिशि-दिशि स्वर्ण-कलश से सज्जित । मणि-मय मम मानस-मण्डप में, कृपया पूजन ग्रहण कीजिए ॥… Read More